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गांव में पहुंचे दो शव, मच गया कोहराम
Updated Sun, 11 Mar 2018 11:40 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बकेवर (फतेहपुर)। ट्रक की टक्कर से हुई दो मौतों के चलते बकेवर कस्बे में पूरे दिन गम का माहौल रहा। देर शाम पोस्टमार्टम हाउस से दोनों के शव गांव पहुंचे तो महिलाओं की चीत्कार से सभी की आंखें नम हो गईं।
शनिवार सुबह बाइक से निकले बकेवर निवासी शिवाकांत तिवारी (45) वर्ष व पड़ोसी राघव दीक्षित (24) की डेरा गढ़ीवा के पास तेज रफ्तार ट्रक से आमने सामने हुई भिड़ंत में मौत हो गई थी। राघव की मां रामा देवी यह कह कह कर रोती रही कि उसने अपने बच्चे को बड़ी गरीबी से पाला था, जब सहारा मिलने का समय आया तो वह छोड़ कर चला गया। शिवाकांत की पत्नी रितु अपने आठ वर्षीय बेटी दीपिका व 4 वर्ष के पुत्र दीपांशु को लिए यह कहकर विलाप करती रही कि उसके बच्चे और वह अनाथ हो गए। अब इनका सहारा कौन बनेगा।
शिवाकांत ई- रिक्शा चला कर अपने बच्चों का पालन पोषण करते थे। शिवाकांत की मां अपने इकलौते बेटे का शव देख कई बार बेहोश हुई। रविवार सुबह बक्सर के चंद्रिका घाट में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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बकेवर (फतेहपुर)। ट्रक की टक्कर से हुई दो मौतों के चलते बकेवर कस्बे में पूरे दिन गम का माहौल रहा। देर शाम पोस्टमार्टम हाउस से दोनों के शव गांव पहुंचे तो महिलाओं की चीत्कार से सभी की आंखें नम हो गईं।
शनिवार सुबह बाइक से निकले बकेवर निवासी शिवाकांत तिवारी (45) वर्ष व पड़ोसी राघव दीक्षित (24) की डेरा गढ़ीवा के पास तेज रफ्तार ट्रक से आमने सामने हुई भिड़ंत में मौत हो गई थी। राघव की मां रामा देवी यह कह कह कर रोती रही कि उसने अपने बच्चे को बड़ी गरीबी से पाला था, जब सहारा मिलने का समय आया तो वह छोड़ कर चला गया। शिवाकांत की पत्नी रितु अपने आठ वर्षीय बेटी दीपिका व 4 वर्ष के पुत्र दीपांशु को लिए यह कहकर विलाप करती रही कि उसके बच्चे और वह अनाथ हो गए। अब इनका सहारा कौन बनेगा।
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शिवाकांत ई- रिक्शा चला कर अपने बच्चों का पालन पोषण करते थे। शिवाकांत की मां अपने इकलौते बेटे का शव देख कई बार बेहोश हुई। रविवार सुबह बक्सर के चंद्रिका घाट में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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