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Farrukhabad News: मुठभेड़ में पैर में गोली मारने के आरोप में दरोगा को राहत
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फर्रुखाबाद। मुठभेड़ के दौरान आरोपी के पैर में गोली मारने और फर्जी मुकदमा दर्ज करने के आरोप में पुलिस दल के खिलाफ कार्रवाई के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आवेदक तत्कालीन थानाध्यक्ष नागेंद्र सिंह को अंतरिम राहत दी है। न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी की पीठ ने आगे की कार्यवाही पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी है।
थाना राजेपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष नागेंद्र सिंह की ओर उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की गई। बताया था कि पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान उपेंद्र उर्फ रॉकी को गिरफ्तार किया था। तत्कालीन थानाध्यक्ष की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। आरोपी ने जमानत अर्जी में पुलिस पर घर से ले जाकर सुनसान स्थान पर पैर में गोली मारने और फर्जी मुकदमा दर्ज करने का आरोप लगाया था।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने चार मई को आरोपी की जमानत अर्जी खारिज करते हुए पुलिस अधीक्षक समेत संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। याचिका में विशेष न्यायाधीश, दस्यु प्रभावित क्षेत्र, तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, फर्रुखाबाद की ओर से एक सितंबर को जारी तलबी आदेश और समूची कार्यवाही को निरस्त करने की मांग की गई थी। उच्च न्यायालय में आवेदक के अधिवक्ता ने तलबी आदेश को विधि विरुद्ध बताया। न्यायालय ने विपक्षी को चार सप्ताह में प्रतिशपथपत्र और आवेदक को उसके बाद दो सप्ताह में प्रत्युत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया।
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थाना राजेपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष नागेंद्र सिंह की ओर उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की गई। बताया था कि पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान उपेंद्र उर्फ रॉकी को गिरफ्तार किया था। तत्कालीन थानाध्यक्ष की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। आरोपी ने जमानत अर्जी में पुलिस पर घर से ले जाकर सुनसान स्थान पर पैर में गोली मारने और फर्जी मुकदमा दर्ज करने का आरोप लगाया था।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने चार मई को आरोपी की जमानत अर्जी खारिज करते हुए पुलिस अधीक्षक समेत संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। याचिका में विशेष न्यायाधीश, दस्यु प्रभावित क्षेत्र, तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, फर्रुखाबाद की ओर से एक सितंबर को जारी तलबी आदेश और समूची कार्यवाही को निरस्त करने की मांग की गई थी। उच्च न्यायालय में आवेदक के अधिवक्ता ने तलबी आदेश को विधि विरुद्ध बताया। न्यायालय ने विपक्षी को चार सप्ताह में प्रतिशपथपत्र और आवेदक को उसके बाद दो सप्ताह में प्रत्युत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया।
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