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राधेश्याम के पकड़े जाने लगने लगा जिंदा है सीताराम
अमर उजाला ब्यूरो फतेहपुर
Updated Thu, 23 Jun 2016 01:36 AM IST
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धरे गए सीताराम और बाकी फतेहपुर के रहने वाले साथी।
- फोटो : अमर उजाला
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असोथर थाना क्षेत्र में वर्ष 1997 में मुठभेड़ के दौरान कांस्टेबल की हत्या के बाद फरार मोस्ट वांटेड सीताराम मौर्या अब पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। सीताराम से पहले नौ जनवरी को बड़ा भाई राधेश्याम मौर्या पकड़ा जा चुका है। दोनों की खोज में नाकाम होने के बाद जिला पुलिस इन्हें मृत मान चुकी थी।
इलाहाबाद यूनिट एसटीएफ ने दोनों को छह माह में बारी-बारी से दबोचा है। राधेश्याम की गिरफ्तारी के बाद ही लग रहा था कि सीताराम भी जिंदा है। एसटीएफ इस खुलासे को दबाए रही और अब सीताराम मौर्या की गिरफ्तारी के बाद सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। यह खागा के पूर्व विधायक धुन्नी सिंह और उनके भतीजे अशोक सिंह(ऐरायां ब्लाक के प्रमुख) की हत्या की योजना बनाए था।
खूंखार सगे भाई सुल्तानपुर घोष थाना क्षेत्र ओरम्हा गांव निवासी हैं। असोथर मुठभेड़ के बाद 1998 में इनके घरों की कुर्की हुई थी, जिसके बाद से उनके घरों में ताले लटक रहे हैं। हत्या, लूट, डकैती, अपहरण जैसे 20 से अधिक मामले दोनों भाइयों के खिलाफ जिले व कौशांबी के थानों में दर्ज है। डी-1 गैंग चलाने और हिस्ट्रीशीट तैयार होने पर पुलिस ने दोनों को 15-15 हजार रुपये का इनामी घोषित किया था। राधेश्याम मौर्या की गिरफ्तारी से पहले ईनाम की राशि बढ़कर 50 हजार हो गई थी, लेकिन सीताराम पर 15 हजार का ही इनाम रहा है।
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पूर्व विधायक की टोह लेने फतेहपुर आया था सीताराम- फतेहपुर। एसटीएफ ने सही समय पर सीताराम मौर्या को गिरफ्तार किया। पुरानी दुश्मनी का बदला लेने के लिए सीताराम काफी दिनों से फिराक में लगा हुआ था। एसटीएफ के खुलासे में पता चला कि वह योजना को अंजाम देने के लिए हाल ही में फतेहपुर आया था। वह साथियों संग पूर्व विधायक धुन्नी सिंह और उनके भतीजे अशोक की टोह ले रहा था।
पूर्व विधायक परिवार से दुर्दांत भाइयों की दुश्मनी ढाई दशक पुरानी फतेहपुर। खागा के भाजपा पूर्व विधायक रणवेंद्र प्रताप सिंह उर्फ धुन्नी सिंह के परिवार से इन दुर्दांत भाइयों की ढाई दशक पुरानी दुश्मनी है। मूल रूप से पूर्व विधायक का परिवार भी रम्हा गांव निवासी हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक ढाई दशक पहले सीताराम और राधेश्याम को पहली बार पूर्व विधायक के दिवंगत भाई ने चोरी करने के आरोप पर मारापीटा था। तभी से दोनों भाइयों ने अपराध की दुनियां में कदम रखा और गैंग बना डाला। पुलिस रिकार्ड में डी-1 गैंग रजिस्टर्ड हुआ। हत्या, लूट, फिरौती, डकैती की लगातार घटनाएं करते रहे। वहीं पूर्व विधायक के राजनैतिक विरोधियों ने राधेश्याम, सीताराम गैंग को शरण देनी शुरू कर दी।
कोट्स- उनकी सीताराम मौर्या से कोई व्यक्तिगत रंजिश नहीं है, उनके दिवंगत भाई ने नलकूप में चोरी को लेकर राधेश्याम और सीताराम को डांट फटकार लगाई थी। उन दोनों को उनके राजनैतिक विरोधियों ने उकसाया और उनका दुश्मन बना दिया था। आरोपी उन्हें जान से मारने की पहले भी योजना बना चुके हैं। - रणवेंद्र प्रताप सिंह उर्फ धुन्नी सिंह-पूर्व विधायक भाजपा
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धनमान साढ़ू तो संतोष है भांजा - बदमाश सीताराम मौर्या ने पूर्व विधायक धुन्नी सिंह और उनके ब्लाक प्रमुख भतीजे अशोक की हत्या की योजना रिश्तेदारों संग बनाई थी। एसटीएफ के हत्थे चढ़ा धनमान मौर्या रिश्ते में सीताराम का साढू है और संतोष भांजा है।
खागा में मित्र के घर छिपाए थे असलहे- फतेहपुर। पुलिस सूत्रों के मुताबिक असोथर थाना क्षेत्र में पुलिसकर्मियों से मुठभेड़ के बाद डबल बैरल और बंदूक सीताराम मौर्या ने खागा कोतवाली के नेवातिनपुर गांव में छिपाई थी। हत्या की योजनाओं को अंजाम देने के लिए दोनों छिपाए गए असलहों को लेने चारों लोग फतेहपुर आ रहे थे। यह असलहे नेवातिनपुर गांव के रहने वाले अमर सिंह के घर में छिपाए गए थे।
