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अढ़ावल के भंडारगृह में पंद्रह दिन से 4
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बहुआ। फसलों को चौपट कर रहे अन्ना मवेशियों के आतंक से उकताए ग्रामीणों ने तकरीबन आधा सैकड़ा मवेशियों को लोक निर्माण विभाग के भंडारगृह में बंद कर दिया है। जानवर पंद्रह दिन से भंडारगृह में बंद हैं और इन्हें गोशाला पहुंचाने या इनके खानेपीने का कोई इंतजाम नहीं किया गया है।
कई दिनों से भंडारगृह में बंद अन्ना मवेशियों को चारा पानी की दिक्कतें हो रही है। यमुना किनारे अढ़ावल गांव में बने भंडारगृह में कुल 48 अन्ना मवेशी इस कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे बंद हैं। जिम्मेदार अधिकारियों को इस बात की भनक तक नहीं है कि भंडारगृह में मवेशी बंद हैं। इस सर्दी में ये अन्ना मवेशी भगवान
भरोसे बंद है। कोई भी जिम्मेदार इनका हाल जानने वाला नही है। भंडार गृह में बंद इन अन्ना मवेशियों को पड़ोस के रहने वाले वृंदावन सोनकर व उसके परिवार के लोग चारा पानी की व्यवस्था बड़ी मुश्किल से कर रहे है। वृंदावन सोनकर, महेश प्रसाद, उमाशंकर, जयकरन व पप्पू सोनकर ने बताया कि कई जख्मी जानवरों का इलाज भी उन्होंने ही करवाया है। अन्ना जानवरों के भूखे प्यासे रहने के कारण इन्हें पुआल व पानी की व्यवस्था कर देते है।
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गांव के महेश प्रसाद ने बताया कि किसानों की फसलों को नुकसान पहुचाने की वजह से इन्हें ग्रामीणों ने बंद कर दिया है।जिसके बारे में कई बार जिम्मेदारों को सूचित किया गया है लेकिन कोई सुनने को तैयार नही है। उमाशंकर ने बताया कि 48 अन्ना मवेशी बंद हैं। भूखे प्यासे होने की वजह से इन मवेशियों को दया वश चारा पानी का इंतजाम करना पड़ता है। कई घायल जानवरों का इलाज भी कराया गया है। गांव के ही जयकरन बताते है कि इन
अन्ना मवेशियों की वजह से किसानों की फसलों का नुकसान होता है। जिससे किसानों ने इनको यहां बंद कर दिया। कई दिनों से इनकी देखभाल की जा रही है। लेकिन कोई जिम्मेदार आज तक यहां आने की जहमत तक नही उठा रहे है। अढ़ावल गांव निवासी वृंदावन सोनकर का कहना है कि इन भूखे प्यासे अन्ना मवेशियों को मजबूरी व दया की वजह से चारा पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है। कई बार जिम्मेदारों को अवगत कराया लेकिन कोई इनकी सुध लेने वाला नही है। चारा का इंतजाम अपने पैसों से करना पड़ रहा है। इस ठंड में जानवर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
असोथर विकास खंड के बीडीओ प्रवीणानंद का कहना है कि क्षेत्र के पीडब्लूडी भंडारगृह में बंद किए गए 48 अन्ना मवेशियों के बारे में उन्हें कोई भी जानकारी नही है। वह शीघ्र ही पंचायत सचिव को भेजकर मवेशियों को गोशाला भेजेंगे।
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कई दिनों से भंडारगृह में बंद अन्ना मवेशियों को चारा पानी की दिक्कतें हो रही है। यमुना किनारे अढ़ावल गांव में बने भंडारगृह में कुल 48 अन्ना मवेशी इस कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे बंद हैं। जिम्मेदार अधिकारियों को इस बात की भनक तक नहीं है कि भंडारगृह में मवेशी बंद हैं। इस सर्दी में ये अन्ना मवेशी भगवान
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भरोसे बंद है। कोई भी जिम्मेदार इनका हाल जानने वाला नही है। भंडार गृह में बंद इन अन्ना मवेशियों को पड़ोस के रहने वाले वृंदावन सोनकर व उसके परिवार के लोग चारा पानी की व्यवस्था बड़ी मुश्किल से कर रहे है। वृंदावन सोनकर, महेश प्रसाद, उमाशंकर, जयकरन व पप्पू सोनकर ने बताया कि कई जख्मी जानवरों का इलाज भी उन्होंने ही करवाया है। अन्ना जानवरों के भूखे प्यासे रहने के कारण इन्हें पुआल व पानी की व्यवस्था कर देते है।
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गांव के महेश प्रसाद ने बताया कि किसानों की फसलों को नुकसान पहुचाने की वजह से इन्हें ग्रामीणों ने बंद कर दिया है।जिसके बारे में कई बार जिम्मेदारों को सूचित किया गया है लेकिन कोई सुनने को तैयार नही है। उमाशंकर ने बताया कि 48 अन्ना मवेशी बंद हैं। भूखे प्यासे होने की वजह से इन मवेशियों को दया वश चारा पानी का इंतजाम करना पड़ता है। कई घायल जानवरों का इलाज भी कराया गया है। गांव के ही जयकरन बताते है कि इन
अन्ना मवेशियों की वजह से किसानों की फसलों का नुकसान होता है। जिससे किसानों ने इनको यहां बंद कर दिया। कई दिनों से इनकी देखभाल की जा रही है। लेकिन कोई जिम्मेदार आज तक यहां आने की जहमत तक नही उठा रहे है। अढ़ावल गांव निवासी वृंदावन सोनकर का कहना है कि इन भूखे प्यासे अन्ना मवेशियों को मजबूरी व दया की वजह से चारा पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है। कई बार जिम्मेदारों को अवगत कराया लेकिन कोई इनकी सुध लेने वाला नही है। चारा का इंतजाम अपने पैसों से करना पड़ रहा है। इस ठंड में जानवर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
असोथर विकास खंड के बीडीओ प्रवीणानंद का कहना है कि क्षेत्र के पीडब्लूडी भंडारगृह में बंद किए गए 48 अन्ना मवेशियों के बारे में उन्हें कोई भी जानकारी नही है। वह शीघ्र ही पंचायत सचिव को भेजकर मवेशियों को गोशाला भेजेंगे।