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कई बीमार, गांव नहीं पहुंचे डाक्टर
फतेहपुर
Updated Sat, 27 May 2017 12:26 AM IST
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हाई ब्लड प्रेशर की समस्या
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छेदीपुर गांव में कई दिन से डायरिया फैला है। गंदगी के ढेर पर बसी इस गांव की एक हजार की आबादी उल्टी-दस्त से कराह रही है। बीमारी की खबर पर स्वास्थ्य विभाग की टीम दो दिन पहुंची थी। शुक्रवार को टीम ने गांव में जाने की जहमत नहीं उठाई।
इससे गांव के लोग प्राइवेट इलाज कराने के लिए मजबूर हैं। अमर उजाला टीम ने शुक्रवार को डायरिया ग्रसित छेदीपुर गांव का हाल जाना तो यहां के लोग दहशत में दिखे। इनका कहना था कि लोग बीमार पड़ते जा रहे हैं। इससे आगे के हालात नाजुक हो सकते हैं।
प्राइवेट इलाज को भागने लगे लोग
छेदीपुर गांव में डायरिया का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। अमर उजाला मेें खबर छपने के बाद स्थानीय पीएचसी की टीम हरकत में आई थी। चिकित्साप्रभारी डॉ. पवन बाजपेई के नेतृत्व में टीम ने यहां दो दिन इलाज किया।
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शुक्रवार की दोपहर तक लोग टीम आने का इंतजार करते रहे। टीम नहीं पहुंची तो मरीजों ने प्राइवेट इलाज की ओर रुख किया। गांव के राम कुमार ने बताया कि वह दो दिन से उल्टी दस्त से पीड़ित हैं। सरकारी डाक्टर नहीं आए तो असोथर कस्बे से दवा लाकर खाई है। ननकू का कहना है कि जो दवा टीम बांट गई,उसका असर नहीं हुआ। बाजार से दवा लाकर खानी पड़ी है।
चार दिन पहले मरी भैंस तो वजह नहीं
गांव के राम किशुन बताते हैं कि पड़ोसी गांव कधियां भगवती यादव की एक भैंस चार दिन पहले मर गई थी। यह अभी तक गांव के किनारे पड़ी है। इसके शव को कुत्ता खा रहे हैं। शव से उठने वाली बदबू ने गांव वालों का जीना दुश्वार कर दिया है।
इसके बावजूद न तो ग्राम पंचायत स्तर पर और न ही भैंस मालिक ही आगे आए। गांव के नरेंद्र कुमार कहते हैं कि दुर्गंध ने नाक में दम कर रखा है। अगर जल्द भैंस का शव नहीं हटाया गया तो हालात और भी बिगड़ सकते हैं।
खुद करते हैं सफाई
छेदीपुर गांव कंधिया ग्राम पंचायत का मजरा है। यहां पर सफाई कर्मी तैनात नहीं है। इससे लोगाें को खुद साफ सफाई करनी पड़ती है। हैंडपंप से लेकर कुआं तक गंदगी से घिरे हैं। कुआं में पानी भरने गईं रानी ने बताया कि कई बार कीचड़ भरा होने से पैर फिसलने का डर बना रहता है।
प्रधान से कहा जाता है तो वह सफाई कर्मी न होने का बहाना बताकर आवाज दबा देती हैं।
यह हैं डायरिया से पीड़ित
प्रीति पुत्री राम किशन, रोली पुत्री राम नारायन, सोनम पुत्री शिव लाल, कौशल्या पत्नी शिव लाल, अर्चना पुत्री भीखम, दिलीप पुत्र नरेंद्र, मनीषा पुत्री प्र्रेमचंद्र, नरेंद्र पुत्र काशी, सुशीला पत्नी नरेंद्र, चित्रलेखा पुत्री ननकू, ममता पुत्री राजेश, मोहन पुत्र कल्लू व गुड़िया पुत्री संतोष। इसके अलावा तमाम लोग बाहर इलाज कराने के लिए जा चुके हैं।
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इससे गांव के लोग प्राइवेट इलाज कराने के लिए मजबूर हैं। अमर उजाला टीम ने शुक्रवार को डायरिया ग्रसित छेदीपुर गांव का हाल जाना तो यहां के लोग दहशत में दिखे। इनका कहना था कि लोग बीमार पड़ते जा रहे हैं। इससे आगे के हालात नाजुक हो सकते हैं।
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प्राइवेट इलाज को भागने लगे लोग
छेदीपुर गांव में डायरिया का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। अमर उजाला मेें खबर छपने के बाद स्थानीय पीएचसी की टीम हरकत में आई थी। चिकित्साप्रभारी डॉ. पवन बाजपेई के नेतृत्व में टीम ने यहां दो दिन इलाज किया।
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शुक्रवार की दोपहर तक लोग टीम आने का इंतजार करते रहे। टीम नहीं पहुंची तो मरीजों ने प्राइवेट इलाज की ओर रुख किया। गांव के राम कुमार ने बताया कि वह दो दिन से उल्टी दस्त से पीड़ित हैं। सरकारी डाक्टर नहीं आए तो असोथर कस्बे से दवा लाकर खाई है। ननकू का कहना है कि जो दवा टीम बांट गई,उसका असर नहीं हुआ। बाजार से दवा लाकर खानी पड़ी है।
चार दिन पहले मरी भैंस तो वजह नहीं
गांव के राम किशुन बताते हैं कि पड़ोसी गांव कधियां भगवती यादव की एक भैंस चार दिन पहले मर गई थी। यह अभी तक गांव के किनारे पड़ी है। इसके शव को कुत्ता खा रहे हैं। शव से उठने वाली बदबू ने गांव वालों का जीना दुश्वार कर दिया है।
इसके बावजूद न तो ग्राम पंचायत स्तर पर और न ही भैंस मालिक ही आगे आए। गांव के नरेंद्र कुमार कहते हैं कि दुर्गंध ने नाक में दम कर रखा है। अगर जल्द भैंस का शव नहीं हटाया गया तो हालात और भी बिगड़ सकते हैं।
खुद करते हैं सफाई
छेदीपुर गांव कंधिया ग्राम पंचायत का मजरा है। यहां पर सफाई कर्मी तैनात नहीं है। इससे लोगाें को खुद साफ सफाई करनी पड़ती है। हैंडपंप से लेकर कुआं तक गंदगी से घिरे हैं। कुआं में पानी भरने गईं रानी ने बताया कि कई बार कीचड़ भरा होने से पैर फिसलने का डर बना रहता है।
प्रधान से कहा जाता है तो वह सफाई कर्मी न होने का बहाना बताकर आवाज दबा देती हैं।
यह हैं डायरिया से पीड़ित
प्रीति पुत्री राम किशन, रोली पुत्री राम नारायन, सोनम पुत्री शिव लाल, कौशल्या पत्नी शिव लाल, अर्चना पुत्री भीखम, दिलीप पुत्र नरेंद्र, मनीषा पुत्री प्र्रेमचंद्र, नरेंद्र पुत्र काशी, सुशीला पत्नी नरेंद्र, चित्रलेखा पुत्री ननकू, ममता पुत्री राजेश, मोहन पुत्र कल्लू व गुड़िया पुत्री संतोष। इसके अलावा तमाम लोग बाहर इलाज कराने के लिए जा चुके हैं।