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मजदूर अभी भी दहशतजदा
अमर उजाला ब्यूरो /फतेहपुर
Updated Tue, 04 Apr 2017 12:35 AM IST
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कोल्ड स्टोर में रहने वाले मजदूरों का स्थान
- फोटो : अमर उजाला
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जहानाबाद कस्बे के गरिमा कोल्ड स्टोर में अमोनिया गैस रिसाव हादसे का शिकार होने से बचे बिहार निवासी मजदूर अभी भी दहशतजदा हैं। उनकी आंखों में मौत का मंजर अभी भी बसा है। यही वजह है कि इन चश्मदीद गवाहाें की रुह आपबीती सुनाते सुनाते कांपने लगती है। मजदूरों का कहना है कि जिस जगह बिल्डिंग ढही, वहीं सो रहे थे। गनीमत रही कि सभी को झपकी आई थी, जिससे वे बाल-बाल बच गए। हादसा देर रात में होता तो वह जिंदगी से हाथ धो बैठते।
जिला मुख्यालय से 58 किलोमीटर दूर बसे एतिहासिक कस्बे के इस कोल्ड स्टोर में काफी संख्या में बिहारी मजूदर काम करते हैं। मजदूर कुमोद शर्मा ने बताया कि आलू की लोडिंग का काम सुबह हुआ था। शाम साढ़े सात बजे वे खाना बनाने जा रहे थे, तभी दक्षिण की दीवार ढह गई।
इसके ढहने से अमोनिया गैस का पाइप फटा और दुर्गंध फैल गई। अमोनिया गैस फैलने की भनक लगते ही जो जैसी हालत में था, बाहर निकलने के जतन में जुट गए। उनके साथ दर्जन भर मजदूर कोल्ड स्टोर की दीवार फांद कर किसी तरह बाहर निकल सके। बकौल कुमोद, वह सभी लोग खाना पीना करने के बाद दक्षिण की दीवार के बगल में ही खुले में सोते थे। गनीमत रही कि हादसा जल्दी हो गया। अगर यह रात नौ बजे के बाद होता तो किसी की भी जान सलामत न बचती। यह दहशत की असर था कि आपबीती सुनाते सुनाते एक अन्य बिहारी मजदूर श्याम सुंदर कांपने लगा। जिसे कुमोद ने साहस बंधाते हुए सामान्य किया।
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जिला मुख्यालय से 58 किलोमीटर दूर बसे एतिहासिक कस्बे के इस कोल्ड स्टोर में काफी संख्या में बिहारी मजूदर काम करते हैं। मजदूर कुमोद शर्मा ने बताया कि आलू की लोडिंग का काम सुबह हुआ था। शाम साढ़े सात बजे वे खाना बनाने जा रहे थे, तभी दक्षिण की दीवार ढह गई।
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इसके ढहने से अमोनिया गैस का पाइप फटा और दुर्गंध फैल गई। अमोनिया गैस फैलने की भनक लगते ही जो जैसी हालत में था, बाहर निकलने के जतन में जुट गए। उनके साथ दर्जन भर मजदूर कोल्ड स्टोर की दीवार फांद कर किसी तरह बाहर निकल सके। बकौल कुमोद, वह सभी लोग खाना पीना करने के बाद दक्षिण की दीवार के बगल में ही खुले में सोते थे। गनीमत रही कि हादसा जल्दी हो गया। अगर यह रात नौ बजे के बाद होता तो किसी की भी जान सलामत न बचती। यह दहशत की असर था कि आपबीती सुनाते सुनाते एक अन्य बिहारी मजदूर श्याम सुंदर कांपने लगा। जिसे कुमोद ने साहस बंधाते हुए सामान्य किया।
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