पाले से ठिठुरन और बढ़ी
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फतेहपुर। हाड़कंपाऊ ठंड का चौथे दिन सोमवार को कहर जारी रहा। कोहरे के साथ पाले से ठिठुरन और बढ़ गई। सर्दी से बचने के लिए लोग घरों में दुबके रहे। दिन भर सार्वजनिक स्थानों पर भी सन्नाटा पसरा रहा। अब किसानों के साथ पशुपालकाें की भी समस्या बढ़ गई है। पशुओं का पेट भरने के लिए चारा की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं। प्रशासन ने बच्चों को ठंड के कहर से बचाने के लिए भले ही स्कूलों की बंदी करा दी है, लेकिन कोचिंग सेंटर अभी भी खुले हैं। इससे बच्चों को सुबह-शाम कड़ाके की ठंड में घर से निकलना पड़ता है। कोचिंग सेटरों के दरवाजे, खिड़की भी खुले रहते हैं। इससे बर्फीली सर्द हवाएं बच्चों को ठिठुरा देती है।
अभिभावक भी कोचिंग की मंहगी फीस को मद्देनजर रखते हुए बच्चों को पढ़ने जाने से नहीं रोक रहे हैं। भीषण ठंड की वजह से बस अड्डा व रेलवे स्टेशन में यात्रियों की भीड़ कम हो गई है। जरूरी काम वाले ही लोग सफर पर निकल रहे हैं। जो प्रतीक्षालय के बजाय अलाव के पास बैठकर वाहनों का इंतजार करते हैं। ठंड हवाओं मेें अलाव के पास बैठे लोग भी कांपते रहे। घरों के बिस्तर बर्फ की तरह ठंड रहे। उनमेें कुछ देर लेटने के बाद गर्म महसूस हुए। उधर, पशुओें को ठंड से बचाने के लिए पशुपालक दिनभर बाड़ों में बंद रखते हैं। खेत से हरा चारा काटना भी मुश्किल हो गया है।
कोहरे से लेट आईं ट्रेनें
फतेेहपुर। पूरब की ओर जाने वाली कालका तीन घंटे, जोधपुर हावड़ा आठ घंटे, मुरी पांच घंटे, नंदनकानन नौ घंटे, पुरुषोत्तम 10 घंटे, प्रयागराज 12 घंटा और संगम एक्सप्रेस साढ़े नौ घंटा देरी से आईं। पश्चिम की ओर जाने वाली हावड़ा-जोधपुर तीन घंटे, महानंदा 10 घंटे, तूफान आठ घंटे देरी से प्लेटफार्म पर पहुंची।
पछुआ हवा ने बढ़ाई ठंड
किसान फसल देखने की नहीं जुटा पा रहे हिम्मत
खागा (फतेहपुर)। पछुआ हवा से ठंड बढ़ गई है। नगर पंचायत के सार्वजनिक स्थानों पर जलने वाले अलाव राहगीरों की सर्दी नहीं कम कर पा रहे हैं। ठंड के कहर से किसानों की भी हालत खराब है। मेहनत से तैयार की गई फसलों को भी देखने जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। तहसील स्तर के राजकीय कार्यालय में ठंड से सन्नाटा पसरा रहा। गरीब पुआल की चटाई बनाकर उसका बिस्तर बना लिए हैं। गरीबों को परिवार की सुरक्षा के साथ पशुओं की सुरक्षा में पुआल का इस्तेमाल कर रहे हैं। पशुबाड़ा के दरवाजे में पुआल की चटाई लगाए हुए हैं। इससे खुद व पशुओं का सर्दी से बचाव करने को मजबूर हैं। वृद्ध दिनभर रजाई से बाहर नहीं निकले। बच्चे भी ठंड से बचने के लिए आग के पास बैठे रहे। उधर, नगर को छोड़कर कस्बा व ग्रामीण क्षेत्र में अलाव की व्यवस्था नहीं है। इसके लिए शासन से 50 हजार रुपये भी तहसील मुख्यालय को मिल चुकी है।