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आंधी-पानी ने मचाई तबाही, महिला की मौत, केले की फसल तबाह

Mon, 29 Jun 2020 11:57 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jun 2020 11:57 PM IST
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फतेहपुर/प्रेमपुर। मानसूनी बारिश के साथ तेज आंधी ने जिलेभर में तबाही मचाई। केले की फसल तबाह हो गई। प्रेमपुर के उमरपुर गौंती में दीवार गिरने से महिला की मौत हो गई। असोथर में सरकारी खरीद केंद्र में खुले में रखा करीब एक हजार क्विंटल गेहूं बारिश में भीग गया। जिले भर की बिजली व्यवस्था चरमरा गई। आंधी से पेड़ टूटकर बिजली के तार और सड़कों में गिर गए। इससे आवागमन भी ठप हुआ। शहर से लेकर कस्बों और ग्रामीण इलाकों में तेज बारिश से सड़कें लबालब हो गईं।
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रविवार की रात आंधी बारिश से उमरपुर गौंती में दीवार ढह गई। इसमें परशुराम पासवान की पत्नी शिवरानी (65) की दबकर मौत हो गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। परशुराम ने बताया कि शाम को खाना खाने के बाद छप्पर के नीचे शिवरानी सो गई थी। रात में 10 बजे बारिश के साथ आंधी में गिरी दीवार में शिवरानी दब गई। रात में ही उसे बाहर निकाला गया, लेकिन मौत हो चुकी थी।
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वहीं, तेज बारिश के साथ आंधी से शहर के आबूनगर, मुराइनटोला, बेरुईहार उपकेंद्र के कई मोहल्लों की बिजली रातभर बंद रही। सुबह फाल्ट सही करने के बाद आपूर्ति चालू हुई। बारिश का पानी सदर अस्पताल परिसर में भर गया। अस्पताल से पानी की निकासी नहीं है। प्रशासनिक अनदेखी से हर साल बारिश के समय अस्पताल आने वाले मरीज और तीमारदारों को दिक्कत उठानी पड़ती है। इसी प्रकार शहर के मुराइन टोला, रानी कालोनी, आबूनगर, देवीगंज की सड़कों में जलभराव हो गया।
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फोटो-12- मवईया गांव में बर्बाद केला की फसल को देखता किसान।
आंधी ने केले की फसल किया बर्बाद
- जिले में करीब 2700 हेक्टेयर में केला की खेती होती है
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। आंधी में केला की पौध टूट गईं। इससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। सुबह खेत में टूटे पड़े केला की पेड़ों को देखकर किसानों के होश उड़ गए और माथा पकड़ कर खेत में बैठ गए।
जिले में करीब 2700 हेक्टेयर में केला की खेती किसान करते हैं। इसमें टीशू कल्चर केला की पौध किसानों को 16 सेढ 18 रुपये की एक मिलती है। एक हेक्टेयर में करीब पांच हजार पौध लगाए जाते हैं। केला लगाते समय किसानों को 80 से 90 हजार रुपये की पौध एक हेक्टेयर के लिए खरीदनी पड़ती हैं। इसके अलावा खेत की जोताई, सिंचाई और उर्वरक में करीब सवा लाख रुपये किसानों का खर्च होता है। मलवां ब्लाक के मवईया गांव के किसान इंद्रराज सिंह ने बताया कि पांच बीघा केला की पौध लगाए थे। बारिश-आंधी में आधे खेत की फसल टूट गई है। डेढ़ से दो लाख रुपये का नुकसान हो गया है। किसान हरिकृष्ण अवस्थी ने बताया कि केला की फसल में 60 फीसदी खर्च हो चुका है। अब पेड़ में जब फूल निकलेगा, तो उसमें छीमी नहीं लगेगी। इसके अलावा किसान लाल सिंह यादव, भोला कुशवाहा, मनोज सिंह, अकबाल सिंह, रामसनेही, सरजू, अनुज श्रीवास्तव के केला की फसलें नष्ट हो गई हैं।
कोट...
जिला उद्यान अधिकारी रामसिंह ने बताया कि खसरा में जब किसान केला की फसल दर्ज कराते हैं, तो बीमा होता है। इसमें करीब 15 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का प्रीमियम जमा होता है। तब दैवी आपदा से हुए नुकसान की भरपाई बीमा कंपनी करती है। जिन किसानों ने फसल बीमा कराया है, वह उद्यान विभाग कार्यालय में लिखित सूचना दे दें। बीमा कंपनी के लोगों को भेज कर जांच करा दी जाएगी।
26- असोथर क्रय केंद्र में बारिश से भीगी गेहूं की बोरियां
बारिश में एक हजार क्विंटल भीगा गेहूं
असोथर। बारिश से क्रय केंद्रों में किसानों से खरीदा गया गेहूं भीग गया। इसमें केंद्र प्रभारियों की लापरवाही देखने को मिली। असोथर क्रय केंद्र में करीब एक हजार क्विंटल गेहूं भीगा है। क्रय केंद्र में गेहूं तौल कराने के बाद जो बोरियां भरी हैं, वह मैदान में जस का तस रखा हुआ है। तिरपाल से न तो ढकने की व्यवस्था की गई और न ही गोदाम में रखाया गया। इस पर डिप्टी आरएमओ रमेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि बारिश से गेहूं को बचाव के करने के लिए केंद्र प्रभारियों को तिरपाल से ढकने की व्यवस्था कराई गई है। जो गेहूं फिलहाल में तौल कराया गया है। उनमें ही बारिश का कुछ असर हुआ होगा। गेहूं और बोरियों को सूखने के बाद ही गोदाम में रखाया जाएगा।

फोटो- 33- थरियांव-मलांव मार्ग में टूटा पड़ा बबूल का पेड़
रात से दूसरे दिन दोपहर तक बंद रहा आवागमन
थरियांव। रात में हुई बारिश के साथ तेज आंधी से थरियांव-मलांव मार्ग में दो पेड़ अलग-अलग स्थान पर टूटकर गिर गए। इससे वाहनों का आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया। सुबह 11 बजे के बाद जब ग्रामीणों ने पेड़ हटाया तब लोगों का आवागमन शुरू हुआ। थरियांव-मलांव मार्ग हाईवे से छिवलहा कस्बा को जोड़ता है। रात में पेड़ गिरने की वजह से चार पहिया वाहन और बाइक सवार लोगों को दिक्कत उठानी पड़ी।
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