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विकास भवन में प्रधानों का हंगामा
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Wed, 20 May 2015 11:48 PM IST
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ग्राम पंचायत अधिकारी व ग्राम विकास अधिकारियों के तबादले व समायोजन को
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लेकर प्रधान भड़क गए हैं। बुधवार की दोपहर विकास भवन पहुंचकर इन्होंने
नारेबाजी करते हुए विरोध जताना शुरू कर दिया। इसके बाद विकास भवन के
कार्यालयाें में काम बंद कराने लगे। इस दौरान कृषि रक्षा इकाई क ी महिला
कर्मचारी से गालीगलौज और हाथापाई की नौबत बन गई। राज्य कर्मचारी महासंघ
नेताओं के आ जाने से प्रधान मौके से निकल लिए। यह विकास भवन की इमारत के
नीचे आकर मेन गेट पर ताला जड़ने की तैयारी करने लगे। कोतवाल के तेवर देख
इनका यह मंसूबा भी कामयाब नहीं
हो पाया। बाद में इन्होंने सीडीओ को ज्ञापन दिया। इस बीच कर्मचारी दहशत के माहौल में बने रहे।
ग्राम पंचायत अधिकारियों व ग्राम विकास अधिकारियों क ा तबादला व समायोजन रद करने के लिए प्रधान लामबंद हो गए हैं। बुधवार की दोपहर यह विकास भवन पहुंचे। यह कार्यालयों में काम बंद कराने लगे। यह कार्यालयों में तालाबंदी के लिए चेता रहे थे। इनके निशाने पर डीपीआरओ गिरीशचंद्र थे। इन्हीं के खिलाफ नारेबाजी की जा रही थी। इससे जिला
पंचायत राज विभाग के कर्मचारी काम बंद कर निकलने लगे। डीपीआरओ सहित कई महकमों के कर्मचारियों ने खुद को कार्यालयों में बंद कर लिया। नारेबाजी करते हुए प्रधान कृ षि रक्षा कार्यालय पहुंचेे। यहां कर्मचारी शीला कार्यालय बंद करने जा रही थी। तभी उनसे गालीगलौज कर दिया गया। इससे इनका अर्राहपहाड़पुर के प्रधान रमेश चंद्र से विवाद होने लगा। इस बीच राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष राकेश चंद्र सारस्वत व दूसरे पदाधिकारी पहुंच गए। शीला ने इन्हें बताया कि शराब के नशे में प्रधान ने गाली दी हैं।
इसके बाद कर्मचारियों व प्रधानाें के बीच मोर्चा खुल गया। दोनों ओर से मुहांचाही होने लगी। बवाल होने के अंदेशे से विकास भवन के कर्मचारी दहशत में आ गए। उधर बैकफुट पर आए प्रधान नीचे आकर विकास भवन के मेन गेट पर ताला लगाने का मंसूबा बनाने लगे। इस बीच कोतवाल अनूप तिवारी फ ोर्स के साथ पहुंच गए। इन्होंने प्रधानों को हिदायत दी
कि, तालाबंदी जुर्म है। कानून अपने हाथों में न लें। इसके बाद प्रधान फिर से बैकफुट पर आ गए। यहां दीपिका शीला को लेकर पहुंच गईं। शीला कोतवाल से गालीगलौज की शिकायत करने लगीं। इससे एक बार फिर से माहौल गरमाने लगा। बाद में कोतवाल ने मामला शांत कराया। यहां प्रधान रमेश चंद्र यादव, मुफीद खां, जमील खां, लालाराम, रामविलास यादव, नीलम दुबे, इरफान खां, विनोद यादव, अमर सिंह, यतेंद्र आदि मौजूद रहे।
...नशा तो नशा है जनाब
विकास भवन में काम बंद कराने पहुंचे प्रधानों की गाड़ी जिला पंचायत परिसर में खड़ी थीं। यहां बीयर की खाली केेनें पड़ी थीं। विकास भवन के क र्मचारियों का कहना था कि यहां बीयर पीने के बाद कुछ प्रधान विकास भवन में हंगामा करने पहुंचे थे। शीला ने भी एक प्रधान पर शराब के नशे में गाली देने का आरोप लगाया था।
नियमानुसार किए गए तबादले : सीडीओ
हंगामे के बाद प्रधानोें के प्रतिनिधि मंडल ने सीडीओ से उनके कार्यालय में मुलाकात की। इनसे नीलम दुबे, लालाराम, मुफीद खां ने तबादले व समायोजन निरस्त करने की मांग की । इन्होंने कहा कि विधायकों से प्रधानों की बात हो चुकी है। अगर मांग न मानी गई तो मुख्यमंत्री को मामला बताया जाएगा। सीडीओ ने कहा कि तबादला व समायोजन की कार्रवाई नियमानुसार की गई है।
मांग न मानी गई तो आंदोलन
महोई के प्रधान टीकेंद्र सिंह ने कहा कि पंचायत सचिवों के तबादलाें व समायोजन को वापस लिया जाए। अगर प्रधानों की मांग न मानी गई तो आंदोलन किया जाएगा। प्रधान किसी से डरने वाले नहीं हैं।
गांवों में रुक जाएंगे विकास कार्य
विजाधरपुर क ी प्रधान नीलम दुबे ने बताया कि चुनाव करीब है। ऐसे समय में तबादला व समायोजन गलत है। अगर 6 माह पहले यह कार्रवाई की जाती तो कोई आपत्ति नहीं होती। नए सचिव को चार्ज लेने व बैंक में हस्ताक्षर प्रमाणित होने में वक्त लगेगा। इससे समय से विकास कार्य पूरे नहीं हो पाएंगे।
