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सुप्रीम कोर्ट के फैसले का लोगों ने किया बेसब्री से इंतजार
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फतेहपुर। सुप्रीम कोर्ट के फैसले आने का लोगों ने बेसब्री से इंतजार किया। सभी धर्म संप्रदाय के लोगों में पांच सौ साल पुराने विवाद को सुलझाने वाले ऐतिहासिक निर्णय सुनने के लिए खासा कौतूहल दिखा। सभी लोग टीवी पर नजरें जमाए रहे। उधर, किसी अनहोनी को लेकर लोगों में दहशत भी दिखी। लोग सुबह से जरूरी सामग्री की खरीद को लेकर सड़कों पर निकले, जहां जिसको जिस कीमत पर सामान मिला, खरीदकर घर पहुंचाया।
रात में टीवी में सुप्रीम कोर्ट का फैसला शनिवार को आने की सूचना और सुबह अखबार की सुर्खियों में इस पढ़कर लोगों को 1992 की याद ताजा हो गई। इसीलिए लोग सुबह से ही जरूरी सामान की खरीद के लिए सड़कों पर निकल आए। इसी दौरान दुकानें बंद करा रही पुलिस का एलाउंस सुन लोगों में दहशत बढ़ गई। स्थिति यहां तक पहुंच गई कि जिला अस्पताल के सामने को छोड़कर पूरे शहर दवा की दुकानें बंद हो गई।
बाकरगंज पुलिस चौकी में दोनों शहर काजी समेत समुदाय के लोगों को संबोधित कर उनकी सुरक्षा को लेकर भरोसा दिलाया। शहर में जगह-जगह अभी तक बड़ी तादाद में सुरक्षा कर्मी मुस्तैद हैं। उधर, शाम को शहर में कुछ दुकाने खुली, जिनमें खरीदारों की भीड़ लगी रही। उधर, सुबह 10 बजे से लोग घरों में कैद रहे। सभी की नजरें टीवी की स्क्रीन में टिकी रही। हर कोई कोर्ट के फैसला जानने को लेकर बेताब रहा। घरों के बाहर निकले लोग टीवी देख रहे लोगों से बार-बार फोन कर फैसला जानने का प्रयास करते रहे। प्रशासन ने दोपहर की नमाज संपन्न होने के बाद राहत की सांस ली है।
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फतेहपुर। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर लगी धारा 144 से पूरे जिले की यातायात व्यवस्था प्रभावित थी। निजी बसों का संचालन प्रभावित रहा। रोडवेज बसें भी खाली दौड़ती रहीं। बस स्टैंडों में यात्रियों का टोटा रहा।
कोर्ट के फैसले को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन ग्रामीण क्षेत्र से आने वाली सड़कों पर बैरीकेडिंग करा दिया था। ऐसे में निजी बस संचालकों ने दोपहर बाद तक बसों के नंबर रद्द कर दिया। शाम पहर कुछ बसें जिला मुख्यालय से रवाना हुई। रोडवेज बसों का संचालन तो हुआ, लेकिन यात्रियों का टोटा होने के कारण खाली बसें गंतव्य की ओर गईं। ग्रामीण क्षेत्र को जाने के लिए स्टैंड पहुंचे लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बसों का संचालन बंद होने का फायदा ई रिक्शा संचालकों ने भरपूर उठाया। मनमानी किराया लेकर उन्हें घर पहुंचाया। बाहरी लोगों तो निजी बस स्टैंडों में पूरा दिन डेरा डाले रहे। यही हाल रेलवे स्टेशन का था। रुकने वाली ट्रेनों से यात्री आ तो रहे थे, लेकिन जाने वालों का पूरी तरह से टोटा था। स्टेशन के बाहर खड़े गिने चुने ई रिक्शा संचालकों ने बंदी का पूरा फायदा उठाया।
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रात में टीवी में सुप्रीम कोर्ट का फैसला शनिवार को आने की सूचना और सुबह अखबार की सुर्खियों में इस पढ़कर लोगों को 1992 की याद ताजा हो गई। इसीलिए लोग सुबह से ही जरूरी सामान की खरीद के लिए सड़कों पर निकल आए। इसी दौरान दुकानें बंद करा रही पुलिस का एलाउंस सुन लोगों में दहशत बढ़ गई। स्थिति यहां तक पहुंच गई कि जिला अस्पताल के सामने को छोड़कर पूरे शहर दवा की दुकानें बंद हो गई।
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बाकरगंज पुलिस चौकी में दोनों शहर काजी समेत समुदाय के लोगों को संबोधित कर उनकी सुरक्षा को लेकर भरोसा दिलाया। शहर में जगह-जगह अभी तक बड़ी तादाद में सुरक्षा कर्मी मुस्तैद हैं। उधर, शाम को शहर में कुछ दुकाने खुली, जिनमें खरीदारों की भीड़ लगी रही। उधर, सुबह 10 बजे से लोग घरों में कैद रहे। सभी की नजरें टीवी की स्क्रीन में टिकी रही। हर कोई कोर्ट के फैसला जानने को लेकर बेताब रहा। घरों के बाहर निकले लोग टीवी देख रहे लोगों से बार-बार फोन कर फैसला जानने का प्रयास करते रहे। प्रशासन ने दोपहर की नमाज संपन्न होने के बाद राहत की सांस ली है।
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फतेहपुर। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर लगी धारा 144 से पूरे जिले की यातायात व्यवस्था प्रभावित थी। निजी बसों का संचालन प्रभावित रहा। रोडवेज बसें भी खाली दौड़ती रहीं। बस स्टैंडों में यात्रियों का टोटा रहा।
कोर्ट के फैसले को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन ग्रामीण क्षेत्र से आने वाली सड़कों पर बैरीकेडिंग करा दिया था। ऐसे में निजी बस संचालकों ने दोपहर बाद तक बसों के नंबर रद्द कर दिया। शाम पहर कुछ बसें जिला मुख्यालय से रवाना हुई। रोडवेज बसों का संचालन तो हुआ, लेकिन यात्रियों का टोटा होने के कारण खाली बसें गंतव्य की ओर गईं। ग्रामीण क्षेत्र को जाने के लिए स्टैंड पहुंचे लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बसों का संचालन बंद होने का फायदा ई रिक्शा संचालकों ने भरपूर उठाया। मनमानी किराया लेकर उन्हें घर पहुंचाया। बाहरी लोगों तो निजी बस स्टैंडों में पूरा दिन डेरा डाले रहे। यही हाल रेलवे स्टेशन का था। रुकने वाली ट्रेनों से यात्री आ तो रहे थे, लेकिन जाने वालों का पूरी तरह से टोटा था। स्टेशन के बाहर खड़े गिने चुने ई रिक्शा संचालकों ने बंदी का पूरा फायदा उठाया।
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