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एक जैसे ही सभी कापियों में जवाब लिखे मिले
ब्यूरो, अमर उजाला फतेहपुर
Updated Sun, 22 Nov 2015 12:24 AM IST
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लोहिया समग्र गांवों के परिषदीय स्कूलों की शैक्षिक
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गुणवत्ता मूल्यांकन परीक्षा में प्रशासनिक व्यवस्था दगा दे गई। डीएम से
नियुक्त स्टेटिक अफसर ही शिक्षकों से मिल गए। बच्चों की हैंडराइटिंग काटकर
अपने हाथों से सवाल हल कर दिए या हल करा दिए। यह स्थिति बहुतायत स्कूलों की
रही। इतना ही नहीं बड़ी तादाद में स्कूलों ने अपनी करनी छिपाने के लिए
उत्तर पुस्तिकाओं में स्कूल का नाम ही नहीं लिखाया।
यूआरसी (नार्मल स्कूल) में शनिवार को सदर तहसील क्षेत्र के लोहिया समग्र गांवों के परिषदीय स्कूलों की शैक्षिक गुणवत्ता मूल्यांकन परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू हुआ। मूल्यांकन में 29 शिक्षक लगाए गए।
अपर उपजिलाधिकारी मोहम्मद कमर की देखरेख में मूल्यांकन हो रहा है। बहुआ ब्लाक के एक प्राथमिक स्कूल में कक्षा तीन की उत्तर पुस्तिकाओं में सवालों के एक जैसे जवाब एक ही हैंडराइटिंग में अंकित हैं।
इतना ही नहीं बच्चों के लिखे जवाब काट दिए गए हैं और शायद शिक्षकों ने अपनी हैंडराइटिंग से सवाल हल किए हैं। कई बच्चों की उत्तर पुस्तिकाएं इसका प्रमाण हैं।
ऐसी कापियों में 20 के पूर्णांक में 18 से 20 अंक बच्चों ने प्राप्त किए हैं। यह स्कूल और बच्चे तो बानगी के तौर पर हैं। इस तरह कई स्कूलों की उत्तर पुस्तिकाएं मूल्यांकन में सामने आ रही हैं।
इससे झलक रहा है कि डीएम ने जिन स्टेटिक अफसरों पर भरोसा कर उन्हें स्कूलों में लगाया वही दगा दे गए। अफसर बने लेखपाल या तो परीक्षा कराने नहीं गए या फिर शिक्षकों से तालमेल कर परीक्षा की औपचारिकता निभा दी।
इतना ही नहीं बड़ी तादाद में उत्तर पुस्तिकाओं में बच्चों की कक्षा और नाम तो अंकित हैं, लेकिन स्कूल का नाम गायब है। कुछ शिक्षकों ने तो हद ही पार कर दिया है।
इन शिक्षकों ने उत्तर पुस्तिकाओं के साथ बंडलों में भी स्कूल और ब्लाक का नाम नहीं लिखा है। ऐसे में बेसिक शिक्षा विभाग को ऐसे स्कूलों को चिह्नित करने के लिए खासी दिक्कतें उठानी पड़ेंगी, क्योंकि बच्चों के नाम के आधार पर स्कूल खोजना कठिन काम होगा।
यूआरसी (नार्मल स्कूल) में शनिवार को सदर तहसील क्षेत्र के लोहिया समग्र गांवों के परिषदीय स्कूलों की शैक्षिक गुणवत्ता मूल्यांकन परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू हुआ। मूल्यांकन में 29 शिक्षक लगाए गए।
अपर उपजिलाधिकारी मोहम्मद कमर की देखरेख में मूल्यांकन हो रहा है। बहुआ ब्लाक के एक प्राथमिक स्कूल में कक्षा तीन की उत्तर पुस्तिकाओं में सवालों के एक जैसे जवाब एक ही हैंडराइटिंग में अंकित हैं।
इतना ही नहीं बच्चों के लिखे जवाब काट दिए गए हैं और शायद शिक्षकों ने अपनी हैंडराइटिंग से सवाल हल किए हैं। कई बच्चों की उत्तर पुस्तिकाएं इसका प्रमाण हैं।
ऐसी कापियों में 20 के पूर्णांक में 18 से 20 अंक बच्चों ने प्राप्त किए हैं। यह स्कूल और बच्चे तो बानगी के तौर पर हैं। इस तरह कई स्कूलों की उत्तर पुस्तिकाएं मूल्यांकन में सामने आ रही हैं।
इससे झलक रहा है कि डीएम ने जिन स्टेटिक अफसरों पर भरोसा कर उन्हें स्कूलों में लगाया वही दगा दे गए। अफसर बने लेखपाल या तो परीक्षा कराने नहीं गए या फिर शिक्षकों से तालमेल कर परीक्षा की औपचारिकता निभा दी।
इतना ही नहीं बड़ी तादाद में उत्तर पुस्तिकाओं में बच्चों की कक्षा और नाम तो अंकित हैं, लेकिन स्कूल का नाम गायब है। कुछ शिक्षकों ने तो हद ही पार कर दिया है।
इन शिक्षकों ने उत्तर पुस्तिकाओं के साथ बंडलों में भी स्कूल और ब्लाक का नाम नहीं लिखा है। ऐसे में बेसिक शिक्षा विभाग को ऐसे स्कूलों को चिह्नित करने के लिए खासी दिक्कतें उठानी पड़ेंगी, क्योंकि बच्चों के नाम के आधार पर स्कूल खोजना कठिन काम होगा।