{"_id":"631641ad9b5cea47816ed069","slug":"life-imprisonment-for-two-youths-for-killing-a-friend-farrukhabad-news-knp716578418","type":"story","status":"publish","title_hn":"दोस्त की हत्या में दो युवकों को आजीवन कारावास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दोस्त की हत्या में दो युवकों को आजीवन कारावास
विज्ञापन
फर्रुखाबाद। अपर जिला जज प्रथम विष्णु चंद्र वैश्य ने 22 साल पूर्व चाकू से गोद कर दोस्त की हत्या करने वाले दो युवकों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। 50-50 हजार रुपये जुर्माना किया है।
कायमगंज कोतवाली क्षेत्र के गांव मंसूर नगर निवासी राजबहादुर (15) पुत्र बाबूराम साल 2000 में कक्षा नौ में पढ़ता था। उसकी गांव के धर्मवीर व संतोष उर्फ ठाकुर से दोस्ती थी।
बाबूराम ने बताया कि सात अगस्त 2000 को वह अन्य लोगों के साथ बैठक में बैठे थे। शाम करीब चार बजे धर्मवीर और संतोष वहां पहुंचे और राजबहादुर को गन्ना खिलाने की बात कहकर अपने साथ ले गए। इसके बाद से उसका कोई पता नहीं चला।
विज्ञापन
एक दिन उसनेे परिवार के अन्य लोगों के सहयोग से धर्मवीर को उसके घर से पकड़ लिया और पूछताछ की। उसने बताया कि कुछ दिन पूर्व राजबहादुर ने उसकी बहन से अभद्रता की थी। इसी रंजिश में फुफेरे भाई संतोष उर्फ ठाकुर के साथ मिलकर राजबहादुर की गन्ने के खेत में चाकू से गोद कर हत्या कर दी। धर्मवीर की निशानदेही पर परिजनों को गांव के लल्ला रस्तोगी के गन्ने के खेत में राजबहादुर का शव पड़ा मिला।
पिता ने पुत्र के दोनों दोस्तों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने जांच कर कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता शिव नरेश सिंह, अनिल कुमार बाजपेई, दीपिका कटियार ने दलीलें पेश कीं। सुनवाई पूरी होने पर तीन सितंबर को न्यायाधीश ने दोस्त की हत्या में संतोष उर्फ ठाकुर व धर्मवीर को दोषी करार दिया था। सोमवार को न्यायाधीश ने दोनों को सजा और जुर्माने से दंडित किया।
विज्ञापन
कायमगंज कोतवाली क्षेत्र के गांव मंसूर नगर निवासी राजबहादुर (15) पुत्र बाबूराम साल 2000 में कक्षा नौ में पढ़ता था। उसकी गांव के धर्मवीर व संतोष उर्फ ठाकुर से दोस्ती थी।
विज्ञापन
बाबूराम ने बताया कि सात अगस्त 2000 को वह अन्य लोगों के साथ बैठक में बैठे थे। शाम करीब चार बजे धर्मवीर और संतोष वहां पहुंचे और राजबहादुर को गन्ना खिलाने की बात कहकर अपने साथ ले गए। इसके बाद से उसका कोई पता नहीं चला।
विज्ञापन
एक दिन उसनेे परिवार के अन्य लोगों के सहयोग से धर्मवीर को उसके घर से पकड़ लिया और पूछताछ की। उसने बताया कि कुछ दिन पूर्व राजबहादुर ने उसकी बहन से अभद्रता की थी। इसी रंजिश में फुफेरे भाई संतोष उर्फ ठाकुर के साथ मिलकर राजबहादुर की गन्ने के खेत में चाकू से गोद कर हत्या कर दी। धर्मवीर की निशानदेही पर परिजनों को गांव के लल्ला रस्तोगी के गन्ने के खेत में राजबहादुर का शव पड़ा मिला।
पिता ने पुत्र के दोनों दोस्तों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने जांच कर कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता शिव नरेश सिंह, अनिल कुमार बाजपेई, दीपिका कटियार ने दलीलें पेश कीं। सुनवाई पूरी होने पर तीन सितंबर को न्यायाधीश ने दोस्त की हत्या में संतोष उर्फ ठाकुर व धर्मवीर को दोषी करार दिया था। सोमवार को न्यायाधीश ने दोनों को सजा और जुर्माने से दंडित किया।