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बैंक में हालात सुधरे, पर एटीएम धड़ाम
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहपुर
Updated Sat, 24 Dec 2016 12:55 AM IST
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बैंक आफ बड़ौदा में पैसा निकालने आई बुजुर्ग महिला को उठाए पौत्र।
- फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी ने हर शख्स को रुपयों की अहमियत से वाकिफ करा दिया है। खुद पर अनाप शनाप रुपया खर्च करने वाले ऐसे हालात में हाथ सिकोड़ कर काम करने लगे हैं। यह उन गृहणियों को अपरोक्ष रूप से खूब भा रहे हैं, जो घर के पुरुषों के बेइंतहा खर्च से परेशान रहती थीं। इससे तमाम खर्चो में कटौती चालू हो गई है।
न्यायिक कर्मी सुरेश सिंह बताते हैं कि अपने खर्चे कम कर रहे हैं। लोधीगंज के दुकानदार पुत्तीलाल शर्मा कहते हैं कि खरीदार नहीं आ रहे हैं। नोटबंदी से पहले दिनभर में वह 15 से 20 रुपये का पान मसाला खाते थे। अब यह शौक ही बंद कर दिया है। उधर, पुुरुषों को संचय की राह पर चलता देख गृहणियां खुश हैं। आबूनगर की साजिदा कहती हैं कि नोटबंदी से पहले शौहर आदिल अपने ऊपर हर रोज कम से कम 150 रुपया खर्च करते थे। अब यह घटकर 15 से 20 रुपये पर टिक गया है।
मुराइनटोला मोहल्ला की रानी भी इस बदलाव को स्वीकार करती हैं। बकौल रानी पति महेंद्र ने अपने खर्च में खासी कटौती की है। वह चाय के शौकीन हैं। दिन भर में कम से कम छह से सात मर्तबा चाय पीते थे। अब एक दो बार में ही काम चला रहे हैं।
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न्यायिक कर्मी सुरेश सिंह बताते हैं कि अपने खर्चे कम कर रहे हैं। लोधीगंज के दुकानदार पुत्तीलाल शर्मा कहते हैं कि खरीदार नहीं आ रहे हैं। नोटबंदी से पहले दिनभर में वह 15 से 20 रुपये का पान मसाला खाते थे। अब यह शौक ही बंद कर दिया है। उधर, पुुरुषों को संचय की राह पर चलता देख गृहणियां खुश हैं। आबूनगर की साजिदा कहती हैं कि नोटबंदी से पहले शौहर आदिल अपने ऊपर हर रोज कम से कम 150 रुपया खर्च करते थे। अब यह घटकर 15 से 20 रुपये पर टिक गया है।
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मुराइनटोला मोहल्ला की रानी भी इस बदलाव को स्वीकार करती हैं। बकौल रानी पति महेंद्र ने अपने खर्च में खासी कटौती की है। वह चाय के शौकीन हैं। दिन भर में कम से कम छह से सात मर्तबा चाय पीते थे। अब एक दो बार में ही काम चला रहे हैं।
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