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Farrukhabad News: गंगा की कटान से कई परिवार बेघर
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फोटो-09, गांव पैलानी दक्षिण में कटान करती गंगा। संवाद
- कटान रोकने को नहीं बने तटबंध, हर साल उजड़ता है गांव
संवाद न्यूज एजेंसी
शमशाबाद। क्षेत्र के गांव पैलानी दक्षिण में गंगा की तेज कटान ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। नदी का जलस्तर बढ़ते ही कटान की रफ्तार इतनी तेज हो गई कि कई घर और खेत गंगा की धारा में समा गए। गांव के कई परिवार अब बेघर होकर खुले आसमान के नीचे दिन-रात गुजारने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कटान की समस्या नई नहीं है। बृहस्पतिवार को नरौरा बांध से 20 हजार क्यूसेक पानी छोड़े से गंगा का जलस्तर 135.30 मीटर बढ़ गया, जो कि सामान्य से आधा मीटर है। प्रशासन केवल औपचारिक निरीक्षण कर लौट जाता है। अबकी बार हालात और भयावह हो गए हैं। कटान से न सिर्फ मकान, बल्कि लोगों की जमीनें भी नदी में बह गई हैं।
बेघर हुए परिवार प्रशासन से मदद की आस लगाए बैठे हैं। उनका कहना है कि न तो राहत सामग्री मिली है और न ही कटान रोकने के लिए तटबंध बनाए गए हैं। ग्राम प्रधान जुबेर खान ने बताया कि गंगा के कटान से गांव में दहशत का माहौल बना हुआ है। लोग अपने घरों का सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों की तलाश में हैं। यदि जल्द ही रोकथाम नहीं की गई तो पूरा गांव गंगा में समा सकता है।
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- कटान रोकने को नहीं बने तटबंध, हर साल उजड़ता है गांव
संवाद न्यूज एजेंसी
शमशाबाद। क्षेत्र के गांव पैलानी दक्षिण में गंगा की तेज कटान ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। नदी का जलस्तर बढ़ते ही कटान की रफ्तार इतनी तेज हो गई कि कई घर और खेत गंगा की धारा में समा गए। गांव के कई परिवार अब बेघर होकर खुले आसमान के नीचे दिन-रात गुजारने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कटान की समस्या नई नहीं है। बृहस्पतिवार को नरौरा बांध से 20 हजार क्यूसेक पानी छोड़े से गंगा का जलस्तर 135.30 मीटर बढ़ गया, जो कि सामान्य से आधा मीटर है। प्रशासन केवल औपचारिक निरीक्षण कर लौट जाता है। अबकी बार हालात और भयावह हो गए हैं। कटान से न सिर्फ मकान, बल्कि लोगों की जमीनें भी नदी में बह गई हैं।
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बेघर हुए परिवार प्रशासन से मदद की आस लगाए बैठे हैं। उनका कहना है कि न तो राहत सामग्री मिली है और न ही कटान रोकने के लिए तटबंध बनाए गए हैं। ग्राम प्रधान जुबेर खान ने बताया कि गंगा के कटान से गांव में दहशत का माहौल बना हुआ है। लोग अपने घरों का सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों की तलाश में हैं। यदि जल्द ही रोकथाम नहीं की गई तो पूरा गांव गंगा में समा सकता है।
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