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शीतलहरी में ठिठुरते हुए स्कूल पहुंचे बच्चे
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सिविल लाइन रोड से गुजरती बाइक पर ठंड में कुछ इस तरह से स्कूल जाते बच्चे
- फोटो : FATEHPUR
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फतेहपुर। दो दिन से शीतलहर चलने से तापमान में लगातार गिरावट हो रही है और गलन भी बढ़ गई। दिन भर धूप नहीं निकली। आसमान में बादलों के साथ धुंध बनी रही। शाम ढलते ही कंपा देने वाली सर्दी बढ़ गई। उधर, कोहरे
की धुंध से ट्रेनों की लेटलतीफी शुरू हो गई है। लोगों को कड़ाके की ठंड से जूझना पड़ा। राहगीरों ने जहां भी आग जलते देखी वहीं पर रुककर हाथ पैर सेंके और खुद को राहत पहुंचाई। उधर, ठंड के चलते जिला अस्पताल व निजी डाक्टरों के यहां भी कोल्ड डायरिया पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ी है।
मौसम विभाग ने मंगलवार को अधिकतम पारा 19 डिग्री और न्यूनतम पारा आठ डिग्री रहा, लेकिन बुधवार को अधिकतम पारा दो डिग्री लुढ़क कर 17 पर पहुंच गया और न्यूनतम पारा एक डिग्री लुढ़क कर सात पर पहुंचा। पूरे दिन धूप नहीं हुई। इससे ठिठुरन बढ़ी। स्वेटर, जाकेट पहनने के बाद भी लोग ठंड से ठिठुरते दिखाई दिए। शहर की
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प्रमुख बाजारों के अलावा फुटपाथ की ऊनी दुकानों में भीड़ बढ़ी रही। दिल्ली की ओर से आने वाली प्रयागराज, रीवां एक्सप्रेस, मथुरा एक्सप्रेस, संगम एक्सप्रेस, नार्थईस्ट अपने समय से ढाई-तीन घंटा देरी से स्टेशन पहुंची। ट्रेन में सफर करने वाले यात्री स्टेशन में ठिठुरते हुए दिखाई दिए। वहीं ज्वालागंज रोडवेज बस अड्डा, सदर अस्पताल में भी यात्री ठंड से बेहाल दिखाई दिए। ठंड से बचने के लिए लोग अलाव के आसपास बैठे दिखाई दिए। ठंड का
आलम यह रहा कि जिसको जहां भी आग जलते दिखी वहीं पर रुककर खुद को गर्म करने से न रोक सका। घरों में भी पूरे दिन ब्लोअर चलते रहे। ग्रामीण इलाकों में भी लोग आग जलाए हाथ पैर सेंकते रहे। जैसे ही शाम ढली वैसे ही ठंड का प्रकोप अचानक और बढ़ गया। लोग भी जल्दी ही कामधंधा निपटाकर घर पहुंच गए। सरकारी कार्यालयों में भी उपस्थिति काफी कम रही। जो कर्मचारी पहुंचे भी वह ठंड के चलते काम नहीं कर सके।
शीतलहरी के चलते बुधवार को सुबह स्कूली बच्चे ठिठुरते हुए अपने-अपने स्कूल पहुंचे। प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों ने तो इसे माना लेकिन निजी विद्यालयों ने नहीं। निजी विद्यालय अपने पुराने समय आठ बजे ही खुले। डीएम का आदेश प्रसारित होने के बाद भी इस पर तत्काल अमल नहीं हुआ। हालांकि गुरुवार से विद्यालयों
का समय बदल दिया गया है। डीएम संजीव सिंह ने इसी को देखते हुए मंगलवार शाम कक्षा आठ तक छात्र-छात्राओं का समय बदलकर सुबह दस बजे से दो बजे तक कर दिया था। सुबह तक स्कूल के स्तर से मैसेज न मिलने से भी कई जगह अभिभावकों में असमंजस की स्थिति रही।
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की धुंध से ट्रेनों की लेटलतीफी शुरू हो गई है। लोगों को कड़ाके की ठंड से जूझना पड़ा। राहगीरों ने जहां भी आग जलते देखी वहीं पर रुककर हाथ पैर सेंके और खुद को राहत पहुंचाई। उधर, ठंड के चलते जिला अस्पताल व निजी डाक्टरों के यहां भी कोल्ड डायरिया पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ी है।
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मौसम विभाग ने मंगलवार को अधिकतम पारा 19 डिग्री और न्यूनतम पारा आठ डिग्री रहा, लेकिन बुधवार को अधिकतम पारा दो डिग्री लुढ़क कर 17 पर पहुंच गया और न्यूनतम पारा एक डिग्री लुढ़क कर सात पर पहुंचा। पूरे दिन धूप नहीं हुई। इससे ठिठुरन बढ़ी। स्वेटर, जाकेट पहनने के बाद भी लोग ठंड से ठिठुरते दिखाई दिए। शहर की
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प्रमुख बाजारों के अलावा फुटपाथ की ऊनी दुकानों में भीड़ बढ़ी रही। दिल्ली की ओर से आने वाली प्रयागराज, रीवां एक्सप्रेस, मथुरा एक्सप्रेस, संगम एक्सप्रेस, नार्थईस्ट अपने समय से ढाई-तीन घंटा देरी से स्टेशन पहुंची। ट्रेन में सफर करने वाले यात्री स्टेशन में ठिठुरते हुए दिखाई दिए। वहीं ज्वालागंज रोडवेज बस अड्डा, सदर अस्पताल में भी यात्री ठंड से बेहाल दिखाई दिए। ठंड से बचने के लिए लोग अलाव के आसपास बैठे दिखाई दिए। ठंड का
आलम यह रहा कि जिसको जहां भी आग जलते दिखी वहीं पर रुककर खुद को गर्म करने से न रोक सका। घरों में भी पूरे दिन ब्लोअर चलते रहे। ग्रामीण इलाकों में भी लोग आग जलाए हाथ पैर सेंकते रहे। जैसे ही शाम ढली वैसे ही ठंड का प्रकोप अचानक और बढ़ गया। लोग भी जल्दी ही कामधंधा निपटाकर घर पहुंच गए। सरकारी कार्यालयों में भी उपस्थिति काफी कम रही। जो कर्मचारी पहुंचे भी वह ठंड के चलते काम नहीं कर सके।
शीतलहरी के चलते बुधवार को सुबह स्कूली बच्चे ठिठुरते हुए अपने-अपने स्कूल पहुंचे। प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों ने तो इसे माना लेकिन निजी विद्यालयों ने नहीं। निजी विद्यालय अपने पुराने समय आठ बजे ही खुले। डीएम का आदेश प्रसारित होने के बाद भी इस पर तत्काल अमल नहीं हुआ। हालांकि गुरुवार से विद्यालयों
का समय बदल दिया गया है। डीएम संजीव सिंह ने इसी को देखते हुए मंगलवार शाम कक्षा आठ तक छात्र-छात्राओं का समय बदलकर सुबह दस बजे से दो बजे तक कर दिया था। सुबह तक स्कूल के स्तर से मैसेज न मिलने से भी कई जगह अभिभावकों में असमंजस की स्थिति रही।