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फतेहपुरःफैक्टरी संचालक ने दिवंगत मजदूरों के परिवारों को दी तीन-तीन लाख की आर्थिक मदद
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मर्च्यूरी हाउस में गमगीन खड़े परिजन
- फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। बिजली तार जोड़ने में दो फैक्टरी कर्मियों की मौत के मामले में गुरुवार को पक्षों के बीच समझौता हुआ है। परिवार के लोगों की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। फैक्टरी संचालक की ओर से तीन-तीन लाख रुपये की आर्थिक मदद पीड़ित परिवारों को दी गई है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है।
कानपुर देहात मंगलपुर थाना क्षेत्र के औरंगाबाद गांव निवासी रामशंकर का बेटा राजू बाथम, श्रीराम का बेटा राजवीर कासिमपुर गांव में सूखा चारा बनाने की फैक्टरी में काम करते थे। फैक्टरी की बिजली सप्लाई का कनेक्शन जोड़ने के लिए बुधवार को बिजली पोल पर चढ़े थे, तभी करंट की चपेट में आने से दोनों की मौत हो गई थी।
फैक्टरी मालिक इस्लाम का बेटा छोटू झुलस गया था। दोनों के परिवार के लोग गुरुवार को मार्च्युरी हाउस पहुंचे। बेटों का शव देखकर रोने बिलखने लगे। रामशंकर ने बताया कि चार बेटों सत्यवान, पुष्पेंद्र, आशीषी में राजू दूसरे नंबर का बेटा था। तीन बेटियां हैं। उसकी मां कमला देवी का हाल बेहाल है। दूसरा राजवीर तीन भाइयों संतोष, अशोक में सबसे छोटा था। एक बहन शादीशुदा है। मां सावित्री निशक्त है।
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परिवार के लोगों ने पहले फैक्टरी मालिक पर आरोप प्रत्यारोप लगाए। बाद में बातचीत का सिलसिला चालू हुआ। करीब दोपहर दो बजे फैक्टरी मालिक की ओर से परिवारों को तीन तीन लाख की आर्थिक मदद दी गई। जिसके बाद शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। कोतवाल रवींद्र श्रीवास्तव ने बताया कि परिजनों की ओर से हादसे की तहरीर दी गई है। किसी को आरोपी नहीं माना है।
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कानपुर देहात मंगलपुर थाना क्षेत्र के औरंगाबाद गांव निवासी रामशंकर का बेटा राजू बाथम, श्रीराम का बेटा राजवीर कासिमपुर गांव में सूखा चारा बनाने की फैक्टरी में काम करते थे। फैक्टरी की बिजली सप्लाई का कनेक्शन जोड़ने के लिए बुधवार को बिजली पोल पर चढ़े थे, तभी करंट की चपेट में आने से दोनों की मौत हो गई थी।
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फैक्टरी मालिक इस्लाम का बेटा छोटू झुलस गया था। दोनों के परिवार के लोग गुरुवार को मार्च्युरी हाउस पहुंचे। बेटों का शव देखकर रोने बिलखने लगे। रामशंकर ने बताया कि चार बेटों सत्यवान, पुष्पेंद्र, आशीषी में राजू दूसरे नंबर का बेटा था। तीन बेटियां हैं। उसकी मां कमला देवी का हाल बेहाल है। दूसरा राजवीर तीन भाइयों संतोष, अशोक में सबसे छोटा था। एक बहन शादीशुदा है। मां सावित्री निशक्त है।
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परिवार के लोगों ने पहले फैक्टरी मालिक पर आरोप प्रत्यारोप लगाए। बाद में बातचीत का सिलसिला चालू हुआ। करीब दोपहर दो बजे फैक्टरी मालिक की ओर से परिवारों को तीन तीन लाख की आर्थिक मदद दी गई। जिसके बाद शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। कोतवाल रवींद्र श्रीवास्तव ने बताया कि परिजनों की ओर से हादसे की तहरीर दी गई है। किसी को आरोपी नहीं माना है।