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Fatehpur News: फसल का नहीं मिला मुआवजा, गेहूं डूबने का खतरा
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हुसैनगंज। नहर में पानी आते ही सायफन से नहर का पानी बहने लगा है। हालांकि विभाग ने तालाब तक नाले का निर्माण करा दिया है। लेकिन तालाब भरने के बाद खेतों में पानी पहुंचने की आशंका से किसान सहमे हुए हैं।
ब्लॉक भिटौरा के डोलेपुर के पास नहर का सायफन पिछले साल सिल्ट सफाई के दौरान टूट गया था। 30 जुलाई 2024 को नहर में खांदी कटने और सायफन टूटने से किसानों की 151 बीघे धान की फसल डूब गई थी। एक अगस्त को किसानों ने भिटौरा रोड पर मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। अधिकारियों के आश्वासन के बाद भी अब तक मुआवजा नहीं मिला है। 15 दिन बाद विभाग ने टूटे सायफन की मरम्मत कराई थी।
दिसंबर में नहरों में छोड़े गए पानी के बाद सायफन से पानी निकलना दोबारा शुरू हो गया है। यहां से पानी आता देखकर किसानों को गेहूं की फसल डूबने की चिंता सताने लगी है। उन्नौर प्रधान जमुना सिंह ने डीएम को प्रार्थना पत्र देकर दोबारा नहर के सायफन से पानी निकलने की जानकारी दी है। बताया कि किसानों को अभी तक धान की फसलों का मुआवजा नहीं मिला है। वहीं समय से सायफन बंद नहीं कराया गया, तो गेहूं की फसल भी डूबने आशंका है। इसके बाद दूसरे दिन सिंचाई विभाग ने 400 मीटर तक अस्थायी नाला खोदवा कर तालाब से जोड़ दिया है। ग्रामीणों के मुताबिक समय से ठीक से निगरानी नहीं की गई तो तालाब भरने के बाद फसलों में पानी जरूर भरेगा।
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ब्लॉक भिटौरा के डोलेपुर के पास नहर का सायफन पिछले साल सिल्ट सफाई के दौरान टूट गया था। 30 जुलाई 2024 को नहर में खांदी कटने और सायफन टूटने से किसानों की 151 बीघे धान की फसल डूब गई थी। एक अगस्त को किसानों ने भिटौरा रोड पर मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। अधिकारियों के आश्वासन के बाद भी अब तक मुआवजा नहीं मिला है। 15 दिन बाद विभाग ने टूटे सायफन की मरम्मत कराई थी।
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दिसंबर में नहरों में छोड़े गए पानी के बाद सायफन से पानी निकलना दोबारा शुरू हो गया है। यहां से पानी आता देखकर किसानों को गेहूं की फसल डूबने की चिंता सताने लगी है। उन्नौर प्रधान जमुना सिंह ने डीएम को प्रार्थना पत्र देकर दोबारा नहर के सायफन से पानी निकलने की जानकारी दी है। बताया कि किसानों को अभी तक धान की फसलों का मुआवजा नहीं मिला है। वहीं समय से सायफन बंद नहीं कराया गया, तो गेहूं की फसल भी डूबने आशंका है। इसके बाद दूसरे दिन सिंचाई विभाग ने 400 मीटर तक अस्थायी नाला खोदवा कर तालाब से जोड़ दिया है। ग्रामीणों के मुताबिक समय से ठीक से निगरानी नहीं की गई तो तालाब भरने के बाद फसलों में पानी जरूर भरेगा।

शामली कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करते बसपा कार्यकर्ता । संवाद
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