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पहली बार प्रदेश अध्यक्ष तक पहुंचा कोई लाल
अमर उजाला/फतेहपुर
Updated Sun, 01 Jan 2017 11:39 PM IST
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साइिकल, (प्रतीकात्म)
- फोटो : अमर उजाला
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नए साल पर सपा ने जिले को एक बड़ी सौगात देकर खुश कर दिया। यहां से अभी तक किसी भी राष्ट्रीय पार्टी में कोई प्रदेश अध्यक्ष नहीं बना था। बिंदकी के लहुरीसरांय गांव में जन्मे माटी के लाल नरेश उत्तम को यह पद देकर युवा सीएम अखिलेश यादव ने सभी को खुश कर दिया है। इस ताजपोशी को जिले में सपा की एक नई सियासी पारी और बहुत कुछ साधने के रूप में देखा जा रहा है।
विकास के मामले में पिछ़डे ब्लाक अमौली के लहुरी सराय गांव मे रहने वाले एक साधारण किसान परिवार में नरेश उत्तम का जन्म हुआ। सूबे की सत्तारूढ़ दल का प्रदेश अध्यक्ष घोषित होने पर पूरा गांव में नए साल के जशभन को चार चांद लग गए। नरेश उत्तम के सियासी सफर का आगाज छात्र राजनीति से हुआ था। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे पलट कर नहीं देखा। जिस पार्टी से जुड़े उसी के प्रति समर्पित रहे। पार्टी टूटी, दूसरी जगह जुड़ी तो भी सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव का साथ नहीं छोड़ा। राजनीति के जानकारों की माने तो नरेश के प्रदेश अध्यक्ष बनने से सपा को जिले में नई दिशा मिलेगी। कार्यकर्ता नए जोश के साथ पार्टी से जुड़कर संगठन की मजबूती के लिए काम करेंगे। जहानाबाद और बिंदकी विधानसभा सीट को बहुलता वाली बिरादरी कुर्मी राजनीति की करवट तय करती है। इसके अलावा चार अन् सीटों पर भी यह बिरादरी गणित बनाने व गणित बिगाड़ने दोनों में प्रभावी है। वहीं माना यह भी जा रहा है कि नरेश उत्तम को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्या के तोड़ के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है। केशव मौर्या पड़ोसी जिले कौशांबी के रहने वाले हैं और नरेश उत्तम फतेहपुर के। सीएम के लिए बुंदेलखंड के राजनीतिक सफर को भी यह आयाम देने में मुफीद माना जा रहा है।
सपा के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए एमएलसी नरेश उत्तम के गांव में नए साल की खुशियां दूनी हो गईं हैं। भले ही वह सालों से बीवी और बच्चे के साथ कानपुर में रहते हैं लेकिन उनका मिलनसार व्यवहार और व्यक्तित्व हरेक शख्स के जेहन में अभी भी बसा है। यही वजह है कि ज्यादातर लोग गांव के इस लाल के सियासी कद के कायल दिखे। -गांव के बालकिशन कहते हैं कि उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है। साफ सुथरी छवि के नरेश सपा को अपनी हिम्मत और ताकत से आगे बढ़ाएंगे।
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-नरेश के बढ़े कद से गदगद प्रेम बाबू काफी खुश है। वह कहते हैं कि नरेश के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद सपा के फिर से सत्ता में आने पर उनका विकास से अछूता क्षेत्र फल-फूल जाएगा।
- 72 साल के बुजुर्ग जगतनारायन कहते हैं कि नरेश का व्यवहार और शिष्टाचार मिसाल रहा। सपा ने नरेश को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर लहुरी सराय गांव को सही मायने में नए साल का खास तोहफा दिया है।
- युवा रिंकू का कहना है कि वह इतने खुश हैं कि पूछो मत। मानो गांव को इस ताजपोशी से ही विकास की निधि मिल गई है।
सपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम का व्यक्तित्व कई मायने में उन्हें दूसरों से अलहदा खड़ा करता है। वह एक कुशल राजनेता है तो कुशल कलाकार भी। नरेश उत्तम के पड़ोसी और हमसखा राम प्यारे उत्तम गदगद हैं। उन्होंने कक्षा एक से हाई स्कूल तक साथ पढ़ाई की। बकौल राम प्यारे, नरेश बचपन से ही सीधे और सौम्य थे। वह किसी से झगड़ा नहीं करते थे। कहने में गुरेज कैसा, पढ़ाई में वह मुझसे बेहतर थे। सवाल का उत्तर देने में बिल्कुल हाजिर जवाब। पढ़ने में बेहतर थे तो कलाकार भी कम नहीं। होली के दौरान वह ढोलक बजाते तो उसकी धमक सुनते बनती। फाग गाने का भी शौक था। जब भी कभी मौका मिलता, फाग गाना न भूलते। अब मिले हुए काफी दिन हो गए है। तमाम चीजें समय के साथ बदल जाती है लेकिन नरेश के मामले में वह ऐसा नहीं सोचते।
न स्कूल बनाया और न खड़ी की फैक्ट्री
