{"_id":"8ae5ccd0eb0ee028786edbeee9036c74","slug":"farmers-have-been-making-fun-of-administration-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसानों का मजाक उड़ा रहा प्रशासन ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसानों का मजाक उड़ा रहा प्रशासन
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर
Updated Sun, 26 Apr 2015 12:37 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से तबाह किसानों का
विज्ञापन
प्रशासन मजाक उड़ा रहा है। जिला प्रशासन महीने भर से कैंप लगाकर मुआवजे की
चेक बांट रहा है।
18 करोड़, एक लाख 80 हजार रुपये बांट भी दिए पर अभी तक 50 फीसदी किसानों को भी मुआवजा नहीं मिला। किसान सरकार के मुआवजे की आस लगाए हैं।
बेमौसम बारिश से बर्बाद फसलों के सर्वे के नाम पर राजस्व कर्मी किसानों के जख्मों पर नमक छिड़क रहे हैं। शासन किसानों को राई, चना और अरहर की फसलों का मुआवजा दे रहा है, किंतु गेहूं की फसल के मुआवजे के नाम पर एक भी रुपया नहीं दिया गया।
मवइया के किसान रामनरेश ने बताया कि जिले में अरहर, चना और राई की खेती सीमित की जाती है। गेहूं की फसल अधिक क्षेत्रफल में की जाती है। लागत भी दलहन, तिलहन की फसलों से कई गुना अधिक लगती है। थरियांव के किसान महेश दुबे ने बताया कि लेखपाल सिर्फ सर्वे करते हैं, मुआवजा एक बार भी नहीं मिला है।
धान की फसल सूखे से बर्बाद हो गई थी। जिले को सूखा भी घोषित किया गया था। सातो के किसान झंडुल सिंह ने बताया कि राजनैतिक दल किसानों की बर्बादी में राजनीति की रोटी सेंक रहे हैं। दलहन और तिलहन की फसलों का मुआवजा वितरण हो गया है लेकिन अभी तक गांव में एक भी किसान को चेक नहीं दी गई है।
जिला प्रशासन ने दोबारा किसानों की फसलों का सर्वे करा लिया है। इसमें 33 फीसदी से अधिक नुकसान वाली फसलों की रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी है। राजस्व विभाग की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार गेहूं, चना, राई, अरहर, आलू, मटर व अन्य फसलों के नुकसान की दो अरब 66 करोड़ 33 लाख 65100 रुपये की डिमांड शासन को भेजी गई है।
एडीएम केपी यादव ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार 50 फीसदी से अधिक नुकसान होने वाले किसानों को मुआवजे की चेक वितरित की जा रही है। दोबारा 33 फीसदी से अधिक नुकसान वाली फसलों की डिमांड शासन को भेजी गई है। धनराशि आते ही सभी किसानों को चेक दी जाएंगी।
18 करोड़, एक लाख 80 हजार रुपये बांट भी दिए पर अभी तक 50 फीसदी किसानों को भी मुआवजा नहीं मिला। किसान सरकार के मुआवजे की आस लगाए हैं।
बेमौसम बारिश से बर्बाद फसलों के सर्वे के नाम पर राजस्व कर्मी किसानों के जख्मों पर नमक छिड़क रहे हैं। शासन किसानों को राई, चना और अरहर की फसलों का मुआवजा दे रहा है, किंतु गेहूं की फसल के मुआवजे के नाम पर एक भी रुपया नहीं दिया गया।
मवइया के किसान रामनरेश ने बताया कि जिले में अरहर, चना और राई की खेती सीमित की जाती है। गेहूं की फसल अधिक क्षेत्रफल में की जाती है। लागत भी दलहन, तिलहन की फसलों से कई गुना अधिक लगती है। थरियांव के किसान महेश दुबे ने बताया कि लेखपाल सिर्फ सर्वे करते हैं, मुआवजा एक बार भी नहीं मिला है।
धान की फसल सूखे से बर्बाद हो गई थी। जिले को सूखा भी घोषित किया गया था। सातो के किसान झंडुल सिंह ने बताया कि राजनैतिक दल किसानों की बर्बादी में राजनीति की रोटी सेंक रहे हैं। दलहन और तिलहन की फसलों का मुआवजा वितरण हो गया है लेकिन अभी तक गांव में एक भी किसान को चेक नहीं दी गई है।
जिला प्रशासन ने दोबारा किसानों की फसलों का सर्वे करा लिया है। इसमें 33 फीसदी से अधिक नुकसान वाली फसलों की रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी है। राजस्व विभाग की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार गेहूं, चना, राई, अरहर, आलू, मटर व अन्य फसलों के नुकसान की दो अरब 66 करोड़ 33 लाख 65100 रुपये की डिमांड शासन को भेजी गई है।
एडीएम केपी यादव ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार 50 फीसदी से अधिक नुकसान होने वाले किसानों को मुआवजे की चेक वितरित की जा रही है। दोबारा 33 फीसदी से अधिक नुकसान वाली फसलों की डिमांड शासन को भेजी गई है। धनराशि आते ही सभी किसानों को चेक दी जाएंगी।