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छह साल बाद फिर शुरू होगा सेनिटरी नैपकिन उत्पादन केंद्र
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भोलेपुर स्थित सेनिटरी नैपकिन उत्पादन केंद्र का निरीक्षण करतीं सीडीओ एम. अरून्मोली। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। छह साल से बंद भोलेपुर का सेनिटरी नैपकिन उत्पादन केंद्र फिर शुरू होगा। शनिवार को मुख्य विकास अधिकारी ने इसका निरीक्षण किया। केंद्र के हॉल में कबाड़ भरा मिला, बिजली कनेक्शन भी नहीं था। सीडीओ ने केंद्र को स्वयं सहायता समूह के माध्यम से चालू कराने के निर्देश दिए हैं।
पंचायती राज विभाग से भोलेपुर में सेनिटरी नैपकिन उत्पादन केंद्र संचालित किया गया था। यह केंद्र पिछले छह वर्ष से बंद है। सीडीओ एम. अरून्मोली ने दोपहर को स्वत: रोजगार उपायुक्त योगेंद्र कुमार पाठक, एडीओ सत्यनारायण सिंह व केंद्र प्रभारी जयराम लाल के साथ निरीक्षण किया।
बताया गया कि केंद्र का चार्ज जयराम लाल के पास था। 2016-17 तक केंद्र संचालित रहा है। ऑडिट न कराए जाने से फर्म को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया। केंद्र के भूतल पर एक हॉल, दो कमरे व शौचालय बने हैं। हॉल में पंचायत विभाग के निष्प्रयोज्य कागज भरे थे। गैलरी में प्रिंटिंग प्रेस व अन्य सामान पड़ा मिला।
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एडीओ ने बताया कि पहले कागज छपाई का काम भी यहां होता था। हॉल में सेनिटरी नैपकिन बनाने की मशीनें रखी मिलीं। सीडीओ ने डीपीआरओ को बिजली कनेक्शन कराने के साथ निष्प्रयोज्य सामान हटवाने के निर्देश दिए। सीडीओ ने कहा कि दो स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्रशिक्षित कराकर उत्पादन शुरू कराया जाए।
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पंचायती राज विभाग से भोलेपुर में सेनिटरी नैपकिन उत्पादन केंद्र संचालित किया गया था। यह केंद्र पिछले छह वर्ष से बंद है। सीडीओ एम. अरून्मोली ने दोपहर को स्वत: रोजगार उपायुक्त योगेंद्र कुमार पाठक, एडीओ सत्यनारायण सिंह व केंद्र प्रभारी जयराम लाल के साथ निरीक्षण किया।
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बताया गया कि केंद्र का चार्ज जयराम लाल के पास था। 2016-17 तक केंद्र संचालित रहा है। ऑडिट न कराए जाने से फर्म को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया। केंद्र के भूतल पर एक हॉल, दो कमरे व शौचालय बने हैं। हॉल में पंचायत विभाग के निष्प्रयोज्य कागज भरे थे। गैलरी में प्रिंटिंग प्रेस व अन्य सामान पड़ा मिला।
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एडीओ ने बताया कि पहले कागज छपाई का काम भी यहां होता था। हॉल में सेनिटरी नैपकिन बनाने की मशीनें रखी मिलीं। सीडीओ ने डीपीआरओ को बिजली कनेक्शन कराने के साथ निष्प्रयोज्य सामान हटवाने के निर्देश दिए। सीडीओ ने कहा कि दो स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्रशिक्षित कराकर उत्पादन शुरू कराया जाए।