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नगर पालिका का हुआ सालिड वेस्ट प्लांट
अमर उजाला ब्यूरो , फतेहपुर
Updated Wed, 27 Dec 2017 12:25 AM IST
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सालिड वेस्ट प्लांट में मौजूद तहसीलदार, नगर पालिका कर्मी और एटूजेड के अधिकारी।
- फोटो : अमर उजाला
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सालिड वेस्ट प्लांट लंबी कवायद के बाद आखिरकार नगर पालिका परिषद को हस्तांतरित हो गया। तहसीलदार सदर की मध्यस्थता में मंगलवार को एटूजेड के डिप्टी रीजनल मैनेजर ने प्लांट की चाबी ईओ को सौंप दी। प्लांट में मार्च 2015 से ताला बंद था।
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केंद्र सरकार की आर्थिक मदद से नगर पालिका परिषद ने 11 करोड़ की लागत से सालिड वेस्ट प्लांट लगवाया था। इसमें 50 फीसदी धनराशि केंद्र सरकार की तथा इतनी संस्था एटूजेड की खर्च हुई थी। प्लांट 2012 में बनकर तैयार हुआ था। संस्था ने मार्च 2015 तक किसी तरह प्लांट चलाया, लेकिन नगर पालिका परिषद से भुगतान को लेकर मतभेद के चलते एटूजेड ने प्लांट पर ताला लगा दिया। इसके बाद से प्लांट में तालाबंदी थी। प्लांट बंद होने से नगर पालिका के सामने कूड़ा निस्तारण की समस्या खड़ी हो गई थी। एटूजेड संस्था नगर पालिका से प्लांट लगाने में खर्च धनराशि मांग कर रही थी।
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यही कारण है कि गतिरोध बना था। नगर पालिका की रिपोर्ट पर डीएम कुमार प्रशांत ने एटूजेड के डिप्टी रीजनल मैनेजर नवीन अग्रवाल और सीएनडीएस के परियोजना प्रबंधक राजेश कुमार वर्मा को 20 दिसंबर को बुलाकर नगर पालिका के अधिकारियों से बातचीत कराई। इसके बाद प्लांट हस्तांतरित करने के लिए मंगलवार का दिन तय हुआ। पालिटेकिभनक के इंजीनियरों ने प्लांट की सभी मशीनों की सूची तैयार की। शाम को प्लांट ईओ रश्मि भारती को हस्तांतरित कर दिया गया। इस मौके पर तहसीलदार जेपी पांडेय, सफाई निरीक्षक आबिद अली, अकाउंटेंट राजेश श्रीवास्तव, प्रकाश निरीक्षक दिलशाद अली भी मौजूद रहे।
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अभी नहीं चल पाएगा प्लांट
फतेहपुर। सालिड वेस्ट प्लांट हस्तांतरित होने के बावजूद इतना जल्दी संचालित नहीं हो पाएगा। करीब तीन साल से बंद होने के कारण प्लांट कबाड़ हो गया है। कीमती समान गायब हैं। कई मोटर और बैटरी भी नहीं हैं। सूत्रों की मानें तो प्लांट चलाने में करीब एक करोड़ खर्च आएगा। ऐसे में 5300 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में बने प्लांट के अंदर फिलहाल नगर पालिका परिषद को कूड़ा डंप करने की सुविधा जरूर मिलेगी।
प्लांट के लिए मांगा जाएगा बजट
ईओ रश्मि भारती का कहना है कि फिलहाल प्लांट चल पाना मुश्किल है, क्योंकि कई साल से प्लांट बंद होने के कारण बड़ा धनराशि खर्च करनी पड़ेगी। इसके लिए शासन से बजट की मांग की जाएगी। बजट मिलने के बाद प्लांट चालू कराएंगी।