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सशर्त छूट तो ठीक, व्यापार को नहीं मिल रही रफ्तार

Thu, 23 Apr 2020 11:30 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 23 Apr 2020 11:30 PM IST
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फतेहपुर। लॉकडाउन में कारोबार की कमर न टूटे इसके लिए सरकार ने सशर्त कुछ उद्यमों को छूट देना शुरू किया है। ग्रामीण क्षेत्रों की छोटी औद्योगिक इकाइयों, आटा, ब्रेड और उर्वरक सहित अन्य उद्योगों को सशर्त छूट दी गई है। लेकिन कर्मचारियों का पूरा स्टाफ न होने और मशीनों की मरम्मत न हो पाने से उद्यमों का संचालन नहीं हो पा रहा है।
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उद्यमियों का कहना कि बंद बड़े उद्योगों के संचालन के लिए उन्हें भी बिजली बिल, जीएसटी भुगतान समेत अन्य प्रकार के सरकारी देयों में छूट मिलनी चाहिए, लेकिन इस तरफ से सरकार बेफिक्र है। माहभर से ज्यादा समय से कारोबार बंद होने के कारण कर्मचारियों के वेतन व अन्य देयों के भुगतान में संकट है। नगद प्रवाह व कर्मचारियों के न होने से संचालन मुश्किल है। व्यापारियों के लिए यह संकट की घड़ी है। उद्यमियों से बात की गई तो उन्होंने इस तरह से अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं :-
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उद्यमी उदयभान बताते हैं कि कच्चा माल बाहर से नहीं आ पा रहा है। आरा मशीनें बंद होने से बुरादा नहीं मिल पा रहा है। थोड़े से संसाधन में जो माल तैयार भी हो रहा है, वह बाहर नहीं जा पा रहा है। काम सिमट कर महज पंद्रह प्रतिशत ही रह गया है। जबकि खर्चे पूरे बने हुए हैं। आखिर इन स्थितियों में कारोबार कैसे चलाया जा सकता है। उत्पादन व खपत का अनुपात बराबर होने के बाद ही गाड़ी रास्ते पर आ सकती है।
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फ्लोर मिल संचालक फारुख अहमद खान बताते हैं कि कानपुर में कोरोना के केस बढ़ने से वहां सख्ती बढ़ गई है। फैक्टरी की मशीनों के मरम्मत के लिए उपयोगी पुर्जे नहीं मिल पा रहे हैं। किसान माल लेकर फैक्टरी आते हैं तो पुलिस उन्हें रास्ते में रोक लेती है। हमें भी डर रहता है कि किसी को कुछ हो गया तो सभी को दिक्कत होगी। इन परिस्थितियों में बाजार से डिमांड भी कम होती जा रही है।
बासमती चावल का कारोबार करने वाले व्यापारी आनंद कुमार गुप्ता कहते हैं कि ई-पास के अलावा हमें अभी तक कोई सहूलियत नहीं मिली है। कर्मचारियों को वेतन देने के आदेश हैं, लेकिन हमारे लिए न तो बिजली के फिक्स चार्ज में कोई छूट है और न ही टैक्स में किसी तरह की सब्सिडी। ई-पास निकलवाना भी हर किसी के बस की बात नहीं है।
- उद्यम शुरू करने के लिए सशर्त छूट दी गई है। शर्त यह होगी कि संबंधित व्यवसायी को अपनी इकाई का नाम, व्यापार का प्रकार, उत्पाद का नाम, जीएसटी नंबर, पता, कर्मचारियों की संख्या, सामाजिक दूरी के अनुपालन में सहमति, सभी कर्मचारियों को मॉस्क की अनिवार्यता की व्यवस्था करने, कर्मचारियों के रहने और खाने का प्रबंध करने के संबंध में उद्योग केंद्र को शपथ पत्र देना होगा। इन सबसे संतुष्ट होने के बाद ही आवेदन उद्योग केंद्र से एडीएम को भेजा जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों की छोटी औद्योगिक इकाइयों, आटा, ब्रेड और उर्वरक सहित अन्य उद्योगों को सशर्त छूट दी गई है। मगर इन्हें उद्योग केंद्र से सिर्फ संस्तुति दी जा रही है, अनुमति अपर जिलाधिकारी स्तर से जारी होगी। अभी तक सिर्फ पांच उद्यमियों ने उद्यम शुरू करने के आवेदन दिए हैं।
- विकास सिंघल, जीएम, जिला उद्योग केंद्र
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क्वारंटीन खत्म होने पर घर भेजे गए 25 मजदूर
बिंदकी। चिल्ड्रेन पब्लिक स्कूल में 14 दिन क्वारंटीन अवधि बिताने के बाद गुरुवार को 25 मजदूर मुक्त कर दिए गए। इन्हें एसडीएम ने राशन सामग्री के पैकेट देकर बस से घर के लिए रवाना किया। मुंबई से आए 25 मजदूरों को क्वारंटीन किया था। मजदूर अमौली ब्लाक के देवमई और हुसैनगंज गांव के रहने वाले हैं। क्वारंटीन अवधि खत्म होने के बाद डाक्टरों की टीम ने सभी का स्वास्थ्य परीक्षण किया। मजदूरों को राशन सामग्री में आटा, दाल, चावल, तेल का पैकेट देकर गांव के लिए स्कूली बस से रवाना किया गया।
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रायबरेली से आया परिवार, स्कूल में कराया गया क्वारंटीन
हथगाम। ब्लाक क्षेत्र के कसरांव गांव में रायबरेली से आए परिवार को प्राथमिक स्कूल में क्वारंटीन कराया गया।
लॉकडाउन के पहले सरताज अली की बेटी मंतशा और रौनक सदर कोतवाली रायबरेली के गांव लोहानीपुर ननिहाल गई थी। वहां वह दो महीने से थी। रायबरेली में कोरोना वायरस के फैलने की सूचना पर सरताज बाइक से लोहानीपुर गांव चला गया। भोर चार बजे दोनों बच्चियों को लेकर गांव आ गया। सूचना पर डॉ. अमित चौरसिया स्वास्थ्य विभाग की टीम व थाना प्रभारी हथगाम आदित्य कुमार सिंह के साथ मौके पर पहुंचे और परिवार के सभी सदस्य सरताज अली, पिता जहान, पत्नी शकीला, बेटा दिलशाद, नौशाद और दोनों लड़कियों को क्वारंटीन कर दिया।

इनसेट
दो डिग्री कालेज जेल में तब्दील
फतेहपुर। जिले के दो महाविद्यालयों को जेल में तब्दील किया गया है। जेल में अभी तक कोई बंदी निरुद्घ नहीं है। जिला कारागार में साढ़े छह सौ की क्षमता की जेल में करीब साढ़े 12 सौ बंदी व कैदी हैं। सामाजिक दूरी का जेल में अनुपालन चुनौती बना है। लॉकडाउन उल्लंघन व आपराधिक घटनाओं में प्रशासन ने ऐसे लोगों के पकड़े जाने पर सजा देने के लिए कोतवाली क्षेत्र के शांतिनगर स्थित ठाकुर युगराज सिंह महाविद्यालय और शहर हाईवे के उनवा गांव किनारे स्थित राममनोहर यादव महाविद्यालय को जेल में तब्दील किया गया। संवाद
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