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Fatehpur News: दिल से दिल की गुफ्तगू और आशिकी अच्छी लगी...
Mon, 17 Mar 2025 12:33 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
Updated Mon, 17 Mar 2025 12:33 AM IST
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फतेहपुर। मुराइन टोला हनुमान मंदिर में रविवार को शैलेंद्र साहित्य सरोवर की काव्य गोष्ठी हुई। काव्य गोष्ठी में शैलेंद्र कुमार द्विवेदी ने पढ़ा कि तुमको पाया, मुस्कुराया, जिंदगी अच्छी लगी। दिल लगाया, सिर झुकाया, बंदगी अच्छी लगी। रोशनी में भी तुम्हीं और तीरगी में भी हो तुम, दिल से दिल की गुफ्तगू और आशिकी अच्छी लगी।
गोष्ठी का शुभारंभ कवि केपी सिंह कछवाह ने मां सरस्वती वंदना से की। पढ़ा कि मातु शारदे वंदना, धर चरणों में शीश। अंतर्मन निर्मल बने, दो ऐसा आशीष। पुन: पढ़ा कि किसलिए तन मिला, यह मनन कीजिए। दव्य कर्मों के खातिर जतन कीजिए। डॉ. सत्य नारायण मिश्र ने पढ़ा कि हे मधुमय, हे रसमय वसंत, तुमसे प्रमुदित हैं दिग् दिगंत। अमरावलियां हैं बौराईं, हैं प्रेम पुलक से पूर्ण कंत।
कवि सुंदरम सोनी ने पढ़ा कि होली के त्योहार का, उड़ता फगुआ रंग। रती पुलकित हो रही, मिली हवा में भंग। कवि दिनेश कुमार श्रीवास्तव ने पढ़ा कि प्राकट्य चित्त चतुरानन के, चातुर्वर्णों में जो ललाम। संगणक शुभाशुभ कर्मों के, श्री चित्रगुप्त जी को प्रणाम। प्रदीप कुमार गौड़ पढ़ा कि निशि दिन है बढ़ रहा प्रदूषण, बनें हुए हैं हम अनजान। पाॅलीथिन अब है प्रतिबंधित, चलन बंद कर बनो सुजान। विनय कुमार दीक्षित ने पढ़ा कि मस्त है तू सब भुलाकर, कुछ तनिक तो ध्यान कर ले। जिसलिए आया यहां पर, राम का गुणगान कर ले।
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गोष्ठी का शुभारंभ कवि केपी सिंह कछवाह ने मां सरस्वती वंदना से की। पढ़ा कि मातु शारदे वंदना, धर चरणों में शीश। अंतर्मन निर्मल बने, दो ऐसा आशीष। पुन: पढ़ा कि किसलिए तन मिला, यह मनन कीजिए। दव्य कर्मों के खातिर जतन कीजिए। डॉ. सत्य नारायण मिश्र ने पढ़ा कि हे मधुमय, हे रसमय वसंत, तुमसे प्रमुदित हैं दिग् दिगंत। अमरावलियां हैं बौराईं, हैं प्रेम पुलक से पूर्ण कंत।
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कवि सुंदरम सोनी ने पढ़ा कि होली के त्योहार का, उड़ता फगुआ रंग। रती पुलकित हो रही, मिली हवा में भंग। कवि दिनेश कुमार श्रीवास्तव ने पढ़ा कि प्राकट्य चित्त चतुरानन के, चातुर्वर्णों में जो ललाम। संगणक शुभाशुभ कर्मों के, श्री चित्रगुप्त जी को प्रणाम। प्रदीप कुमार गौड़ पढ़ा कि निशि दिन है बढ़ रहा प्रदूषण, बनें हुए हैं हम अनजान। पाॅलीथिन अब है प्रतिबंधित, चलन बंद कर बनो सुजान। विनय कुमार दीक्षित ने पढ़ा कि मस्त है तू सब भुलाकर, कुछ तनिक तो ध्यान कर ले। जिसलिए आया यहां पर, राम का गुणगान कर ले।
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