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दो बर्खास्त लिपिकों के मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर जांच शुरू
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संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद। पुलिस महकमे के दो बर्खास्त लिपिकों के मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर फिर से जांच शुुरू कर दी गई है। एसपी के आदेश पर सीओ मोहम्मदाबाद को जांच दी गई है। दोनों लिपिकों को 14 वर्ष पहले मृतक आश्रित में फर्जी दस्तावेज से भर्ती होने पर पुलिस मुख्यालय से बर्खास्त किया गया था। सीओ ने बयान के लिए तत्कालीन लिपिकों को तलब किया है।
जनपद मैनपुरी निवासी राजीव सिंह वर्ष 1998 व मुनेंद्र कुुमार वर्ष 2000 में पुलिस विभाग में मृतक आश्रित कोटे से भर्ती हुुए थे। दोनों लिपिक वर्ष 2006 में फर्रुखाबाद जनपद में तैनात थे। पुलिस मुख्यालय इलाहाबाद से दोनों लिपिकों के प्रपत्रों की जांच कराई गई। इसमें मामला फर्जी पाए जाने के बाद दोनों लिपिकों को बर्खास्त कर दिया गया था। दोनों लिपिकों ने हाईकोर्ट में अपील की थी। लिपिकों की ओर से वकील ने दलील दी कि दोनों सीधी भर्ती में परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद विभाग में भर्ती हुए थे। 14 वर्ष सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग को दोनों लिपिकों की निलंबन में आमद कराने के बाद एक बार फिर से पूरे मामले में जांच करने के आदेश दिए हैं। शासन से इस संबंध में एसपी अशोक कुमार मीणा को पत्र भेजा गया है।
एसपी ने इस मामले में सीओ मोहम्मदाबाद सोहराब आलम को जांच करने के आदेश दिए हैं। दोनों लिपिकों की निलंबन में आमद कर ली गई है। सीओ मोहम्मदाबाद ने बयान के लिए तत्कालीन वरिष्ठ लिपिक राजेंद्र चौहान, देवेंद्र शर्मा, दिलीप बाबू, अरविंद त्यागी को तलब किया है। पुलिस मुख्यालय से सूचना मांगी गई है कि वर्ष 1998 व 2000 में सीधी भर्ती कब निकाली गई थी। सीओ ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।
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फर्रुखाबाद। पुलिस महकमे के दो बर्खास्त लिपिकों के मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर फिर से जांच शुुरू कर दी गई है। एसपी के आदेश पर सीओ मोहम्मदाबाद को जांच दी गई है। दोनों लिपिकों को 14 वर्ष पहले मृतक आश्रित में फर्जी दस्तावेज से भर्ती होने पर पुलिस मुख्यालय से बर्खास्त किया गया था। सीओ ने बयान के लिए तत्कालीन लिपिकों को तलब किया है।
जनपद मैनपुरी निवासी राजीव सिंह वर्ष 1998 व मुनेंद्र कुुमार वर्ष 2000 में पुलिस विभाग में मृतक आश्रित कोटे से भर्ती हुुए थे। दोनों लिपिक वर्ष 2006 में फर्रुखाबाद जनपद में तैनात थे। पुलिस मुख्यालय इलाहाबाद से दोनों लिपिकों के प्रपत्रों की जांच कराई गई। इसमें मामला फर्जी पाए जाने के बाद दोनों लिपिकों को बर्खास्त कर दिया गया था। दोनों लिपिकों ने हाईकोर्ट में अपील की थी। लिपिकों की ओर से वकील ने दलील दी कि दोनों सीधी भर्ती में परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद विभाग में भर्ती हुए थे। 14 वर्ष सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग को दोनों लिपिकों की निलंबन में आमद कराने के बाद एक बार फिर से पूरे मामले में जांच करने के आदेश दिए हैं। शासन से इस संबंध में एसपी अशोक कुमार मीणा को पत्र भेजा गया है।
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एसपी ने इस मामले में सीओ मोहम्मदाबाद सोहराब आलम को जांच करने के आदेश दिए हैं। दोनों लिपिकों की निलंबन में आमद कर ली गई है। सीओ मोहम्मदाबाद ने बयान के लिए तत्कालीन वरिष्ठ लिपिक राजेंद्र चौहान, देवेंद्र शर्मा, दिलीप बाबू, अरविंद त्यागी को तलब किया है। पुलिस मुख्यालय से सूचना मांगी गई है कि वर्ष 1998 व 2000 में सीधी भर्ती कब निकाली गई थी। सीओ ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।
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