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साथी चोर को पहचान लेने पर हुई रामस्वरूप की हत्या

Mon, 10 Oct 2016 12:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/फतेहपुर
अमर उजाला ब्यूरो/फतेहपुर Updated Mon, 10 Oct 2016 12:11 AM IST
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Swaroop fellow thief was killed when it recognizes
कैंप ऑफिस में एसपी के पीछे खड़ा हत्यारोपी - फोटो : अमर उजाला
असोथर थाना क्षेत्र के सरकं डी गांव के मजरे शिवपरसन तिवारी का डेरा निवासी रामस्वरूप रैदास (60) की बुधवार रात हत्या हुई थी। पुलिस ने हत्या और चोरी की रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी। रविवार को पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी ने कैंप कार्यालय में बताया कि असोथर थाने के कौंडर मोड़ से हत्यारोपी हथगाम थाना क्षेत्र के तुलसीदासपुर गांव निवासी बाबूलाल के बेटे करन को गिरफ्तार किया गया है।
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हत्यारोपी के पास दो मोबाइल बरामद हुए। जिसमें एक मोबाइल रामस्वरूप का है। आरोपी की निशानदेही पर चाकू, घटना के दौरान खून से रंगे कपड़े भी बरामद कर लिए गए हैं। कपड़े मिट्टी खोदकर छिपाए गए थे।पुलिस के मुताबिक आरोपी ने कबूल किया है कि मास्टरमाइंड उमेश भी शिवपरसन तिवारी का डेरा निवासी है। उमेश ने चार अक्तूबर को उसे अपने गांव बुलाया था। वहीं रामस्वरूप के घर चोरी करने की योजना बनाई गई थी।
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उमेश को मालूम था कि रामस्वरूप की पत्नी घर पर नहीं है। पांच अक्तूबर की रात घटना को अंजाम देने के लिए छत के रास्ते रामस्वरूप के घर पहुंचे थे। घर में रखे बर्तनों में उमेश का पैर पड़ जाने से आवाज हुई। बर्तनों के खटपट की आवाज से रामस्वरूप जाग उठा। उसने पहचान लिया और बोला उमेश घर के अंदर कैसे पहुंचे। फंसने के डर से दोनों ने रामस्वरूप की चाकू  से गला रेतने के बाद चाकू से ही गोदकर हत्या कर दी।
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फिर रामस्वरूप का मोबाइल लेकर फरार हो गए थे। एसपी ने बताया आरोपी उमेश फरार है। उसकी जल्द ही गिरफ्तारी हो जाएगी। मामले के खुलासे में एसओ ज्ञान सिंह यादव, स्वॉट प्रभारी पीके सिंह, इंटेलीजेंस प्रभारी अर्जुन सिंह, सर्विलांस प्रभारी राजेश सिंह की भूमिका रही है।


घबराहट में लूटपाट नहीं कर पाए थे
हत्यारोपी करन ने बताया कि हत्याकांड के बाद दोनों लोग खौफजदा हो गए। पकड़े जाने के डर से घर में रखा मोबाइल के अलावा कोई दूसरा सामान नहीं छुआ। दोबारा छत के रास्ते फरार हो गए। सबसे पहले गांव किनारे सरकंडी नहर पुलिया के पास रणविजय सिंह के खेतों पर कपड़े और चाकू छिपा दिया था। इसके बाद वह अपने गांव चला गया।  



मुंबई में काम करते थे साथ
हथगाम का करन और असोथर के उमेश के  बीच मुंबई में दोस्ती हुई थी। दोनों प्राइवेट नौकरी करते थे। एक साल पहले नौकरी छोड़कर वापस अपने-अपने गांव आ गए थे। उनका अक्सर एक दूसरे मिलना जुलना होता रहता था। करन ने बताया कि पहली बार किसी घर में चोरी करने घुसे थे और फंस गए।
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