अमौली। जो भी है वह पैतृक, सियासत में रहकर कुछ भी नहीं बनाया। जी हां बात हो रही सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम की। नरेश के सादगी भरे जीवन के किस्से आम हैं। ग्रामीण कहते हैं कि मसलन उनके पास जितनी जमीन गांव में पहले थी, उतनी ही अब भी है। उन्होंने एक भी बीघा जमीन नहीं खरीदी है। न ही कोई अपना स्कूल बनवाया और न खड़ी की अपनी फैक्ट्री। इकलौते बेटे नितिन और पत्नी विजयलक्ष्मी के साथ कानपुर के नौबस्ता इलाके में रहते हैं।
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विकास के मामले में पिछ़डे ब्लाक अमौली के लहुरी सराय गांव मे रहने वाले एक साधारण किसान परिवार में नरेश उत्तम का जन्म हुआ। सूबे की सत्तारूढ़ दल का प्रदेश अध्यक्ष घोषित होने पर पूरा गांव में नए साल के जशभन को चार चांद लग गए। नरेश उत्तम के सियासी सफर का आगाज छात्र राजनीति से हुआ था। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे पलट कर नहीं देखा। जिस पार्टी से जुड़े उसी के प्रति समर्पित रहे। पार्टी टूटी, दूसरी जगह जुड़ी तो भी सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव का साथ नहीं छोड़ा। राजनीति के जानकारों की माने तो नरेश के प्रदेश अध्यक्ष बनने से सपा को जिले में नई दिशा मिलेगी। कार्यकर्ता नए जोश के साथ पार्टी से जुड़कर संगठन की मजबूती के लिए काम करेंगे। जहानाबाद और बिंदकी विधानसभा सीट को बहुलता वाली बिरादरी कुर्मी राजनीति की करवट तय करती है। इसके अलावा चार अन् सीटों पर भी यह बिरादरी गणित बनाने व गणित बिगाड़ने दोनों में प्रभावी है। वहीं माना यह भी जा रहा है कि नरेश उत्तम को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्या के तोड़ के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है। केशव मौर्या पड़ोसी जिले कौशांबी के रहने वाले हैं और नरेश उत्तम फतेहपुर के। सीएम के लिए बुंदेलखंड के राजनीतिक सफर को भी यह आयाम देने में मुफीद माना जा रहा है।
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सपा के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए एमएलसी नरेश उत्तम के गांव में नए साल की खुशियां दूनी हो गईं हैं। भले ही वह सालों से बीवी और बच्चे के साथ कानपुर में रहते हैं लेकिन उनका मिलनसार व्यवहार और व्यक्तित्व हरेक शख्स के जेहन में अभी भी बसा है। यही वजह है कि ज्यादातर लोग गांव के इस लाल के सियासी कद के कायल दिखे। -गांव के बालकिशन कहते हैं कि उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है। साफ सुथरी छवि के नरेश सपा को अपनी हिम्मत और ताकत से आगे बढ़ाएंगे।
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-नरेश के बढ़े कद से गदगद प्रेम बाबू काफी खुश है। वह कहते हैं कि नरेश के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद सपा के फिर से सत्ता में आने पर उनका विकास से अछूता क्षेत्र फल-फूल जाएगा।
- 72 साल के बुजुर्ग जगतनारायन कहते हैं कि नरेश का व्यवहार और शिष्टाचार मिसाल रहा। सपा ने नरेश को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर लहुरी सराय गांव को सही मायने में नए साल का खास तोहफा दिया है।
- युवा रिंकू का कहना है कि वह इतने खुश हैं कि पूछो मत। मानो गांव को इस ताजपोशी से ही विकास की निधि मिल गई है।
सपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम का व्यक्तित्व कई मायने में उन्हें दूसरों से अलहदा खड़ा करता है। वह एक कुशल राजनेता है तो कुशल कलाकार भी। नरेश उत्तम के पड़ोसी और हमसखा राम प्यारे उत्तम गदगद हैं। उन्होंने कक्षा एक से हाई स्कूल तक साथ पढ़ाई की। बकौल राम प्यारे, नरेश बचपन से ही सीधे और सौम्य थे। वह किसी से झगड़ा नहीं करते थे। कहने में गुरेज कैसा, पढ़ाई में वह मुझसे बेहतर थे। सवाल का उत्तर देने में बिल्कुल हाजिर जवाब। पढ़ने में बेहतर थे तो कलाकार भी कम नहीं। होली के दौरान वह ढोलक बजाते तो उसकी धमक सुनते बनती। फाग गाने का भी शौक था। जब भी कभी मौका मिलता, फाग गाना न भूलते। अब मिले हुए काफी दिन हो गए है। तमाम चीजें समय के साथ बदल जाती है लेकिन नरेश के मामले में वह ऐसा नहीं सोचते।
न स्कूल बनाया और न खड़ी की फैक्ट्री
अमौली। जो भी है वह पैतृक, सियासत में रहकर कुछ भी नहीं बनाया। जी हां बात हो रही सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम की। नरेश के सादगी भरे जीवन के किस्से आम हैं। ग्रामीण कहते हैं कि मसलन उनके पास जितनी जमीन गांव में पहले थी, उतनी ही अब भी है। उन्होंने एक भी बीघा जमीन नहीं खरीदी है। न ही कोई अपना स्कूल बनवाया और न खड़ी की अपनी फैक्ट्री। इकलौते बेटे नितिन और पत्नी विजयलक्ष्मी के साथ कानपुर के नौबस्ता इलाके में रहते हैं।