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टूट गई आस तो दूल्हे राजा बैरंग लौटे
ब्यूरो अमर उजाला, फतेहपुर
Updated Thu, 17 Nov 2016 12:16 AM IST
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भारतीय स्टेट बैंक में महिलाओं की लाइन
- फोटो : अमर उजाला
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एक सप्ताह से गांववाले नोट को लेकर उहापोह में जी रहे हैं। उन्हें पुराने नोट बदलने और नए नोट हासिल करने के लिए लंबा वक्त बैंकों की लाइन में जाया करना पड़ रहा है। इसके बावजूद ज्यादातर लोग नाकामयाब हो रहे हैं। किसी को गृहस्थी चलाने को नए नोटों की दरकार है, तो किसी महानगर में पढ़ रहे बेटी और बेटे को खर्च भेजने की। उनकी हालत ज्यादा खराब है जिनके घर में शहनाई बजने को है, क्योंकि उधारी की बात फिलहाल गुजरे जमाने की बात होकर रह गई है।चौडगरा की एक बैंक में लगे दूल्हे को निराश होना पड़ गया। पेश है- ग्रामीणों की नोट प्रकरण के मौजूदा हालात बयां करती एक रिपोर्ट।
ऐसे लगाते रहे चक्कर तो बेटी कैसे ब्याहेंगे
स्थान- सेंट्रल बैंक जहानाबाद। समय- दोपहर तीन बजे। लहुरी सरायं के सुरेश कुमार लाइन में बारी न आने पर उदास मन से बाहर निकले। पूछा तो बोले, कुछ न पूछो भाई। बकौल सुरेश, उनकी बेटी श्वेता की 28 तारीख को बारात आ रही है। वह सेंट्रल बैंक के खाताधारक हैं। दो दिन से चक्कर काट रहे हैं। मंगलवार को तो कैश काउंटर तक पहुंच गए थे लेकिन रुपया खत्म हो गया।
कोचिंग पढ़ रहे भाई को रुपये भेजने के लाले
स्थान- इलाहाबाद बैंक बिंदकी। समय- सुबह साढ़े 10 बजे। नगर के सुरेश अपने पिता के खाते से 10 हजार रुपया निकलाने आए हैं। धक्कामुक्की ने इन्हें आगे से पीछे कर दिया। अपनी जगह जाने की कोशिश की, तो एतराज हुआ। उन्होंने बताया कि छोटा भाई कानपुर के काकादेव में कोचिंग कर रहा है। हफ्ते भर पहले गया था तो घर से पांच-पांच सौ की 10 नोट लेकर। अब उसके पास नाश्ता और भोजन का पैसा नहीं है। तीन दिन से घर में बराबर कॉल कर रुपये भेजने को कह रहा है।
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छपे शादी के कार्ड उठाने को पैसा नहीं
स्थान- बैंक आफ इंडिया। समय- दोपहर तीन बजे। शिवराजपुर गांव के गोपाली केवट लंबी लाइन में खुद को बैंक के अंदर दाखिल न होता जान कर हट गए। मत्था पकड़ कर बाहर निकल रहे गोपाली का कह रहे हैं कि उनकी बेटी मंगला की तीन दिसंबर को बारात है। वह 50 हजार रुपये निकालना चाहते हैं। यह जरूरत पांच दिन से पूरी नहीं हो पा रही है। शादी के कार्ड छप गए हैं। अन्य कई खर्च पर पास का पैसा खत्म हो गया है। सोचकर आए थे कि अगर आज कुछ रुपया मिल जाता है तो इन्हें उठा लेंगे। पता नहीं कब नाते रिश्तेदारों और हेती-व्यवहारी को कार्ड दे पाएंगे।
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दूल्हा भी लगा लाइन, पर नहीं मिले नए नोट:
चौडगरा/फतेहपुर। क्षेत्र के जलाला गांव के रामपाल के बेटे राजेश की बुधवार को पास के खदरा गांव बरात गई है। राजेश बैंक आफ इंडिया से रुपया निकालने को वैवाहिक रश्मों को जल्दी जल्दी पूरी कर दोपहर में लाइन में आ लगे। यह कई मर्तबा लाइन में लगे लोगों को खुद के दूल्हा होने का अहसास कराया, लेकिन इन पर किसी का दिल नहीं पसीजा। ऐसा करते करते बैंक का समय खत्म हो गया। जिसके बाद उन्हें बारात में जाने के लिए साथ आए एक रिश्तेदार से उधारी लेनी पड़ी। जिसके बाद बारात दरवाजे से आगे बढ़ सकी।
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ऐसे लगाते रहे चक्कर तो बेटी कैसे ब्याहेंगे
स्थान- सेंट्रल बैंक जहानाबाद। समय- दोपहर तीन बजे। लहुरी सरायं के सुरेश कुमार लाइन में बारी न आने पर उदास मन से बाहर निकले। पूछा तो बोले, कुछ न पूछो भाई। बकौल सुरेश, उनकी बेटी श्वेता की 28 तारीख को बारात आ रही है। वह सेंट्रल बैंक के खाताधारक हैं। दो दिन से चक्कर काट रहे हैं। मंगलवार को तो कैश काउंटर तक पहुंच गए थे लेकिन रुपया खत्म हो गया।
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कोचिंग पढ़ रहे भाई को रुपये भेजने के लाले
स्थान- इलाहाबाद बैंक बिंदकी। समय- सुबह साढ़े 10 बजे। नगर के सुरेश अपने पिता के खाते से 10 हजार रुपया निकलाने आए हैं। धक्कामुक्की ने इन्हें आगे से पीछे कर दिया। अपनी जगह जाने की कोशिश की, तो एतराज हुआ। उन्होंने बताया कि छोटा भाई कानपुर के काकादेव में कोचिंग कर रहा है। हफ्ते भर पहले गया था तो घर से पांच-पांच सौ की 10 नोट लेकर। अब उसके पास नाश्ता और भोजन का पैसा नहीं है। तीन दिन से घर में बराबर कॉल कर रुपये भेजने को कह रहा है।
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छपे शादी के कार्ड उठाने को पैसा नहीं
स्थान- बैंक आफ इंडिया। समय- दोपहर तीन बजे। शिवराजपुर गांव के गोपाली केवट लंबी लाइन में खुद को बैंक के अंदर दाखिल न होता जान कर हट गए। मत्था पकड़ कर बाहर निकल रहे गोपाली का कह रहे हैं कि उनकी बेटी मंगला की तीन दिसंबर को बारात है। वह 50 हजार रुपये निकालना चाहते हैं। यह जरूरत पांच दिन से पूरी नहीं हो पा रही है। शादी के कार्ड छप गए हैं। अन्य कई खर्च पर पास का पैसा खत्म हो गया है। सोचकर आए थे कि अगर आज कुछ रुपया मिल जाता है तो इन्हें उठा लेंगे। पता नहीं कब नाते रिश्तेदारों और हेती-व्यवहारी को कार्ड दे पाएंगे।
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दूल्हा भी लगा लाइन, पर नहीं मिले नए नोट:
चौडगरा/फतेहपुर। क्षेत्र के जलाला गांव के रामपाल के बेटे राजेश की बुधवार को पास के खदरा गांव बरात गई है। राजेश बैंक आफ इंडिया से रुपया निकालने को वैवाहिक रश्मों को जल्दी जल्दी पूरी कर दोपहर में लाइन में आ लगे। यह कई मर्तबा लाइन में लगे लोगों को खुद के दूल्हा होने का अहसास कराया, लेकिन इन पर किसी का दिल नहीं पसीजा। ऐसा करते करते बैंक का समय खत्म हो गया। जिसके बाद उन्हें बारात में जाने के लिए साथ आए एक रिश्तेदार से उधारी लेनी पड़ी। जिसके बाद बारात दरवाजे से आगे बढ़ सकी।