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कॉलेजों की लापरवाही से छात्रवृत्ति फंसी
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विकास भवन में समाज कल्याण विभाग कार्यालय के बाहर खड़ी छात्रा व छात्र। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
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फर्रुखाबाद। शिक्षण संस्थाओं की लापरवाही से दशमोत्तर छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति फंस गई है। आवेदन में त्रुटियों से करीब 800 फॉर्म अस्वीकृत हो गए हैं। इसके अलावा उपस्थिति भी 75 प्रतिशत से कम दिखाई गई है। इससे छात्र-छात्राएं समाज कल्याण विभाग के चक्कर काट रहे हैं।
जनपद में दशमोत्तर की सरकारी व निजी 362 शिक्षण संस्थाएं हैं। इनमें 205 इंटर कॉलेज व 157 डिग्री कॉलेज शामिल हैं। इनमें अध्ययनरत 13,200 छात्र-छात्राओं ने छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। अनुसूचित जाति के 6525 व सामान्य के 6675 छात्र-छात्राएं शामिल हैं। नियमानुसार छात्रों के ऑनलाइन आवेदन के बाद संबंधित कॉलेज से डाटा चेक कर फारवर्ड किया जाता है। इसमें कॉलेज स्तर से लापरवाही की गई और अधिकांश आवेदनों में न तो त्रुटियां ठीक की गईं और बच्चों की उपस्थिति भी 75 प्रतिशत से कम दिखाई गई है।
आवेदन में अंकों के पूर्णांक व प्राप्तांक में भी भिन्नता है। बीएड छात्रों को 51250 रुपये, बीटीसी को 41000 व बीएएमएस के छात्र-छात्राओं को एक लाख 93 हजार रुपये शुल्क प्रतिपूर्ति मिलती है, जबकि स्नातक के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति मिलाकर करीब 8000 रुपये उनके खाते में भेजे जाते हैं। समाज कल्याण विभाग में प्रतिदिन करीब 50 से अधिक छात्र-छात्राएं चक्कर काट रहे हैं। पूछताछ में छात्रों ने बताया कि कोरोना काल में कॉलेज बंद थे तो उपस्थिति कम होने का सवाल ही नहीं उठता।
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जिला समाज कल्याण अधिकारी राजीव लोचन मिश्रा ने बताया कि संस्था यदि 75 प्रतिशत ऑनलाइन उपस्थिति के साक्ष्य उपलब्ध कराती है तो उस पर वह विचार करते हैं। अभी उन्हें कुल 4531 छात्र-छात्राओं का डाटा चेक कर शासन को फारवर्ड करना है। करीब 800 आवेदन अस्वीकृत हो चुके हैं। 7800 से अधिक छात्रों का डाटा भेजा जा चुका है। इनकी छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति धनराशि भी उनके खाते में पहुंच रही है। उन्होंने बताया कि 28 फरवरी तक जो संस्थाएं संशोधन कर डाटा उन्हें उपलब्ध कराएंगी, उसे वह शासन को फारवर्ड कर देंगे।
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जनपद में दशमोत्तर की सरकारी व निजी 362 शिक्षण संस्थाएं हैं। इनमें 205 इंटर कॉलेज व 157 डिग्री कॉलेज शामिल हैं। इनमें अध्ययनरत 13,200 छात्र-छात्राओं ने छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। अनुसूचित जाति के 6525 व सामान्य के 6675 छात्र-छात्राएं शामिल हैं। नियमानुसार छात्रों के ऑनलाइन आवेदन के बाद संबंधित कॉलेज से डाटा चेक कर फारवर्ड किया जाता है। इसमें कॉलेज स्तर से लापरवाही की गई और अधिकांश आवेदनों में न तो त्रुटियां ठीक की गईं और बच्चों की उपस्थिति भी 75 प्रतिशत से कम दिखाई गई है।
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आवेदन में अंकों के पूर्णांक व प्राप्तांक में भी भिन्नता है। बीएड छात्रों को 51250 रुपये, बीटीसी को 41000 व बीएएमएस के छात्र-छात्राओं को एक लाख 93 हजार रुपये शुल्क प्रतिपूर्ति मिलती है, जबकि स्नातक के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति मिलाकर करीब 8000 रुपये उनके खाते में भेजे जाते हैं। समाज कल्याण विभाग में प्रतिदिन करीब 50 से अधिक छात्र-छात्राएं चक्कर काट रहे हैं। पूछताछ में छात्रों ने बताया कि कोरोना काल में कॉलेज बंद थे तो उपस्थिति कम होने का सवाल ही नहीं उठता।
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जिला समाज कल्याण अधिकारी राजीव लोचन मिश्रा ने बताया कि संस्था यदि 75 प्रतिशत ऑनलाइन उपस्थिति के साक्ष्य उपलब्ध कराती है तो उस पर वह विचार करते हैं। अभी उन्हें कुल 4531 छात्र-छात्राओं का डाटा चेक कर शासन को फारवर्ड करना है। करीब 800 आवेदन अस्वीकृत हो चुके हैं। 7800 से अधिक छात्रों का डाटा भेजा जा चुका है। इनकी छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति धनराशि भी उनके खाते में पहुंच रही है। उन्होंने बताया कि 28 फरवरी तक जो संस्थाएं संशोधन कर डाटा उन्हें उपलब्ध कराएंगी, उसे वह शासन को फारवर्ड कर देंगे।