मदद मांगें तो साथ देंगे
राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष राकेश सारस्वत ने कहा कि पंचायत सचिव लड़ाई में मदद मांगेंगे तो पूरा साथ देेंगे। प्रधानों के विरोध से कोई मतलब नहीं है। किसी कर्मचारी से अभद्रता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस बीच शशिदेव सिंह को बुलाया गया। इन्होंने अध्यक्ष से सहयोग मांगा।
हो पाया। बाद में इन्होंने सीडीओ को ज्ञापन दिया। इस बीच कर्मचारी दहशत के माहौल में बने रहे।
ग्राम पंचायत अधिकारियों व ग्राम विकास अधिकारियों क ा तबादला व समायोजन रद करने के लिए प्रधान लामबंद हो गए हैं। बुधवार की दोपहर यह विकास भवन पहुंचे। यह कार्यालयों में काम बंद कराने लगे। यह कार्यालयों में तालाबंदी के लिए चेता रहे थे। इनके निशाने पर डीपीआरओ गिरीशचंद्र थे। इन्हीं के खिलाफ नारेबाजी की जा रही थी। इससे जिला
पंचायत राज विभाग के कर्मचारी काम बंद कर निकलने लगे। डीपीआरओ सहित कई महकमों के कर्मचारियों ने खुद को कार्यालयों में बंद कर लिया। नारेबाजी करते हुए प्रधान कृ षि रक्षा कार्यालय पहुंचेे। यहां कर्मचारी शीला कार्यालय बंद करने जा रही थी। तभी उनसे गालीगलौज कर दिया गया। इससे इनका अर्राहपहाड़पुर के प्रधान रमेश चंद्र से विवाद होने लगा। इस बीच राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष राकेश चंद्र सारस्वत व दूसरे पदाधिकारी पहुंच गए। शीला ने इन्हें बताया कि शराब के नशे में प्रधान ने गाली दी हैं।
इसके बाद कर्मचारियों व प्रधानाें के बीच मोर्चा खुल गया। दोनों ओर से मुहांचाही होने लगी। बवाल होने के अंदेशे से विकास भवन के कर्मचारी दहशत में आ गए। उधर बैकफुट पर आए प्रधान नीचे आकर विकास भवन के मेन गेट पर ताला लगाने का मंसूबा बनाने लगे। इस बीच कोतवाल अनूप तिवारी फ ोर्स के साथ पहुंच गए। इन्होंने प्रधानों को हिदायत दी
कि, तालाबंदी जुर्म है। कानून अपने हाथों में न लें। इसके बाद प्रधान फिर से बैकफुट पर आ गए। यहां दीपिका शीला को लेकर पहुंच गईं। शीला कोतवाल से गालीगलौज की शिकायत करने लगीं। इससे एक बार फिर से माहौल गरमाने लगा। बाद में कोतवाल ने मामला शांत कराया। यहां प्रधान रमेश चंद्र यादव, मुफीद खां, जमील खां, लालाराम, रामविलास यादव, नीलम दुबे, इरफान खां, विनोद यादव, अमर सिंह, यतेंद्र आदि मौजूद रहे।
...नशा तो नशा है जनाब
विकास भवन में काम बंद कराने पहुंचे प्रधानों की गाड़ी जिला पंचायत परिसर में खड़ी थीं। यहां बीयर की खाली केेनें पड़ी थीं। विकास भवन के क र्मचारियों का कहना था कि यहां बीयर पीने के बाद कुछ प्रधान विकास भवन में हंगामा करने पहुंचे थे। शीला ने भी एक प्रधान पर शराब के नशे में गाली देने का आरोप लगाया था।
नियमानुसार किए गए तबादले : सीडीओ
हंगामे के बाद प्रधानोें के प्रतिनिधि मंडल ने सीडीओ से उनके कार्यालय में मुलाकात की। इनसे नीलम दुबे, लालाराम, मुफीद खां ने तबादले व समायोजन निरस्त करने की मांग की । इन्होंने कहा कि विधायकों से प्रधानों की बात हो चुकी है। अगर मांग न मानी गई तो मुख्यमंत्री को मामला बताया जाएगा। सीडीओ ने कहा कि तबादला व समायोजन की कार्रवाई नियमानुसार की गई है।
मांग न मानी गई तो आंदोलन
महोई के प्रधान टीकेंद्र सिंह ने कहा कि पंचायत सचिवों के तबादलाें व समायोजन को वापस लिया जाए। अगर प्रधानों की मांग न मानी गई तो आंदोलन किया जाएगा। प्रधान किसी से डरने वाले नहीं हैं।
गांवों में रुक जाएंगे विकास कार्य
विजाधरपुर क ी प्रधान नीलम दुबे ने बताया कि चुनाव करीब है। ऐसे समय में तबादला व समायोजन गलत है। अगर 6 माह पहले यह कार्रवाई की जाती तो कोई आपत्ति नहीं होती। नए सचिव को चार्ज लेने व बैंक में हस्ताक्षर प्रमाणित होने में वक्त लगेगा। इससे समय से विकास कार्य पूरे नहीं हो पाएंगे।
मदद मांगें तो साथ देंगे
राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष राकेश सारस्वत ने कहा कि पंचायत सचिव लड़ाई में मदद मांगेंगे तो पूरा साथ देेंगे। प्रधानों के विरोध से कोई मतलब नहीं है। किसी कर्मचारी से अभद्रता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस बीच शशिदेव सिंह को बुलाया गया। इन्होंने अध्यक्ष से सहयोग मांगा।