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पानी ने डुबोए अरमान, शादियों वाले घरों में नहीं दिखाई दे रही रौनक

Thu, 16 Apr 2015 12:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर Updated Thu, 16 Apr 2015 12:16 AM IST
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Happiness destroyed by water

बारिश के कहर से किसान हर तरह से तबाह हो गया है। फसलों की बुआई, जोताई, बीज और खाद मेें किसान अपने घर की पूंजी भी गवां बैठा है। आसमान से गिरे पानी ने उसके अरमान जला दिए हैं।

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फरवरी के महीने में किसान हरी-भरी फसलों को लहलहाता देख परिवार की खुशियों के सपने देख रहा था लेकिन मार्च व अप्रैल माह में हुई बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि ने एक पल में सपनों को चकनाचूर कर दिया। बारिश न थमने से किसानों की रबी फसल के साथ जायद की फसल भी चौपट होने की कगार पर पहुंच गई है।
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किसानों ने जायद की फसल में मूंग का बीज 125-150 रुपये प्रति किलो खरीद कर बुआई की है, लेकिन सोमवार व मंगलवार की जोरदार बारिश से मूंग के खेतों में पानी भर गया है। अप्रैल के महीने में कई किसानों के घरों में शादी की शहनाइयां बजनी है। कुदरत की मार से सहमे किसानों को घरों में खुशियोें की जगह मातम का माहौल नजर आ रहा है।
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अमर उजाला की रिपोर्ट में किसानों की दर्द भरी दास्तां।


सीन-1 चार वर्ष पहले पति की मौत हो चुकी है। घर की पूरी जिम्मेदारियों का निर्वहन खेती से हो रहा है। 15 बीघा गेहूं की फसल की बुआई की थी लेकिन मौसम की मार से अन्न का दाना तो क्या भूसा होना मुश्किल लग रहा है। 22 अप्रैल को लड़के दिनेश सिंह की बारात है। रुपये के अभाव से अभी तक कोई व्यवस्था नहीं हुई है।  - विधवा रानी देवी, सातो

सीन-2 21 अप्रैल को बेटी रोली की शादी है। खरीफ की सफल तो सूखे से बर्बाद हो गई थी लेकिन रबी की फसल का सहारा था। उसे भी भगवान ने छीन लिया। शादी के एक सप्ताह बचे है। फसल खराब देखकर साहूकार भी कर्ज नहीं दे रहा है। सोमवार से दो दिन हुई जोरदार बारिश में बुआई का बीज भी वापस आना मुश्किल दिखाई दे रहा है। किसान लल्लू केशरवानी

सीन-3 तेलियानी विकास खंड क्षेत्र के किसान ने बताया कि चार बीघा खेत निजी खेत है और दो चार बीघा बटाई के लेकर परिवार का गुजर बसर हो रहा है। 22 अप्रैल को लड़के का तिलक और 27 अप्रैल की बारात है। अप्रैल के पहले गेहूं कटने की संभावना थी।

इसी हिसाब से गर्मी में शादी का निर्णया लिया गया था कि गेहूं की फसल भी तैयार हो जाएगी, जिससे शादी में होने वाला खर्च फसल में आ जाएगा। मार्च से हो रही बारिश से फसल की कटाई पिछड़ गई। इसके बाद सोमवार की तेज बारिश व ओलावृष्टि ने तो सब कुछ ही छीन लिया। - रामनरेश, मवइया

दाने-दाने को मोहताज किसान
खागा। किसानों के ऊपर कहर बनकर हो रही है बारिश से बची फसल भी पूरी तरह से नष्ट हो गई है। अब एक दाना भी मिलना मुश्किल है। ज्यादातर किसानों के सामने रोटी समस्या पैदा हो गई है। खेतों में लबालब पानी भर गया है, जिससे फसलें खेतों में ही सड़ जाएंगी। कटी फसल भी बह गई। रोटी के लिए किसानों को मजबूरी में गांव से पलायन करना पड़ेगा।

मंगलवार को शाम और देर रात में दो बार हुई मूसलाधार बारिश से खेतों में पानी भर गया है। पिछलेे महीने ओलावृष्टि और बरसात से बची फसल इस पानी पूरी तरह से चौपट हो गई है। किसानों को बची फसल से रोटी की जा आस थी। वह भी समाप्त हो गई। पिछली बरसात से करीब 40 फीसदी गेहूं की फसल बच गई थी।

इस फसल को किसान समेटने में जी जान से लगे थे लेकिन बारिश ने इनकी मेहनत में पानी फेर दिया। किसान रामआसरे, भैयालाल, माताबदल, रामदीन और ओमप्रकाश ने बताया कि मंगलवार की बरसात ने खेतों और खलिहानों की सारी फसल बर्बाद कर दिया है। खाने की समस्या पैदा हो गई है।


बारिश से सब्जी उत्पादकों की भी टूटी कमर

फतेहपुर। बेमौसम झमाझम बारिश ने सब्जी उत्पादकों की कमर तोड़ दी है। खेत में पानी भर जाने से हरी सब्जियां कहीं सड़ न जाए, इस आशंका पर उन्हें समय से पहले तोड़ कर औने-पौने दामों पर बिक्री की जा रही है। माना जा रहा है कि सप्ताहभर बाद मंडियों में सब्जी का अकाल पड़ जाएगा।

बुधवार को मंडियों में हरी सब्जियों के दाम फर्श पर औंधे मुंह गिर गए। बड़ी तादाद में आवक के कारण किसानों को औने पौने दामों में सब्जी की बिक्री करनी पड़ी। मंगलवार तक 60 रुपये किलो बिकने वाली भिंडी और करैला किसानों को थोक में 20 से 25 रुपये किलो बेचना पड़ा। परवल और कुंदरू के भाव भी जमीन लुढ़कते दिखे।

टमाटर के भाव 5 रुपये से नीचे खिसकर 20 रुपये किलो पहुंचे। 5 रुपये गट्ठर बिकने वाली हरी धनियां इतनी ही कीमत में दो गट्ठर किसानों को बिक्री करनी पड़ी। गोभी और पातगोभी 10 रुपये प्रति पीस बिकी। इसी प्रकार खीरा और अदरक के दाम भी गिर गए। अदरक जहां 60 वहीं शिमला मिर्च 40 रुपये किलो बिकी।

आईटीआई रोड स्थित सब्जी मंडी में लोबिया बेचने आए किसान रामराज ने बताया कि खेत बरसात के पानी से लबालब है। ऐसी हालत में सब्जी की फसलें पूरी तरह से तबाह हो गई हैं। उन्होंने यह भी बताया कि किसान खराब होने के भय से सब्जी तोड़कर बाजार में औने पौने दामों में बेचने को मजबूर है।


उसका कहना है कि सप्ताहभर बाद मंडियों में हरी सब्जी का पूरी तरह से अकाल पड़ेगा, क्योंकि फसल नष्ट हो जाने के कारण स्थानीय सब्जी की आवक पूरी तरह से बंद हो जाएगी।

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