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मुआवजे से कोई बेटी के हाथ पीले करेगा तो कोई कराएगा इलाज

Sat, 26 Mar 2016 11:11 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, फतेहपुर
ब्यूरो अमर उजाला, फतेहपुर Updated Sat, 26 Mar 2016 11:11 PM IST
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No compensation shall have no daughter's hand will treat yellow
मृतक होमगार्ड की बीबी व बच्चे

पंचायत चुनाव 2015 में ड्यूटी के दौरान दम तोड़ने वाले जिले में चार कार्मिकों के परिजनों को चुनाव आयोग की ओर से 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जा रहा है। यह पैसा जिला प्रशासन के पास पहुंच गया है। जल्द ही यह मृतकों के परिजनों को मिल जाएगा। मुआवजे की रकम मिलने की बात सुनते ही परिजनों को थोड़ी राहत मिली है। कोई इस पैसे से बेटी की शादी करेगा तो कोई इलाज करवाएगा। हालांकि अभी तक प्रशासन की ओर से परिजनों को मुआवजा राशि के बारे में सूचना नहीं दी गई है।

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 ललौली थाना क्षेत्र के कमलापुर गांव निवासी होमगार्ड रामशरन की चुनाव में ड्यूटी के दौरान हरिहरगंज मोहल्ले में ट्रैक पार करते समय ट्रेन की चपेट में आने से पांच नवंबर 2015 को मौत हो गई थी। इसी प्रकार हथगाम थाने के रसूलपुर रेकौहां निवासी होमगार्ड मुन्नालाल ने सात नवंबर 2015 को चुनाव ड्यूटी के दौरान हुसैनगंज थाना क्षेत्र के देवरी मोड़ केे समीप वाहन की चपेट में आकर दम तोड़ दिया था।
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जिला पंचायत फतेहपुर में कार्यरत अंबेडकरनगर जिले के कपूरी महमदपुर गांव निवासी अवर अभियंता लालमन वर्मा को चुनाव ड्यूटी के दौरान 19 अक्तूबर 2015 को खागा में दिल का दौरा पड़ा। इलाहाबाद ले जाते समय रास्ते में उनकी मौत हो गई थी। अब फतेहपुर में इनके परिवार नहीं रहता। गाजीपुर थाना क्षेत्र के रतनतारा निवासी पीआरडी जवान धर्मेद्र सिंह की भी दुर्घटना में मौत हो गई थी। अमर उजाला ने शनिवार को कार्मिकों के आश्रितों से बातचीत की, तो पता चला कि उन्हें अभी तक ऐसी कोई जानकारी नहीं है।
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कमलापुर निवासी होमगार्ड रामशरण की पत्नी लक्ष्मी को मृतक आश्रित धनराशि की जानकारी नहीं थी। जैसे ही 10 लाख रुपये मिलने की जानकारी दी गई तो वह बिलख पड़ी। रोते हुए बताया कि बेटी की शादी व बच्चों के परवरिश की चिंता सता रही थी, लेकिन मौत के बाद भी बेटी के हाथ पीले करने के साथ बच्चों की परवरिश की व्यवस्था कर दी है। फिर जो रुपये बचेंगे, उसे अपने बुढ़ापे के लिए सुरक्षित रखेगी।

रतनतारा गांव निवासी पीआरडी जवान धर्मेंद्र के पिता बलराम को बेटे की मौत के बाद आश्रित लाभ मिलने की कोई अभी तक जानकारी नहीं थी। प्रशासन स्तर से फरियाद की गई थी, लेकिन 10 लाख रुपये जारी हुआ है, इसके अभी तक अनभिज्ञ है। रुंधे गले से पिता ने बताया कि हर बेटा माता पिता के बुढ़ापे की बैसाखी होता है, लेकिन शादी के पहले साथ छोड़ गया बेटा उनके बुढ़ापे के लिए कमाई छोड़ गया है।  


रसूलपुर रेकौहा निवासी होमगार्ड मुन्नालाल की पत्नी सुमित्रा ने बच्चों की जीविका चलाने के लिए खागा एसडीएम से फरियाद की थी। होमगार्ड की मौत के बाद बीबी बच्चे मजदूरी कर भरण पोषण कर रहे हैं। उन्हें जैसे ही 10 लाख रुपये मिलने की सूचना दी गई, तो पत्नी की आंखें नम हो गईं और पूरे परिवार को जवान की मौत की याद ताजा हो गई। रुंधे गले से पत्नी ने बताया कि इस धनराशि से बच्चों का भरण, पोषण के साथ बिटिया के हाथ पीले हो सकेंगे।

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