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घरों से भागने के बाद दस किलोमीटर दूर आकर चुनी मौत .
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फतेहपुर। थरियांव थाना क्षेत्र के देहुली गांव में जान गवांने वाले प्रेमी युगल घरों से दस-दस किलोमीटर दूर चलकर पहुंचे थे। घटनास्थल में दोनों देर शाम तक पहुुंचे होगे। वह घटना के लिए आसपास की जगह चुनते तो शायद पकड़े जा सकते थे। इसी वजह से दूर की जगह चुनी। घटना से दोनों परिवार के लोगों का हाल बेहाल दिखा। परिवार जान गवांने वालों के बारे में बातचीत से भी बचते रहे।
बरई खुर्द गांव के प्रदीप के घर से रोड के रास्ते देहुली गांव की दूरी करीब दस किलोमीटर है। लड़की मीरा के गांव नयापुरवा से भी दूरी नौ किलोमीटर है। घर से दोनों के इतनी दूर आकर जान गवांना लोगों के जेहन में सवाल पैदा कर रहा था। पुलिस ने कयास लगाए कि उन लोगों के अचानक गायब हो जाने के बाद परिवार के लोगों ने खोजबीन में जुट जाते। इसी वजह से भरी दोपहर को मोबाइल छोड़कर घरों से चुपचाप निकले। लंबी दूरी तय करने के बाद देर शाम घटनास्थल पहुंचे। दोनों ने आखिरी इच्छा शादी की पूरी की। उसके बाद आत्महत्या की। ग्रामीणों की करीब सुबह सात बजे हाल बेहाल पड़े मिले। डाक्टर एके सचान ने बताया कि जहर खाने की मात्रा के अनुसार शरीर में असर करता है। जहर खाने के आधे से एक घंटे के भीतर मौत हो सकती है। कयास लगाए दोनों ने जहर सुबह करीब छह बजे खाया होगा। दोनों परिवार के बड़े थे। उन पर परिवार की जिम्मेदारियां भी थी। लड़की से छोटी पांच बहनें और एक भाई है। उसकी मां का मार्च्युरी हाउस में बदहवास दिखी। पिता कृषि और मजदूरी करता है। उधर, लड़के के पिता गुजरात से मजदूरी करते थे। वह लाकडाउन में वापस लौटे थे। उससे छोटा भाई और एक बहन है। बेटे की मौत से पिता मार्च्युरी हाउस के पास जमीन में बदहवास पड़ा दिखा। दोनों परिवार के लोगों में घटना से सद्मे में रहे।
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बरई खुर्द गांव के प्रदीप के घर से रोड के रास्ते देहुली गांव की दूरी करीब दस किलोमीटर है। लड़की मीरा के गांव नयापुरवा से भी दूरी नौ किलोमीटर है। घर से दोनों के इतनी दूर आकर जान गवांना लोगों के जेहन में सवाल पैदा कर रहा था। पुलिस ने कयास लगाए कि उन लोगों के अचानक गायब हो जाने के बाद परिवार के लोगों ने खोजबीन में जुट जाते। इसी वजह से भरी दोपहर को मोबाइल छोड़कर घरों से चुपचाप निकले। लंबी दूरी तय करने के बाद देर शाम घटनास्थल पहुंचे। दोनों ने आखिरी इच्छा शादी की पूरी की। उसके बाद आत्महत्या की। ग्रामीणों की करीब सुबह सात बजे हाल बेहाल पड़े मिले। डाक्टर एके सचान ने बताया कि जहर खाने की मात्रा के अनुसार शरीर में असर करता है। जहर खाने के आधे से एक घंटे के भीतर मौत हो सकती है। कयास लगाए दोनों ने जहर सुबह करीब छह बजे खाया होगा। दोनों परिवार के बड़े थे। उन पर परिवार की जिम्मेदारियां भी थी। लड़की से छोटी पांच बहनें और एक भाई है। उसकी मां का मार्च्युरी हाउस में बदहवास दिखी। पिता कृषि और मजदूरी करता है। उधर, लड़के के पिता गुजरात से मजदूरी करते थे। वह लाकडाउन में वापस लौटे थे। उससे छोटा भाई और एक बहन है। बेटे की मौत से पिता मार्च्युरी हाउस के पास जमीन में बदहवास पड़ा दिखा। दोनों परिवार के लोगों में घटना से सद्मे में रहे।
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