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लेखपालों की हड़ताल ने चौपट किया कामकाज

Wed, 18 Dec 2019 07:21 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 18 Dec 2019 07:21 PM IST
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फतेहपुर। लेखपालों की हड़ताल से पूरी राजस्व व्यवस्था चरमरा गई है। एस्मा लगने के बावजूद भी लेखपाल धरने से उठने को तैयार नहीं हैं। जिले की तीनों तहसीलों में कामकाज न होने से आवेदकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पांच नवंबर से लेखपालों का शुरू हुआ विरोध डेढ़ महीने से अपना स्वरूप बढ़ाता जा रहा है। इससे तहसीलों में आय, जाति, निवास, जन्म, मृत्यु प्रमाण पत्र, खसरा-खतौनी, हदबंदी, जमीनों की पैमाइश, पेंशन संबंधी आवेदन बड़ी संख्या में लंबित हैं।
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लेखपालों की हड़ताल की वजह से आय, जाति, निवास, जन्म, मृत्यु प्रमाण पत्र, खसरा-खतौनी, हदबंदी, जमीनों की पैमाइश, पेंशन आवेदनों का सत्यापन और वरासत जैसे कई महत्वपूर्ण काम ठप पड़े हैं। लेखपालों ने मांगे पूरी न होने के चलते पहले अतिरिक्त प्रभार वाले गांवों का काम छोड़ा और अब 10 दिसंबर से पूरी तरह से कार्य
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बहिष्कार कर रखा है। जिससे ये सारे काम प्रभावित हो हरे हैं। बुधवार को भी लेखपालों की कलमबंद हड़ताल जारी रही। जिन्हें हड़ताल की जानकारी है वह तो अपनी समस्या को लेकर घर बैठ हैं और हड़ताल खत्म होने का इंतजार कर हैं। मगर मुख्यालय से सुदूरवर्ती इलाके के ऐसे ग्रामीण जिन्हें हड़ताल की जानकारी नहीं है, वह बड़ी
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उम्मीद से अपने काम की आस लेकर आते हैं और निराश होकर लौट जाते हैं। बुधवार को भी ऐसा ही हुआ जब तहसील परिसर में फरियादियों की चहल पहल तो रही लेकिन काम किसी का भी नहीं हुआ और सारे मायूस होकर लौट गए। लेखपालों की मांगों में एसीपी विसंगति, वेतन उच्चीकरण, प्रोन्नति काडर रिव्यू, पेंशन विसंगति, भत्ते,

लेखपाल का पदनाम परिवर्तन, राजस्व उप निरीक्षक नियमावली 2018 प्रख्यापित किया जाना। प्रधानमंत्री किस ान सम्मान निधि में मध्य प्रदेश की तर्ज पर 18 रुपये प्रति खाता इंसेटिव लेखपाल को दिया जाना है। लेखपालों ने एस्मा लगे होने के बावजूद बुधवार को भी धरना प्रदर्शन जारी रखा। हालांकि कई जिलों में एस्मा के चलते लेखपालों पर निलंबन से लेकर एफआईआर तक की कार्रवाई की खबरें आईं लेकिन लेखपालों अपनी मांगो को लेकर अड़े रहे। जिलाध्यक्ष कंधईलाल पाल और जिलामंत्री बीरेंद्र सिंह की अगुवई में लेखपालों ने सरकार के विरोध में जमकर नारे लगाए। धरना प्रदर्शन में ज्ञान सिंह यादव, विवेक कुमार तिवारी, रमेश चंद्र पटेल, राजाराम, रामनरेश निषाद, अनुराग बाजपेई, अशोक कुमार तिवारी, क्षत्रपाल गुप्ता और सुरेंद्र श्रीवास्तव सहित अन्य समस्त लेखपाल मौजूद रहे।
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