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जिले में मुलायम गुट की सपा को झटका

Sat, 14 Jan 2017 12:42 AM IST
अमर उजाला/फतेहपुर
अमर उजाला/फतेहपुर Updated Sat, 14 Jan 2017 12:42 AM IST
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soft shock to mulayam group
कायार्लय - फोटो : amarujala
सपा मुलायम सिंह यादव गुट के जिलाध्यक्ष रामशरण को अपनी जिला कार्यकारिणी घोषित करने के बाद तगड़ा झटका लगा है। शुक्रवार को तीन सपाइयों ने कार्यकारिणी से अपने को अलग करते हुए इस नए पद से खुद को अलग कर लिया है। उनका कहना है कि उन्हें नेताजी में पूरी आस्था है लेकिन वे सीएम अखिलेश यादव के साथ हैं।
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बता दें कि मुलायम गुट के जिलाध्यक्ष रामशरण यादव ने गुरुवार को 43 सदस्यीय कार्यकारिणी घोषित की थी। दूसरे दिन तीन मनोनीत सपाइयों ने बाकायदा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर नई कार्यकारिणी से खुद को अलग कर लिया। इनमें बनाए गए सचिव सतीश राज सिंह और प्रकाश गुप्ता ने कहा है कि उन्हें कार्यकारिणी में शामिल होने की जानकारी समाचार पत्रों से हुई है। हमारे आदर्श मुलायम सिंह यादव हैं और नेता अखिलेश सिंह हैं। ऐसी हालत में आस्था सीएम के साथ है। वह उनकी ही कमेटी में काम करेंगे, दूसरी कमेटी में नहीं। इनके अलावा कार्यकारिणी सदस्य रमेश लोधी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह सीएम गुट के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह यादव की कार्यकारिणी में पदाधिकारी हैं। उनकी आस्था सीएम से जुड़ी है। ऐसी हालत में किसी दूसरी कार्यकारिणी में काम करना संभव नहीं। इस बारे में जब मुलायम गुट के जिलाध्यक्ष रामशरण यादव को फोन किया गया तो उनका कहना है कि फिलहाल वह कुछ बोलना नहीं चाहते। इस बारे में वह बयान शनिवार को देंगे।
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फतेहपुर। सपा जिला कार्यालय में शुक्रवार को भी दोनों गुटों के जिलाध्यक्ष पहुंचे। पहले सीएम गुट के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह यादव और उनके कुछ देर बाद मुलायम गुट जिलाध्यक्ष रामशरण यादव पहुंचे। दोनों अध्यक्ष करीब एक घंटे तक साथ बैठे रहे। कुछ देर बाद सुरेंद्र सिंह पहले निकले और कुछ ही देर बाद रामशरण यादव कार्यालय से चले गए।
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जिले में दो जिलाध्यक्ष हो जाने से पार्टी कार्यकर्ता व नेता दोनों असमंजस में हैं। पार्टी मुखिया स्तर से सिंबल को लेकर शुक्रवार को भी कोई समझौता नहीं हो सका। ऐसे में पार्टी जनों के बीच एक सवाल यह भी उठने लगा है कि यदि समझौता नहीं हुआ तो जिले का पार्टी कार्यालय किसका होगा। क्या इसी तरह चुनाव पर रार चलती रहेगी? यह नौबत तब आएगी जब साइकिल फ्रीज होगी।


यदि साइकिल किसी भी गुट को मिल गई तो क्या जिले स्तर की रार थम जाएगी। पार्टी दफ्तर एक ही कार्यकारिणी व जिलाध्यक्ष को ध्यान में रखकर बनाया गया है। ऐसे में दूसरे गुट की रणनीति, कार्ययोजना व प्रचार-प्रसार कैसे इसी दफ्तर से हो पाएगा।
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