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मंडी में तीन वाटर कूलर खराब, ठंडे पानी को तरस रहे किसान
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सातनपुर मंडी में खराब पड़ा वाटर कूलर। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। सातनपुर मंडी को करोड़ों रुपये राजस्व मिलने के बावजूद यहां आने वाले किसान ठंडे पानी के लिए तरस रहे हैं। मंडी में लगे चार वाटर कूलरों में तीन ठप पड़े हैं। गेट पर लगे वाटर कूलर की टोटी खराब होने से पानी बहकर बर्बाद हो रहा है। मंडी के जिम्मेदारों को आंखों के सामने भी अव्यवस्थाएं नहीं दिख रही हैं।
जिले में प्रमुख रूप से किसान आलू की फसल उगाते हैं। सातनपुर मंडी में करीब दो माह से प्रतिदिन 200 से 400 ट्रक आलू पहुंच रहा है। आलू बिक्री से प्रतिदिन लाखों रुपये मंडी शुल्क भी जमा होता है। मंडी में इन दिनों करीब चार-पांच हजार व्यक्तियों का हर रोज आना-जाना है। गर्मी बढ़ने से किसानों, पल्लेदारों से लेकर व्यापारी व आढ़तियों को प्यास बुझाने के लिए ठंडे पानी की जरूरत है।
मंडी में लाखों रुपये खर्च कर चार वाटर कूलर भी इसी उद्देश्य से लगाए गए थे। जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते यह वाटर कूलर बदहाल हो गए हैं। मंडी निरीक्षक के निरीक्षण करने के बावजूद उनकी नजर इन वाटर कूलरों पर नहीं पड़ती। इससे किसानों को ठंडा पानी पीने के लिए 20 रुपये की बोतल खरीदनी पड़ती है।
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मंडी गेट पर लगा वाटर कूलर बिना चलाए ही चालू है। इसकी टोटी फ्री होने से पानी बंद ही नहीं होता। इससे उपयोग से अधिक ठंडे पानी का दुरुपयोग हो रहा है। गल्ला मंडी में लगा वाटर कूलर करीब डेढ़ साल से बंद है। इस पर लगी टंकी में भरा जा रहा पानी बर्बाद हो जाता है। सब्जी मंडी गेट पर लगे वाटर कूलर की टंकी से पानी बहकर नालियों में जाता है, जबकि खराब वाटर कूलर की टोटी भी गायब है।
गेट नंबर तीन के पास लगा वाटर कूलर लोगों को चिढ़ा रहा है। इसकी टंकी भी गायब है। प्यास बुझाने के लिए जब लोग पहुंचते हैं तो सूखी टोटी देखकर व्यवस्था को कोसते नजर आते हैं। वाटर कूलर के पीछे पाइप लाइन की टोटी से गर्म पानी पीकर लोग प्यास बुझा रहे हैं। आढ़तियों ने बताया कि मंडी प्रशासन व्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं दे रहा है।
मंडी की व्यवस्थाएं देख रहे निरीक्षक शिवम सक्सेना ने बताया कि सभी वाटर कूलर चालू हैं। जब उन्हें वाटर कूलर की दुर्दशा की जानकारी दी गई तो बोले सर्दियों में तो सब ठीक थे। अभी सत्यापन नहीं कराया गया है। मंगलवार को वाटर कूलर की कमियां ठीक कराकर चालू कराएंगे।
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जिले में प्रमुख रूप से किसान आलू की फसल उगाते हैं। सातनपुर मंडी में करीब दो माह से प्रतिदिन 200 से 400 ट्रक आलू पहुंच रहा है। आलू बिक्री से प्रतिदिन लाखों रुपये मंडी शुल्क भी जमा होता है। मंडी में इन दिनों करीब चार-पांच हजार व्यक्तियों का हर रोज आना-जाना है। गर्मी बढ़ने से किसानों, पल्लेदारों से लेकर व्यापारी व आढ़तियों को प्यास बुझाने के लिए ठंडे पानी की जरूरत है।
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मंडी में लाखों रुपये खर्च कर चार वाटर कूलर भी इसी उद्देश्य से लगाए गए थे। जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते यह वाटर कूलर बदहाल हो गए हैं। मंडी निरीक्षक के निरीक्षण करने के बावजूद उनकी नजर इन वाटर कूलरों पर नहीं पड़ती। इससे किसानों को ठंडा पानी पीने के लिए 20 रुपये की बोतल खरीदनी पड़ती है।
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मंडी गेट पर लगा वाटर कूलर बिना चलाए ही चालू है। इसकी टोटी फ्री होने से पानी बंद ही नहीं होता। इससे उपयोग से अधिक ठंडे पानी का दुरुपयोग हो रहा है। गल्ला मंडी में लगा वाटर कूलर करीब डेढ़ साल से बंद है। इस पर लगी टंकी में भरा जा रहा पानी बर्बाद हो जाता है। सब्जी मंडी गेट पर लगे वाटर कूलर की टंकी से पानी बहकर नालियों में जाता है, जबकि खराब वाटर कूलर की टोटी भी गायब है।
गेट नंबर तीन के पास लगा वाटर कूलर लोगों को चिढ़ा रहा है। इसकी टंकी भी गायब है। प्यास बुझाने के लिए जब लोग पहुंचते हैं तो सूखी टोटी देखकर व्यवस्था को कोसते नजर आते हैं। वाटर कूलर के पीछे पाइप लाइन की टोटी से गर्म पानी पीकर लोग प्यास बुझा रहे हैं। आढ़तियों ने बताया कि मंडी प्रशासन व्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं दे रहा है।
मंडी की व्यवस्थाएं देख रहे निरीक्षक शिवम सक्सेना ने बताया कि सभी वाटर कूलर चालू हैं। जब उन्हें वाटर कूलर की दुर्दशा की जानकारी दी गई तो बोले सर्दियों में तो सब ठीक थे। अभी सत्यापन नहीं कराया गया है। मंगलवार को वाटर कूलर की कमियां ठीक कराकर चालू कराएंगे।

सातनपुर मंडी में खराब पड़ा वाटर कूलर। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD