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डेंगू से बचाने वाले हाथों का टोटा
ब्यूरो/ अमर उजाला, इटावा
Updated Sat, 19 Sep 2015 11:04 PM IST
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डेंगू के डंक से बचाने वाले हाथाें की कमी है। जिले में मलेरिया और
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फाइलेरिया विभाग में स्टाफ ही पूरा नहीं है। महकमोें के पास वाहन भी नहीं
हैं। इससे हाकिम इलाकों में जाने से कतराते हैं। यह अपने निजी वाहनों से
ड्यूटी कर रहे हैं। जिले में कई मरीजों में डेंगू के लक्षण मिल चुके हैं।
लोग इससे खौफजदा हैं। डेंगू के इलाज की बेहतर सुविधाएं न होने से
परिजन मरीजों को कानपुर या आगरा ले जाते हैं। डेंगू से बचाव की जिम्मेदारी मलेरिया व फ ाइलेरिया महकमे की है। यह दोनों ही महकमे विकलांग हैं। इनके पास पर्याप्त स्टाफ नहीं है। इससे बचाव की जानकारी भी गांव के लोगों को नहीं दी जा पा रही है। जिले में मलेरिया अधिकारी का ही पद खाली है। सीएमओ ने वैकल्पिक तौर पर डा. हिलाल को चार्ज दे रखा
है। विभाग के पास सरकारी वाहन भी नहीं है। भ्रमण के लिए सीएमओ वाहन की व्यवस्था करते हैं। इसके बाद टीम क्षेत्रों में जाकर छिड़काव कर दवा बांटती है। मलेरिया विभाग में चार इंस्पेक्टर के बजाय दो की तैनाती है। एक सुपारवाइजर, दो फील्ड आफीसर हैं। फलेरिया विभाग में 22 कर्मचारियों के सापेक्ष 12 का ही स्टाफ है। कीट संग्रहकर्ता के दोनों पद खाली हैं। इनका काम लार्वा के बारे में जानकारी जुटाना होता है।
ग्राम सुरक्षा समितियों के खाते में पैसा डंप
गांव में साफ सुथराई व जलभराव को रोकने के लिए ग्राम सुरक्षा समितियों के खाते में हर साल 10 हजार रुपये का बजट दिया जाता है। इस खाते का संचालन प्रधान व एएनएम करती हैं। इनके आपसी विवाद के चलते यह पैसा कई सालों से डंप है। इस पैसे का सदुपयोग किया जाए तो डेंगू से राहत मिल सकती है।
सीएचसी व पीएचसी पर भेजा गया एंटी लार्वा
सीएमओ डा. राकेश कुमार ने बताया कि हर पीएचसी, सीएचसी पर एंटी लार्वा की 10-10 लीटर की केन भेजी गई हैं। टीमें शहर से लेकर ग्रामीण इलाके में इसका छिड़काव कर रही हैं। मलेरिया विभाग को हर साल 3-4 लाख रुपये का बजट मिलता है। इससे सामान की खरीददारी की गई थी।
डेंगू के डंक से बचाने के लिए अलर्ट
डेंगू डंक से बचाव के लिए शिक्षा विभाग के अफसर अलर्ट हो गए हैं। स्कूलों के मैदानों में खड़ी बड़ी-बड़ी घास को काटने, सफाई कराने और मच्छरों से बचाव के लिए दवा छिड़कने का आदेश शिक्षकों को दिया गया है। इससे स्कूली बच्चों को डेंगू से बचाया जा सके।
जिले में डेंगू का प्रकोप दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। जिले में कई लोग डेंगू की चपेट में आ चुके हैं। इनमें कुछ की मौत हो चुकी है। कुछ लोगों का दूसरे जनपदों में उपचार चल रहा है। इसके चलते शिक्षा विभाग अलर्ट हो गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी योगराज सिंह का कहना है कि परिषदीय स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को विद्यालय में सफाई रखने पर विशेष
ध्यान दिए जाने का आदेश दिया है। स्कूलों के मैदानों में खड़ी घास, नालियों की सफाई व शौचालयों की साफ सफाई कराने के निर्देश दिए गए हैं। कहा कि सप्ताह में कम से कम दो दिन मच्छर मारने की दवा का छिड़काव कराया जाए। पालिका और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को भी स्कूलों में दवा का छिड़काव कराने के लिए पत्र लिखा जाएगा। इससे बच्चों को डेंगू जैसी बीमारी से बचाया जा सके।
परिजन मरीजों को कानपुर या आगरा ले जाते हैं। डेंगू से बचाव की जिम्मेदारी मलेरिया व फ ाइलेरिया महकमे की है। यह दोनों ही महकमे विकलांग हैं। इनके पास पर्याप्त स्टाफ नहीं है। इससे बचाव की जानकारी भी गांव के लोगों को नहीं दी जा पा रही है। जिले में मलेरिया अधिकारी का ही पद खाली है। सीएमओ ने वैकल्पिक तौर पर डा. हिलाल को चार्ज दे रखा
है। विभाग के पास सरकारी वाहन भी नहीं है। भ्रमण के लिए सीएमओ वाहन की व्यवस्था करते हैं। इसके बाद टीम क्षेत्रों में जाकर छिड़काव कर दवा बांटती है। मलेरिया विभाग में चार इंस्पेक्टर के बजाय दो की तैनाती है। एक सुपारवाइजर, दो फील्ड आफीसर हैं। फलेरिया विभाग में 22 कर्मचारियों के सापेक्ष 12 का ही स्टाफ है। कीट संग्रहकर्ता के दोनों पद खाली हैं। इनका काम लार्वा के बारे में जानकारी जुटाना होता है।
ग्राम सुरक्षा समितियों के खाते में पैसा डंप
गांव में साफ सुथराई व जलभराव को रोकने के लिए ग्राम सुरक्षा समितियों के खाते में हर साल 10 हजार रुपये का बजट दिया जाता है। इस खाते का संचालन प्रधान व एएनएम करती हैं। इनके आपसी विवाद के चलते यह पैसा कई सालों से डंप है। इस पैसे का सदुपयोग किया जाए तो डेंगू से राहत मिल सकती है।
सीएचसी व पीएचसी पर भेजा गया एंटी लार्वा
सीएमओ डा. राकेश कुमार ने बताया कि हर पीएचसी, सीएचसी पर एंटी लार्वा की 10-10 लीटर की केन भेजी गई हैं। टीमें शहर से लेकर ग्रामीण इलाके में इसका छिड़काव कर रही हैं। मलेरिया विभाग को हर साल 3-4 लाख रुपये का बजट मिलता है। इससे सामान की खरीददारी की गई थी।
डेंगू के डंक से बचाने के लिए अलर्ट
डेंगू डंक से बचाव के लिए शिक्षा विभाग के अफसर अलर्ट हो गए हैं। स्कूलों के मैदानों में खड़ी बड़ी-बड़ी घास को काटने, सफाई कराने और मच्छरों से बचाव के लिए दवा छिड़कने का आदेश शिक्षकों को दिया गया है। इससे स्कूली बच्चों को डेंगू से बचाया जा सके।
जिले में डेंगू का प्रकोप दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। जिले में कई लोग डेंगू की चपेट में आ चुके हैं। इनमें कुछ की मौत हो चुकी है। कुछ लोगों का दूसरे जनपदों में उपचार चल रहा है। इसके चलते शिक्षा विभाग अलर्ट हो गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी योगराज सिंह का कहना है कि परिषदीय स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को विद्यालय में सफाई रखने पर विशेष
ध्यान दिए जाने का आदेश दिया है। स्कूलों के मैदानों में खड़ी घास, नालियों की सफाई व शौचालयों की साफ सफाई कराने के निर्देश दिए गए हैं। कहा कि सप्ताह में कम से कम दो दिन मच्छर मारने की दवा का छिड़काव कराया जाए। पालिका और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को भी स्कूलों में दवा का छिड़काव कराने के लिए पत्र लिखा जाएगा। इससे बच्चों को डेंगू जैसी बीमारी से बचाया जा सके।