जिला पुलिस को मालूम थे छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश के ठिकाने - सीताराम मौर्या ने भी भाई राधेश्याम की तरह नाम पता बदलकर परिवार संग छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में शरण पाए था। छत्तीसगढ़ में सीताराम के होने के बारे में जिला पुलिस को जानकारी थी। पुलिस के रजिस्टर्ड गैंग के डोजियर में सीताराम का वर्तमान पते में तौर पर छत्तीसगढ़ दर्ज है। इसके बावजूद सालों से पुलिस उसे खोजने में नाकाम रही।
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इलाहाबाद यूनिट एसटीएफ ने दोनों को छह माह में बारी-बारी से दबोचा है। राधेश्याम की गिरफ्तारी के बाद ही लग रहा था कि सीताराम भी जिंदा है। एसटीएफ इस खुलासे को दबाए रही और अब सीताराम मौर्या की गिरफ्तारी के बाद सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। यह खागा के पूर्व विधायक धुन्नी सिंह और उनके भतीजे अशोक सिंह(ऐरायां ब्लाक के प्रमुख) की हत्या की योजना बनाए था।
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खूंखार सगे भाई सुल्तानपुर घोष थाना क्षेत्र ओरम्हा गांव निवासी हैं। असोथर मुठभेड़ के बाद 1998 में इनके घरों की कुर्की हुई थी, जिसके बाद से उनके घरों में ताले लटक रहे हैं। हत्या, लूट, डकैती, अपहरण जैसे 20 से अधिक मामले दोनों भाइयों के खिलाफ जिले व कौशांबी के थानों में दर्ज है। डी-1 गैंग चलाने और हिस्ट्रीशीट तैयार होने पर पुलिस ने दोनों को 15-15 हजार रुपये का इनामी घोषित किया था। राधेश्याम मौर्या की गिरफ्तारी से पहले ईनाम की राशि बढ़कर 50 हजार हो गई थी, लेकिन सीताराम पर 15 हजार का ही इनाम रहा है।
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पूर्व विधायक की टोह लेने फतेहपुर आया था सीताराम- फतेहपुर। एसटीएफ ने सही समय पर सीताराम मौर्या को गिरफ्तार किया। पुरानी दुश्मनी का बदला लेने के लिए सीताराम काफी दिनों से फिराक में लगा हुआ था। एसटीएफ के खुलासे में पता चला कि वह योजना को अंजाम देने के लिए हाल ही में फतेहपुर आया था। वह साथियों संग पूर्व विधायक धुन्नी सिंह और उनके भतीजे अशोक की टोह ले रहा था।
पूर्व विधायक परिवार से दुर्दांत भाइयों की दुश्मनी ढाई दशक पुरानी फतेहपुर। खागा के भाजपा पूर्व विधायक रणवेंद्र प्रताप सिंह उर्फ धुन्नी सिंह के परिवार से इन दुर्दांत भाइयों की ढाई दशक पुरानी दुश्मनी है। मूल रूप से पूर्व विधायक का परिवार भी रम्हा गांव निवासी हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक ढाई दशक पहले सीताराम और राधेश्याम को पहली बार पूर्व विधायक के दिवंगत भाई ने चोरी करने के आरोप पर मारापीटा था। तभी से दोनों भाइयों ने अपराध की दुनियां में कदम रखा और गैंग बना डाला। पुलिस रिकार्ड में डी-1 गैंग रजिस्टर्ड हुआ। हत्या, लूट, फिरौती, डकैती की लगातार घटनाएं करते रहे। वहीं पूर्व विधायक के राजनैतिक विरोधियों ने राधेश्याम, सीताराम गैंग को शरण देनी शुरू कर दी।
कोट्स- उनकी सीताराम मौर्या से कोई व्यक्तिगत रंजिश नहीं है, उनके दिवंगत भाई ने नलकूप में चोरी को लेकर राधेश्याम और सीताराम को डांट फटकार लगाई थी। उन दोनों को उनके राजनैतिक विरोधियों ने उकसाया और उनका दुश्मन बना दिया था। आरोपी उन्हें जान से मारने की पहले भी योजना बना चुके हैं। - रणवेंद्र प्रताप सिंह उर्फ धुन्नी सिंह-पूर्व विधायक भाजपा
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धनमान साढ़ू तो संतोष है भांजा - बदमाश सीताराम मौर्या ने पूर्व विधायक धुन्नी सिंह और उनके ब्लाक प्रमुख भतीजे अशोक की हत्या की योजना रिश्तेदारों संग बनाई थी। एसटीएफ के हत्थे चढ़ा धनमान मौर्या रिश्ते में सीताराम का साढू है और संतोष भांजा है।
खागा में मित्र के घर छिपाए थे असलहे- फतेहपुर। पुलिस सूत्रों के मुताबिक असोथर थाना क्षेत्र में पुलिसकर्मियों से मुठभेड़ के बाद डबल बैरल और बंदूक सीताराम मौर्या ने खागा कोतवाली के नेवातिनपुर गांव में छिपाई थी। हत्या की योजनाओं को अंजाम देने के लिए दोनों छिपाए गए असलहों को लेने चारों लोग फतेहपुर आ रहे थे। यह असलहे नेवातिनपुर गांव के रहने वाले अमर सिंह के घर में छिपाए गए थे।
जिला पुलिस को मालूम थे छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश के ठिकाने - सीताराम मौर्या ने भी भाई राधेश्याम की तरह नाम पता बदलकर परिवार संग छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में शरण पाए था। छत्तीसगढ़ में सीताराम के होने के बारे में जिला पुलिस को जानकारी थी। पुलिस के रजिस्टर्ड गैंग के डोजियर में सीताराम का वर्तमान पते में तौर पर छत्तीसगढ़ दर्ज है। इसके बावजूद सालों से पुलिस उसे खोजने में नाकाम रही।