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बिजली विभाग को जारी बजट की पत्रावली गायब
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जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय
- फोटो : FATEHPUR
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फतेहपुर। बिजली विभाग को जारी बजट की फाइल बेसिक शिक्षा विभाग से गायब हो गई है। विभाग ने चार करोड़ से ज्यादा का बजट 2009 से 2013 के बीच जारी किया था।
इससे 1550 विद्यालयों में कनेक्शन कराए जाने थे। प्रति स्कूल 26 हजार 9 सौ 88 रुपये का बजट दिया गया था। अब विभाग को फाइल खोजे नहीं मिल रही हैं। ऐसे में पूरे मामले में बड़ा खेल होने की आशंका प्रबल होती दिख रही है।
बेसिक शिक्षा विभाग ने परिषदीय स्कूलों में पहली बार 2008-09 से विद्युतीकरण की शुरुआत हुई थी। पहली बार 451, दूसरे साल दो किस्तों में 461, तीसरी तीसरे साल 100 और 2012-13 में 138 स्कूलों के विद्युतीकरण के लिए धनराशि आवंटित की गई थी।
प्रत्येक स्कूल में 1788 रुपये से वायरिंग, 2200 रुपये से कनेक्शन और 7500 रुपये से पंखे आदि सामग्री की खरीद की जानी थी। लगातार चार वित्तीय सालों में चार करोड़ की धनराशि खर्च होने के बाद बिजली विभाग ने सिर्फ 227 स्कूलों में कनेक्शन कराने की रिपोर्ट दी थी। जबकि 1550 स्कूलों के विद्युतीकरण के लिए बजट जारी हुआ था।
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खास बात ये है कि बेसिक शिक्षा विभाग करोड़ों रुपये की इस धनराशि को भूल चुका है। विभाग पहले से जारी बजट को लेकर बिजली विभाग से कुछ जानने की कोशिश तक नहीं कर रहा है।
2017 से जारी होने वाली धनराशि की मानीटरिंग हो रही है। पहले जमा करोड़ों की धनराशि की असलियत जानने तक की कोशिश अधिकारी नहीं कर रहे हैं।
ऐसे में प्रतीत हो रहा है कि करोड़ों रुपये के इस बजट में बेसिक शिक्षा विभाग और बिजली विभाग दोनों ने मिलकर मामले में खेल किया है। यही कारण है कि दोनों विभाग इसकी तह तक जाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं।
बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि विभाग का बहुत सारा रिकार्ड पुरानी तहसील स्थित डीपीईपी कार्यालय में डंप हैं। यहां पर कर्मचारी लगाकर पुरानी पत्रावलियां तलाशी जा रही हैं। रिकार्ड मिलने पर सही स्थिति का पता लगेगा। अभी तक तो बिजली विभाग ही उनके विभाग पर कर्ज निकाल रहा है।
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इससे 1550 विद्यालयों में कनेक्शन कराए जाने थे। प्रति स्कूल 26 हजार 9 सौ 88 रुपये का बजट दिया गया था। अब विभाग को फाइल खोजे नहीं मिल रही हैं। ऐसे में पूरे मामले में बड़ा खेल होने की आशंका प्रबल होती दिख रही है।
बेसिक शिक्षा विभाग ने परिषदीय स्कूलों में पहली बार 2008-09 से विद्युतीकरण की शुरुआत हुई थी। पहली बार 451, दूसरे साल दो किस्तों में 461, तीसरी तीसरे साल 100 और 2012-13 में 138 स्कूलों के विद्युतीकरण के लिए धनराशि आवंटित की गई थी।
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प्रत्येक स्कूल में 1788 रुपये से वायरिंग, 2200 रुपये से कनेक्शन और 7500 रुपये से पंखे आदि सामग्री की खरीद की जानी थी। लगातार चार वित्तीय सालों में चार करोड़ की धनराशि खर्च होने के बाद बिजली विभाग ने सिर्फ 227 स्कूलों में कनेक्शन कराने की रिपोर्ट दी थी। जबकि 1550 स्कूलों के विद्युतीकरण के लिए बजट जारी हुआ था।
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खास बात ये है कि बेसिक शिक्षा विभाग करोड़ों रुपये की इस धनराशि को भूल चुका है। विभाग पहले से जारी बजट को लेकर बिजली विभाग से कुछ जानने की कोशिश तक नहीं कर रहा है।
2017 से जारी होने वाली धनराशि की मानीटरिंग हो रही है। पहले जमा करोड़ों की धनराशि की असलियत जानने तक की कोशिश अधिकारी नहीं कर रहे हैं।
ऐसे में प्रतीत हो रहा है कि करोड़ों रुपये के इस बजट में बेसिक शिक्षा विभाग और बिजली विभाग दोनों ने मिलकर मामले में खेल किया है। यही कारण है कि दोनों विभाग इसकी तह तक जाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं।
बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि विभाग का बहुत सारा रिकार्ड पुरानी तहसील स्थित डीपीईपी कार्यालय में डंप हैं। यहां पर कर्मचारी लगाकर पुरानी पत्रावलियां तलाशी जा रही हैं। रिकार्ड मिलने पर सही स्थिति का पता लगेगा। अभी तक तो बिजली विभाग ही उनके विभाग पर कर्ज निकाल रहा है।

13 जनवरी के अमर उजाला के पेज एक पर प्रकाशित खबर की पीडीएफ- फोटो : FATEHPUR

13 जनवरी को अमर उजाला के पेज दो पर प्रकाशित खबर की पीडीएफ- फोटो : FATEHPUR