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जीवन की दिशा और दशा बदलती है रामकथा

Fri, 09 Jan 2015 12:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला फर्रुखाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला फर्रुखाबाद Updated Fri, 09 Jan 2015 12:33 AM IST
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The god story of life is changing direction and condition

राम कथा अमृत वर्षा के पहले दिन मानस मर्मज्ञ विजय कौशल जी महाराज ने कहा कि रामकथा आचरण में उतारने की नहीं बल्कि सिर्फ सुनने और गाने की वस्तु है। इसके सुनने और गाने भर से मनुष्य का उद्धार संभव है।

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नगर के प्रमुख समाजसेवी चंद्र प्रकाश ने पत्नी स्वर्गीय शकुंतला देवी की स्मृति में सीपी ग्राउंड में रामकथा का आयोजन किया है। कथा की शुरुआत से पहले पिक्को बाबू, सत्यप्रकाश अग्रवाल, मिथलेश अग्रवाल, मोनिका अग्रवाल, मंजू अग्रवाल, रजनी गोयल, हरेराम अग्रवाल ने विजय कौशल का व्यास पीठ पर स्वागत किया।
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कथा शुभारंभ विजय कौशल ने मंगलाचरण से किया।  संगीत के साथ चौपाइयों और हनुमान चालीसा के गायन से श्रद्धालु राममय हो गए। मानस मर्मज्ञ  कौशल ने कहा कि मनुष्य को बडे भाग्य से सत्संग मिलता है।  जो सत्संग में गोता लगाता है वही भक्त बन जाता है।
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यही कारण है कि इस कलियुग में पृथ्वी वासियों को रामकथा सुनने और सुनाने का मौका मिल रहा है जिससे देवता तक ईर्ष्या करते हैं। रामकथा आचरण में उतारने की नहीं बल्कि सिर्फ सुनने और सुनाने की वस्तु है। इसके सुनने से ही मनुष्य का उद्धार हो जाता है।

उन्होंने हनुमान का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रभु चरित सुनवे को रसिया, राम लखन सीता मन बसिया। अर्थात हनुमान जी सिर्फ राम कथा सुनने में ही लीन रहा करते थे,इससे राम लखन उनके हृदय में विराजमान हो गए थे। उन्होंने इसकी वैज्ञानिक व्याख्या भी की।

उन्होंने कहा कि मनुष्य मुंह से खाता है और उसे मल के रूप में निकाल देता है। जबकि कानों से सुनी बातों पर अमल करता है। वह कानों से जो भी अच्छा बुरा सुनता है, वैसा ही आचरण करता है। 

रामकथा का श्रवण करना चाहिए। इसी से भगवान को पाने की लालसा प्राप्त होती है। यह जीवन की दिशा और दशा को बदल देती है। उन्होेंने कहा कि कथा सुनने से मनुष्य का चित नहीं चरित्र और ध्येय बदलता है।  लोग इस पर अमल नहीं करते इसी से  घरों में अशांति का माहौल है।


उन्होंने कहा कि मन के मैल को कथा ही साफ कर सकती है।  इस कलियुग में इसका प्रयोग हरि नाम जपने में न किया तो हमारा उद्धार होने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि रामकथा जहां होती है वहां स्थान तीर्थराज बन जाता है। वहां देवता स्वयं आकर वास करते हैं।

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