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बांदा जिले से बरामद हुए सिधांव के लापता छात्र
अमर उजाला/फतेहपुर
Updated Sun, 01 Jan 2017 11:26 PM IST
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बरामद लापता छात्र अंकित और अमर
- फोटो : amarujala
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ललौली थाना क्षेत्र के सिंधाव गांव से 19 दिसंबर को लापता छात्रों को पुलिस ने बांदा जिले से सकुशल बरामद किया है। छात्रों के गायब होने के बाद एक ढाबे में रहते और काम करते थे। सकुशल लौटने के बाद परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा है।
बता दें कि सिंधाव गांव निवासी साहब रैदास का बेटा अंकित (11) और विजय रैदास का बेटा अमर रैदास (12) घर से 12 दिन पहले स्कूल पढ़ने गए थे। स्कूल के बाद वापस घर नहीं लौटे थे। छात्रों को सिधांव के ही एक युवक ने बांदा जिले के हाईवे पर एक ढाबे में बर्तन धोते देखा। उन्हें पहचानने के बाद गांव लौटकर युवक ने बच्चों के परिजनों को खबर दी। वे लोग पुलिस के पास पहुंचे और सारा माजरा बताया। दतौली चौकी पुलिस के साथ परिजन बांदा जिले में मौके पर पहुंचे। वहां से बच्चों को लेकर शनिवार को वापस आए। पुलिस ने लिखापढ़ी के बाद परिजनों को सुपुर्द कि या। छात्रों अंकित कुमार व अमर रैदास ने बताया कि वह बांदा पहुंचे तो उनके पास पैसे खत्म हो गए थे।
ढाबे में बर्तन धोते थे और रात में वहीं सोते थे। वे लोग ट्रक में बैठकर बांदा चले गए थे। घरवालों की याद में रात को सोते वक्त रोते-बिलखते थे। एक-दो बार सोचा कि चले आएं लेकिन फोन करने वाला कोई नहीं मिला। यह भी डर लगता था कि घर लौटेेंगे तो डांट व मार पड़ सकती है। एसओ श्रीप्रकाश यादव ने बताया कि बच्चों की बरामदगी कर ली गई।
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बता दें कि सिंधाव गांव निवासी साहब रैदास का बेटा अंकित (11) और विजय रैदास का बेटा अमर रैदास (12) घर से 12 दिन पहले स्कूल पढ़ने गए थे। स्कूल के बाद वापस घर नहीं लौटे थे। छात्रों को सिधांव के ही एक युवक ने बांदा जिले के हाईवे पर एक ढाबे में बर्तन धोते देखा। उन्हें पहचानने के बाद गांव लौटकर युवक ने बच्चों के परिजनों को खबर दी। वे लोग पुलिस के पास पहुंचे और सारा माजरा बताया। दतौली चौकी पुलिस के साथ परिजन बांदा जिले में मौके पर पहुंचे। वहां से बच्चों को लेकर शनिवार को वापस आए। पुलिस ने लिखापढ़ी के बाद परिजनों को सुपुर्द कि या। छात्रों अंकित कुमार व अमर रैदास ने बताया कि वह बांदा पहुंचे तो उनके पास पैसे खत्म हो गए थे।
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ढाबे में बर्तन धोते थे और रात में वहीं सोते थे। वे लोग ट्रक में बैठकर बांदा चले गए थे। घरवालों की याद में रात को सोते वक्त रोते-बिलखते थे। एक-दो बार सोचा कि चले आएं लेकिन फोन करने वाला कोई नहीं मिला। यह भी डर लगता था कि घर लौटेेंगे तो डांट व मार पड़ सकती है। एसओ श्रीप्रकाश यादव ने बताया कि बच्चों की बरामदगी कर ली गई।
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