{"_id":"6266e1245ea56b2039798287","slug":"investigation-of-payment-of-crores-started-farrukhabad-news-knp693271953","type":"story","status":"publish","title_hn":"लेखाकार को बिना बताए करोड़ों के भुगतान की जांच शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लेखाकार को बिना बताए करोड़ों के भुगतान की जांच शुरू
विज्ञापन
नलकूप विभाग में जांच करती शासन से आई टीम। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। राजकीय नलकूप विभाग में लेखाकार के हस्ताक्षर बिना करोड़ों के भुगतान की जांच शुरू हो गई है। सोमवार को शासन से आई अधिकारियों की टीम ने टेंडर, वर्क आर्डर, कैशबुक व भुगतान की पत्रावली तलब कीं।
राजकीय नलकूप विभाग में वित्तीय वर्ष के अंतिम दौर में बजट खर्च करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से नियुक्त लेखाकार से बिल वाउचर भी चेक नहीं कराए गए। लेखाकार से बिना हस्ताक्षर कराए ही अधिशासी अभियंता के हस्ताक्षर से करोड़ों का भुगतान कर दिया गया। इस मामले से जुड़ी खबर अमर उजाला ने 30 मार्च के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित की थी। मामले को शासन व प्रशासन ने संज्ञान लिया। इधर, सीडीओ ने जिला विकास अधिकारी को जांच सौंपी है। शासन से भी वित्त नियंत्रक ने चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी।
शासन की जांच कमेटी सोमवार को नलकूप विभाग पहुंची। अधिशासी अभियंता के कैंप कार्यालय में कमेटी के तीन अधिकारियों ने भुगतान संबंधी पत्रावली तलब कर जांच शुरू की। कैशियर मनोज कुमार का कहना है कि मार्च में एक करोड़ 70 लाख का भुगतान किया है। पूरे वर्ष में और भी भुगतान किए गए। जांच कर रहे अधिकारियों से पूछने पर उन्होंने अपने नाम बताने से इनकार कर दिया। इतना जरूर कहा कि भुगतान के बिल वाउचरों पर लेखाकार के हस्ताक्षर होने चाहिए। वह पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट वित्त नियंत्रक को सौंपेंगे। बिल वाउचर व भुगतान रजिस्टर पर कई जगह लेखाकार के हस्ताक्षर न होने पर जांच अधिकारियों ने लेखाकार अंबरीश यादव से भी पूछताछ की। बुधवार तक टीम विभागीय रिकार्ड खंगालकर जांच करेगी।
विज्ञापन
शासनादेश देने से रोका
नलकूप विभाग के अधिशासी अभियंता अनिल सिंह अपने कैंप कार्यालय में जांच अधिकारियों के साथ बैठे थे। जांच कमेटी के अधिकारियों के बारे में पूछने पर कहा कि विभागीय मामला है। इसे खोलने करने की क्या जरूरत है। अब मेरी जांच तो हो रही है। जांच अधिकारियों ने जब कैशियर मनोज कुमार से शासन का आदेश उपलब्ध कराने के लिए कहा तो अधिशासी अभियंता ने रोक दिया। कहा कि ऐसे तो शासन से कोई भी पत्र आएगा तो मीडिया को देना पड़ेगा। शासन का जांच आदेश गोपनीय है। जांच पूरी होने के बाद तो पता चल ही जाएगा।
विज्ञापन
राजकीय नलकूप विभाग में वित्तीय वर्ष के अंतिम दौर में बजट खर्च करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से नियुक्त लेखाकार से बिल वाउचर भी चेक नहीं कराए गए। लेखाकार से बिना हस्ताक्षर कराए ही अधिशासी अभियंता के हस्ताक्षर से करोड़ों का भुगतान कर दिया गया। इस मामले से जुड़ी खबर अमर उजाला ने 30 मार्च के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित की थी। मामले को शासन व प्रशासन ने संज्ञान लिया। इधर, सीडीओ ने जिला विकास अधिकारी को जांच सौंपी है। शासन से भी वित्त नियंत्रक ने चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी।
विज्ञापन
शासन की जांच कमेटी सोमवार को नलकूप विभाग पहुंची। अधिशासी अभियंता के कैंप कार्यालय में कमेटी के तीन अधिकारियों ने भुगतान संबंधी पत्रावली तलब कर जांच शुरू की। कैशियर मनोज कुमार का कहना है कि मार्च में एक करोड़ 70 लाख का भुगतान किया है। पूरे वर्ष में और भी भुगतान किए गए। जांच कर रहे अधिकारियों से पूछने पर उन्होंने अपने नाम बताने से इनकार कर दिया। इतना जरूर कहा कि भुगतान के बिल वाउचरों पर लेखाकार के हस्ताक्षर होने चाहिए। वह पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट वित्त नियंत्रक को सौंपेंगे। बिल वाउचर व भुगतान रजिस्टर पर कई जगह लेखाकार के हस्ताक्षर न होने पर जांच अधिकारियों ने लेखाकार अंबरीश यादव से भी पूछताछ की। बुधवार तक टीम विभागीय रिकार्ड खंगालकर जांच करेगी।
विज्ञापन
शासनादेश देने से रोका
नलकूप विभाग के अधिशासी अभियंता अनिल सिंह अपने कैंप कार्यालय में जांच अधिकारियों के साथ बैठे थे। जांच कमेटी के अधिकारियों के बारे में पूछने पर कहा कि विभागीय मामला है। इसे खोलने करने की क्या जरूरत है। अब मेरी जांच तो हो रही है। जांच अधिकारियों ने जब कैशियर मनोज कुमार से शासन का आदेश उपलब्ध कराने के लिए कहा तो अधिशासी अभियंता ने रोक दिया। कहा कि ऐसे तो शासन से कोई भी पत्र आएगा तो मीडिया को देना पड़ेगा। शासन का जांच आदेश गोपनीय है। जांच पूरी होने के बाद तो पता चल ही जाएगा।

30 मार्च को प्रकाशित खबर। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD