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ट्रेन हादसे में परिवार का इकलौता चिराग बुझा
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फतेहपुर। रेलवे ट्रैक पार करते समय हादसे में जान गवांने वाला संदीप परिवार का इकलौता चिराग था। उसकी मौत से परिजनों का हाल बेहाल हो गया। उधर, दूसरे रिश्ते में बहनोई की कमाई पर ही उसका परिवार निर्भर था। मौतों से दोनों परिवारों में कोहराम मच गया।
ट्रेन हादसे में जान गवांने वाला संदीप महमूदपुर गांव के शंभू का इकलौता पुत्र था। बेटे की मौत से मां ज्ञानमती बदहवास हो गई। उससे छोटी दो बहनें नेहा और ननकी हैं। शंभू ईंट भट्ठे में मजदूरी करता था।
दो माह पहले मुंबई से कमाकर लौटा था। उसे बहनों की शादी की चिंता थी। इस कारण विदेश जाना चाहता था। रिश्ते में बहनोई रामचंद्र पासपोर्ट बनवाने और वीजा के लिए संदीप का सहयोग कर रहा था।
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उधर, रामचंद्र की मौत से उनकी मां रामदेइया और पत्नी शांति उर्फ सविता देवी का हाल बेहाल हो गया। रामचंद्र का एक पुत्र अंकित (12) और पुत्री बीनू (10) है। रामचंद्र कुवैत में नौकरी करता था। उसे 29 नवंबर को कुवैत वापस जाना था। उसका बड़ा भाई बचानी दुबई में नौकरी करता है।
शार्टकट अपनाने में गई जानें
मृतक रामचंद्र और संदीप के गांव जाने के लिए सीधा रास्ता हाईवे का है। लेकिन रात होने के कारण शार्टकट मलवां स्टेशन के रास्ते से दोनों गांव जा रहे थे। मृतक संदीप के चाचा धीरेंद्र ने बताया कि मलवां स्टेशन के रास्ते से करीब सात किलोमीटर का फर्क पड़ जाता है।
उन लोगों को रात के समय ट्रेन नहीं दिखी होगी। रात को हादसे की खबर मिली तो विश्वास नहीं हुआ। उन लोगों को इस रुट से नहीं आना था। बाइक संदीप के बुआ के लड़के की थी।
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ट्रेन हादसे में जान गवांने वाला संदीप महमूदपुर गांव के शंभू का इकलौता पुत्र था। बेटे की मौत से मां ज्ञानमती बदहवास हो गई। उससे छोटी दो बहनें नेहा और ननकी हैं। शंभू ईंट भट्ठे में मजदूरी करता था।
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दो माह पहले मुंबई से कमाकर लौटा था। उसे बहनों की शादी की चिंता थी। इस कारण विदेश जाना चाहता था। रिश्ते में बहनोई रामचंद्र पासपोर्ट बनवाने और वीजा के लिए संदीप का सहयोग कर रहा था।
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उधर, रामचंद्र की मौत से उनकी मां रामदेइया और पत्नी शांति उर्फ सविता देवी का हाल बेहाल हो गया। रामचंद्र का एक पुत्र अंकित (12) और पुत्री बीनू (10) है। रामचंद्र कुवैत में नौकरी करता था। उसे 29 नवंबर को कुवैत वापस जाना था। उसका बड़ा भाई बचानी दुबई में नौकरी करता है।
शार्टकट अपनाने में गई जानें
मृतक रामचंद्र और संदीप के गांव जाने के लिए सीधा रास्ता हाईवे का है। लेकिन रात होने के कारण शार्टकट मलवां स्टेशन के रास्ते से दोनों गांव जा रहे थे। मृतक संदीप के चाचा धीरेंद्र ने बताया कि मलवां स्टेशन के रास्ते से करीब सात किलोमीटर का फर्क पड़ जाता है।
उन लोगों को रात के समय ट्रेन नहीं दिखी होगी। रात को हादसे की खबर मिली तो विश्वास नहीं हुआ। उन लोगों को इस रुट से नहीं आना था। बाइक संदीप के बुआ के लड़के की थी।