{"_id":"622e3c3129e9984e065d1d3c","slug":"the-narrator-said-that-doing-karma-gets-the-fruit-fatehpur-news-knp685502234","type":"story","status":"publish","title_hn":"कथावाचक ने कहा कर्म करने मिलता है फल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कथावाचक ने कहा कर्म करने मिलता है फल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमौली (फतेहपुर)। मदरी गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन पंडित सौरभ तिवारी महराज ने गोवर्धन लीला की कथा से कर्म करने से ही फल की प्राप्ति होने का महत्व बताया।
पंडित सौरभ ने कहा कि ब्रजवासी इंद्र को प्रसन्न करने के लिए यज्ञ की तैयारी कर रहे थे। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि आप इंद्र के लिए यज्ञ क्यों कर रहे हो। नंद बाबा ने कहा कि अगर हम इंद्र के लिए यज्ञ नहीं करेंगे, तो इंद्र देवता वर्षा नहीं करेंगे। अगर इंद्र वर्षा नहीं करेंगे तो हमारे खेत में कुछ पैदा नहीं होगा। भगवान कृष्ण ने कहा इंद्र देव का यह कर्तव्य है कि भगवान ने उसे यह सेवा दी है। अगर तुम्हें यज्ञ करना है तो गिरिराज गोवर्धन की करो। भगवन कृष्ण ने सभी ब्रजवासियों को गिरिराज के लिए यज्ञ करने के लिए कहा।
गिरिराज गोवर्धन भगवान विष्णु स्वरूप हैं। भगवान कृष्ण ने गिरिराज के लिए यज्ञ करके यह सिद्ध किया, कि अगर भगवान को प्रसन्न कर लिया जाए तो देवी देवताओं को प्रसन्न करने की आवश्यकता नहीं रहती। गिरिराज की पूजा में भगवान ने शिक्षा दी कि व्यक्ति को अपना कर्म सदैव करते रहना चाहिए। कर्म करने से ही व्यक्ति को फल की प्राप्ति होती है। कथा में 56 भोग लगाया गिरिराज उत्सव धूमधाम से मनाया गया। शनि अवस्थी, बहादुर मिस्त्री, विनीत आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
पंडित सौरभ ने कहा कि ब्रजवासी इंद्र को प्रसन्न करने के लिए यज्ञ की तैयारी कर रहे थे। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि आप इंद्र के लिए यज्ञ क्यों कर रहे हो। नंद बाबा ने कहा कि अगर हम इंद्र के लिए यज्ञ नहीं करेंगे, तो इंद्र देवता वर्षा नहीं करेंगे। अगर इंद्र वर्षा नहीं करेंगे तो हमारे खेत में कुछ पैदा नहीं होगा। भगवान कृष्ण ने कहा इंद्र देव का यह कर्तव्य है कि भगवान ने उसे यह सेवा दी है। अगर तुम्हें यज्ञ करना है तो गिरिराज गोवर्धन की करो। भगवन कृष्ण ने सभी ब्रजवासियों को गिरिराज के लिए यज्ञ करने के लिए कहा।
विज्ञापन
गिरिराज गोवर्धन भगवान विष्णु स्वरूप हैं। भगवान कृष्ण ने गिरिराज के लिए यज्ञ करके यह सिद्ध किया, कि अगर भगवान को प्रसन्न कर लिया जाए तो देवी देवताओं को प्रसन्न करने की आवश्यकता नहीं रहती। गिरिराज की पूजा में भगवान ने शिक्षा दी कि व्यक्ति को अपना कर्म सदैव करते रहना चाहिए। कर्म करने से ही व्यक्ति को फल की प्राप्ति होती है। कथा में 56 भोग लगाया गिरिराज उत्सव धूमधाम से मनाया गया। शनि अवस्थी, बहादुर मिस्त्री, विनीत आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन