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यूरिया तो दे दी, पर किसानों का नहीं किया बीमा
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फतेहपुर। किसानों का हर कदम पर शोषण हो रहा है। कहीं अनभिज्ञता तो कहीं किसानों की मजबूरी का फायदा उठाया जाता है। ऐसी ही बात उर्वरक खरीदने पर सामने आई है। इफ्को, कृभको की यूरिया खरीदने वाले किसानों का छह महीने (फसली) का दुर्घटना बीमा होता है। इसमें किसान की दुर्घटना होने पर चार हजार से एक लाख रुपये तक का क्लेम दिए जाने का नियम है।
जिले में इफ्को यूरिया बेचने के लिए 206 केंद्र बनाए गए हैं। इसमें सहकारी समिति के 70, आईएफएफडीसी के 74, डीसीएफ के 18, किसान एग्री जंशन 26, इफ्को ई-बाजार के तीन, उपभोक्ता भंडार के 12 और यूपी एग्रो के तीन उर्वरक बिक्री केंद्र हैं। इन स्थानों से यूरिया खरीदने वाले किसानों का कंपनी से छह महीना के लिए दुर्घटना बीमा किया जाता है। एक बोरी यूरिया खाद खरीदने वाले किसान का छह महीना तक चार हजार रुपये का दुघर्टना बीमा होता है।
इसी क्रम में अधिकतम 25 बोरी यूरिया खरीदने वाले किसानों का दुर्घटना बीमा रसीद के आधार पर हो जाता है। छह महीने के अंदर किसान की दुघर्टना के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो कंपनी से परिवार को क्लेम मिलेगा। मगर, इफ्को, कृभको के अधिकारी न तो इसका प्रचार-प्रसार करते हैं और न ही गोष्ठियों में किसानों को बताते हैं। उर्वरक के बिक्री केंद्रों में किसानों को रसीद भी नहीं दी जाती है।
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सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता रामनयन सिंह ने बताया कि किसान यूरिया खरीदते समय ई-पॉस मशीन की रसीद के अलावा मैनुअल रसीद भी जरूर लें। मैनुअल रसीद के आधार पर ही किसान दुर्घटना बीमा होता है। खाद खरीदने की तारीख से छह महीने तक दुर्घटना बीमा मान्य होता है। किसी किसान की दुर्घटना होती है, तो 24 घंटे के अंदर बिक्री केंद्र में सूचना देनी होगी। फिर इफ्को के अधिकारी जांच करेंगे। इसके बाद किसान दुर्घटना बीमा का लाभ मिलेगा।
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जिले में इफ्को यूरिया बेचने के लिए 206 केंद्र बनाए गए हैं। इसमें सहकारी समिति के 70, आईएफएफडीसी के 74, डीसीएफ के 18, किसान एग्री जंशन 26, इफ्को ई-बाजार के तीन, उपभोक्ता भंडार के 12 और यूपी एग्रो के तीन उर्वरक बिक्री केंद्र हैं। इन स्थानों से यूरिया खरीदने वाले किसानों का कंपनी से छह महीना के लिए दुर्घटना बीमा किया जाता है। एक बोरी यूरिया खाद खरीदने वाले किसान का छह महीना तक चार हजार रुपये का दुघर्टना बीमा होता है।
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इसी क्रम में अधिकतम 25 बोरी यूरिया खरीदने वाले किसानों का दुर्घटना बीमा रसीद के आधार पर हो जाता है। छह महीने के अंदर किसान की दुघर्टना के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो कंपनी से परिवार को क्लेम मिलेगा। मगर, इफ्को, कृभको के अधिकारी न तो इसका प्रचार-प्रसार करते हैं और न ही गोष्ठियों में किसानों को बताते हैं। उर्वरक के बिक्री केंद्रों में किसानों को रसीद भी नहीं दी जाती है।
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सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता रामनयन सिंह ने बताया कि किसान यूरिया खरीदते समय ई-पॉस मशीन की रसीद के अलावा मैनुअल रसीद भी जरूर लें। मैनुअल रसीद के आधार पर ही किसान दुर्घटना बीमा होता है। खाद खरीदने की तारीख से छह महीने तक दुर्घटना बीमा मान्य होता है। किसी किसान की दुर्घटना होती है, तो 24 घंटे के अंदर बिक्री केंद्र में सूचना देनी होगी। फिर इफ्को के अधिकारी जांच करेंगे। इसके बाद किसान दुर्घटना बीमा का लाभ मिलेगा।