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जेल भेजने वाले इंस्पेक्टर समेत पुलिसकर्मियों पर मुकदमा के आदेश
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
Updated Mon, 22 Aug 2016 11:27 PM IST
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दो साल पहले वादी पक्ष से मिलकर विद्वेष की भावना से चार अलग-अलग मुकदमों में लोगों को झूठा फंसाना तत्कालीन कोतवाल वीके सिंह यादव तथा दरोगा व हमराह सिपाहियों को महंगा पड़ा है। सीबीसीआईडी ने विवेचना के दौरान सभी मामले झूठे पाए हैं। सीबीसीआईडी ने एसपी को भेजी रिपोर्ट में विद्वेष की भावना से इन लोगों को बंद करने की रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की है।
एसपी ने कोतवाल समेत दरोगा और हमराह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दे दिए हैं। 26 मार्च 2014 को कोतवाली कायमगंज के नगला बसोला के रहने वाले फूल सिंह पुत्र हीरालाल ने मुकदमा अपराध संख्या 107/14 दर्ज कराया, जिसमें कहा कि उनके पुत्र चंद्रपाल को रामशंकर निवासी मुंशी नगला, अरविंद निवासी अमृतपुर, राधेश्याम निवासी नगला बसोला, रामहरि निवासी बसोला, मुकेश निवासी सुनौला थाना अमापुर बदायूं, मोहित, राहुल निवाली नगला बसोला ने जान से मारने की नीयत से अपहरण कर लिया।
इस मुकदमे के बाद कोतवाल वीके सिंह यादव ने मुकदमा अपराध संख्या 108 अरविंद निवासी अमृतपुर को तमंचा समेत गिरफ्तार दिखाया और इसी दिन 25 आर्म्स एक्ट में राधेश्याम, रामहरि, मुकेश निवासी नगला बसोला को गिरफ्तार दिखाया। क्रमश: 109 से 111 अपराध संख्या तक मुकदमा दर्ज किए गए।
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इस मामले की शिकायत तत्कालीन पुलिस कप्तान अलंकृता सिंह से की गई और जेल गए लोगों के परिजनों ने शासन से मिलकर 25 जुलाई 2014 को विवेचना सीबीसीआईडी में स्थानांतरित करवाई। सीबीसीआईडी कानपुर के इंस्पेक्टर सतेंद्र कुमार मिश्रा ने मुकदमे की विवेचना की।
विवेचना के दौरान इंस्पेक्टर सीबीसीआईडी ने शासन और पुलिस कप्तान को सौंपी रिपोर्ट में इन सभी जेल गए लोगों को निर्दोष दिखाया और अपनी रिपोर्ट में विद्वेष की भावना से इन लोगों को जेल भेजना दिखाकर इनके विरुद्घ दफा 342 में मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
पुलिस कप्तान राजेश कृष्ण ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कोतवाल कायमगंज को तत्कालीन कोतवाल वीके सिंह यादव और दरोगा राजेंद्र सिंह तथा हमराह सिपाहियों के विरुद्घ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। बताया जाता है कि इंस्पेक्टर वीके सिंह सेवानिवृत्त हो गए हैं।
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एसपी ने कोतवाल समेत दरोगा और हमराह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दे दिए हैं। 26 मार्च 2014 को कोतवाली कायमगंज के नगला बसोला के रहने वाले फूल सिंह पुत्र हीरालाल ने मुकदमा अपराध संख्या 107/14 दर्ज कराया, जिसमें कहा कि उनके पुत्र चंद्रपाल को रामशंकर निवासी मुंशी नगला, अरविंद निवासी अमृतपुर, राधेश्याम निवासी नगला बसोला, रामहरि निवासी बसोला, मुकेश निवासी सुनौला थाना अमापुर बदायूं, मोहित, राहुल निवाली नगला बसोला ने जान से मारने की नीयत से अपहरण कर लिया।
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इस मुकदमे के बाद कोतवाल वीके सिंह यादव ने मुकदमा अपराध संख्या 108 अरविंद निवासी अमृतपुर को तमंचा समेत गिरफ्तार दिखाया और इसी दिन 25 आर्म्स एक्ट में राधेश्याम, रामहरि, मुकेश निवासी नगला बसोला को गिरफ्तार दिखाया। क्रमश: 109 से 111 अपराध संख्या तक मुकदमा दर्ज किए गए।
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इस मामले की शिकायत तत्कालीन पुलिस कप्तान अलंकृता सिंह से की गई और जेल गए लोगों के परिजनों ने शासन से मिलकर 25 जुलाई 2014 को विवेचना सीबीसीआईडी में स्थानांतरित करवाई। सीबीसीआईडी कानपुर के इंस्पेक्टर सतेंद्र कुमार मिश्रा ने मुकदमे की विवेचना की।
विवेचना के दौरान इंस्पेक्टर सीबीसीआईडी ने शासन और पुलिस कप्तान को सौंपी रिपोर्ट में इन सभी जेल गए लोगों को निर्दोष दिखाया और अपनी रिपोर्ट में विद्वेष की भावना से इन लोगों को जेल भेजना दिखाकर इनके विरुद्घ दफा 342 में मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
पुलिस कप्तान राजेश कृष्ण ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कोतवाल कायमगंज को तत्कालीन कोतवाल वीके सिंह यादव और दरोगा राजेंद्र सिंह तथा हमराह सिपाहियों के विरुद्घ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। बताया जाता है कि इंस्पेक्टर वीके सिंह सेवानिवृत्त हो गए हैं।