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सीईटीपी न लगना छपाई उद्योग का दुर्भाग्य
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वस्त्र छपाई कुटीर उद्योग संस्थान के अध्यक्ष चंद्रपाल वर्मा ने कहा कि कॉमन इफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) न लगना छपाई उद्योग के का दुर्भाग्य है। कहा कि देेश के कई शहरों में उद्योग चल रहे हैं, लेकिन कुछ जिम्मेदार यहां के उद्योग को बर्बाद करने में लगे हैं।
संस्थान के अध्यक्ष चंद्रपाल वर्मा मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा कि प्रदेश के कानपुर, उन्नाव, मथुरा की आबादी में उद्योग चल रहे हैं। यहां सीईटीपी लगाया गया है। इसी तरह जयपुर के सागानेर आबादी में छपाई उद्योग चल रहे हैं।
यहां से 20 किमी दूर बगरू में टेक्सटाइल पार्क बनाया गया, मगर बस्ती में उद्योगों को नहीं हटाया गया। यहां भी सकवाई में टेक्सटाइल पार्क बनाने की योजना है। उसमें सिर्फ 50 उद्योग ही लग सकेंगे।
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शेष करीब 150 छोटे उद्योग बर्बाद हो जाएंगेे। कहा कि पांच साल पहले तत्कालीन डीएम ने सीईटीपी लगवाने का प्रस्ताव मांगा, मगर कुछ लोगों के दबाव में ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सीईटीपी लगवाने का काम शुरू करे, तो कुटीर उद्योग का रूप ले चुके छपाई कारखाने चलते रहेंगे। अन्यथा लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे।
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संस्थान के अध्यक्ष चंद्रपाल वर्मा मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा कि प्रदेश के कानपुर, उन्नाव, मथुरा की आबादी में उद्योग चल रहे हैं। यहां सीईटीपी लगाया गया है। इसी तरह जयपुर के सागानेर आबादी में छपाई उद्योग चल रहे हैं।
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यहां से 20 किमी दूर बगरू में टेक्सटाइल पार्क बनाया गया, मगर बस्ती में उद्योगों को नहीं हटाया गया। यहां भी सकवाई में टेक्सटाइल पार्क बनाने की योजना है। उसमें सिर्फ 50 उद्योग ही लग सकेंगे।
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शेष करीब 150 छोटे उद्योग बर्बाद हो जाएंगेे। कहा कि पांच साल पहले तत्कालीन डीएम ने सीईटीपी लगवाने का प्रस्ताव मांगा, मगर कुछ लोगों के दबाव में ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सीईटीपी लगवाने का काम शुरू करे, तो कुटीर उद्योग का रूप ले चुके छपाई कारखाने चलते रहेंगे। अन्यथा लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे।