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वेटर ने कनस्तर में जोड़ रखे थे रुपये, निकले एक लाख
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहपुर
Updated Thu, 10 Nov 2016 12:36 AM IST
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वेटर सुमित
- फोटो : अमर उजाला
पांच सौ और हजार के नोट प्रतिबंधित होने से एक किशोर वेटर सुमित की गाढ़ी कमाई का सच सामने आ गया। इसे वह पांच साल से छिपाए रखे था। बांदा जिले के बबेरू थाना के पतवर गांव का रहने वाला 16 साल का यह सुमित दो साल से शहर में रहने वाले नाना रिटायर्ड लेखपाल राम किशोर सोनी के घर पर मां रेखा और छोटे भाई आलोक के साथ जीविका तलाश रहा है। दो साल से वह मॉडल शॉप में सुरा शौकीनों को अपनी सेवाएं देकर मिलने वाली रकम को घर में रखे कनस्तर में रखता चला आ रहा था। मंगलवार को जैसे ही इसे इन नोटों के बंद हो जाने की खबर लगी, मॉडल शाप का शटर गिरने के बाद सीधे घर आया। उसने मां के सहयोग से कनस्तर में जमा किए गए नोट गिनने शुरू किए तो फिर गिनता ही गया। कनस्तर में 500-500 के सौ नोट निकले। 10 नोट एक-एक हजार रुपये के थे। इसके अलावा 100-100 के 30 नोट को मिलाकर इस कनस्तर से एक लाख रुपये निकले। इस रकम को देख कर सुमित की मां की खुशी का ठिकाना न रहा। हालांकि यह खुशी कुछ ही देर की मेहमान रही, क्याेंकि खपाने के फिलहाल सारे दरवाजे बंद हो चुके हैं। सुमित ने बताया कि उसके पिता राम प्रसाद की कई साल पहले मौत हो गई थी। तब वह बहुत छोटा था। पढ़ाई लिखाई की उम्र में तकदीर ने उसे वेटर बना दिया। अच्छा तो नहीं लगता, यह काम करते, क्योंकि इसमें जलालत बहुत है। थोड़ा सुरूर चढ़ने के बाद पीने वाले उल्टी सीधी बातें करने लगते हैं। उसका अपना बैंक खाता भी नहीं है।
फतेहपुर। नोट प्रतिबंधित होने से लोग उन्हें खपाने के नाम पर हर तरह का समझौता करते देखे गए। यही वजह रही कि जुगाड़ की कमाई का दौर शहर में कई स्थानों पर चलता रहा। चौक, मसवानी, बाकरगंज, आबूनगर, देवीगंज, हरिहरगंज, ज्वालागंज, पनी आदि मोहल्लों में ऐसे जुगाड़ुओं की अच्छी खासी संख्या रही। जो मजबूरी को भुनाते रहे। यही वजह रही कि पांच सौ के बदले यह 450 रुपये के खुदरा देते देखे गए।
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फतेहपुर। पेट्रोल पंप संचालकों ने भी एक हजार रुपये व पांच सौ रुपये नोट बंद होने का फायदा उठाया। जितने की नोट उतने का ही वाहन स्वामियों को डीजल, पेट्रोल भराना पड़ा। 100 रुपये की नोट देने पर भी 50 रुपये का पेट्रोल बाइक सवार नहीं भरा सके। इसको लेकर पेट्रोल पंप के आसपास भी अफरा-तफरी का माहौल रहा। पेट्रोल पंप में हजार, पांच सौ के नोट लिए जाने की सूचना पर सुबह से ही लोग डीजल, पेट्रोल की खरीदने के लिए पहुंच गए। सुबह कुछ समय तक तो कई पेट्रोल पंप में पांच सौ का नोट लेकर 200-300 रुपये का पेट्रोल दिया जा रहा था। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, पेट्रोल पंपोें में भीड़ बढ़ती गई। फिर पेट्रोल पंप संचालकों ने इसका फायदा उठाया। जो जितने के नोट लाया, उसको उतने का ही पेट्रोल भरना शुरू कर दिए। शाम तक किसी को भी एक रुपये की वापसी नहीं की। पांच व हजार के नोट से छुटकारा पाने के लिए लोग मजबूरी में पूरे रुपये का पेट्रोल भराते रहे।
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फतेहपुर। नोट प्रतिबंधित होने से लोग उन्हें खपाने के नाम पर हर तरह का समझौता करते देखे गए। यही वजह रही कि जुगाड़ की कमाई का दौर शहर में कई स्थानों पर चलता रहा। चौक, मसवानी, बाकरगंज, आबूनगर, देवीगंज, हरिहरगंज, ज्वालागंज, पनी आदि मोहल्लों में ऐसे जुगाड़ुओं की अच्छी खासी संख्या रही। जो मजबूरी को भुनाते रहे। यही वजह रही कि पांच सौ के बदले यह 450 रुपये के खुदरा देते देखे गए।
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फतेहपुर। पेट्रोल पंप संचालकों ने भी एक हजार रुपये व पांच सौ रुपये नोट बंद होने का फायदा उठाया। जितने की नोट उतने का ही वाहन स्वामियों को डीजल, पेट्रोल भराना पड़ा। 100 रुपये की नोट देने पर भी 50 रुपये का पेट्रोल बाइक सवार नहीं भरा सके। इसको लेकर पेट्रोल पंप के आसपास भी अफरा-तफरी का माहौल रहा। पेट्रोल पंप में हजार, पांच सौ के नोट लिए जाने की सूचना पर सुबह से ही लोग डीजल, पेट्रोल की खरीदने के लिए पहुंच गए। सुबह कुछ समय तक तो कई पेट्रोल पंप में पांच सौ का नोट लेकर 200-300 रुपये का पेट्रोल दिया जा रहा था। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, पेट्रोल पंपोें में भीड़ बढ़ती गई। फिर पेट्रोल पंप संचालकों ने इसका फायदा उठाया। जो जितने के नोट लाया, उसको उतने का ही पेट्रोल भरना शुरू कर दिए। शाम तक किसी को भी एक रुपये की वापसी नहीं की। पांच व हजार के नोट से छुटकारा पाने के लिए लोग मजबूरी में पूरे रुपये का पेट्रोल भराते रहे।
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