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टीका लगने के बाद शिशु की मौत, पोस्टमार्टम कराया गया
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रोते बिलखते परिजन। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : FARRUKHABAD
मिशन इंद्रधनुष के अंतर्गत बीमारियों से सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान का शुक्रवार को गांव के लोगों ने विरोध किया था।
तहसीलदार ने परिजनों को समझाकर बच्चों को टीके लगवा दिए थे। इसके बाद देर रात दो माह के शिशु की मौत हो गई। शनिवार को परिजनों की तहरीर पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। ग्रामीणों ने शिशु का वजन कराए बिना अधिक डोज देने का आरोप लगाया।
क्षेत्र के गांव बझेरा मलिकपट्टी में शुक्रवार को दो बजे एएनएम अनीता, आशा अरुणा देवी के साथ चार लोगों की टीकाकरण टीम गांव पहुंची थी। कई बच्चों के परिजनों ने टीकाकरण का विरोध किया।
एएनएम अनीता ने लेखपाल रघुवंश प्रताप को सूचना दी। इसके बाद तहसीलदार राजू सिंह गांव में पहुंचे। उन्होंने बच्चों के परिजनों को समझाकर टीके लगवाए।
करीब तीन बजे ब्रह्मपाल के दो माह के पुत्र हिमांशु को भी तीन टीके लगाए गए। इसके एक घंटे बाद हिमांशु की तबियत बिगड़ने लगी। शाम छह बजे उसकी नाक के खून आने लगा।
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देर रात करीब 11.30 बजे हिमांशु की मौत हो गई। हिमांशु की मां कमलेशा देवी ने पति ब्रह्मपाल को बेटे की मौत की सूचना दी। ब्रह्मपाल कायमगंज के एक ईंट भट्ठे पर मजदूरी करते हैं। वह वहां से रात दो बजे घर पहुंचे।
शनिवार सुबह ग्रामीणों ने मामले की सूचना पुलिस व लेखपाल को दी। खुदागंज चौकी प्रभारी उदयवीर सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने पूछताछ के बाद शव पोस्टमार्टम को भेजा।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य कर्मियों ने शिशु का वजन किए बिना ही अधिक डोज के टीके लगा दिए। शिशु हिमांशु के भाई दीपांशु (12), अजीत (6) व दो बहनें रोहली(11) व गुड़िया (8) हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह स्पष्ट न होने पर विसरा सुरक्षित किया गया है। 12 घंटे पहले मौत होने की पुष्टि की गई है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कमालगंज के प्रभारी डॉ. सोमेश अग्निहोत्री ने बताया कि हिमांशु को पोलियो व अन्य रोगों से बचाव के लिए आईटीबी, फेफड़े़ आदि की बीमारियों से बचाव को न्यूमोकोकल (टीसीबी) तथा खसरा व अन्य बीमारियों से सुरक्षित करने को पेंटावैलेट का टीका लगाया गया था। गांव में कुल सात बच्चों को टीके लगाए गए। बाकी बच्चे सही हैं।
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तहसीलदार ने परिजनों को समझाकर बच्चों को टीके लगवा दिए थे। इसके बाद देर रात दो माह के शिशु की मौत हो गई। शनिवार को परिजनों की तहरीर पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। ग्रामीणों ने शिशु का वजन कराए बिना अधिक डोज देने का आरोप लगाया।
क्षेत्र के गांव बझेरा मलिकपट्टी में शुक्रवार को दो बजे एएनएम अनीता, आशा अरुणा देवी के साथ चार लोगों की टीकाकरण टीम गांव पहुंची थी। कई बच्चों के परिजनों ने टीकाकरण का विरोध किया।
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एएनएम अनीता ने लेखपाल रघुवंश प्रताप को सूचना दी। इसके बाद तहसीलदार राजू सिंह गांव में पहुंचे। उन्होंने बच्चों के परिजनों को समझाकर टीके लगवाए।
करीब तीन बजे ब्रह्मपाल के दो माह के पुत्र हिमांशु को भी तीन टीके लगाए गए। इसके एक घंटे बाद हिमांशु की तबियत बिगड़ने लगी। शाम छह बजे उसकी नाक के खून आने लगा।
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देर रात करीब 11.30 बजे हिमांशु की मौत हो गई। हिमांशु की मां कमलेशा देवी ने पति ब्रह्मपाल को बेटे की मौत की सूचना दी। ब्रह्मपाल कायमगंज के एक ईंट भट्ठे पर मजदूरी करते हैं। वह वहां से रात दो बजे घर पहुंचे।
शनिवार सुबह ग्रामीणों ने मामले की सूचना पुलिस व लेखपाल को दी। खुदागंज चौकी प्रभारी उदयवीर सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने पूछताछ के बाद शव पोस्टमार्टम को भेजा।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य कर्मियों ने शिशु का वजन किए बिना ही अधिक डोज के टीके लगा दिए। शिशु हिमांशु के भाई दीपांशु (12), अजीत (6) व दो बहनें रोहली(11) व गुड़िया (8) हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह स्पष्ट न होने पर विसरा सुरक्षित किया गया है। 12 घंटे पहले मौत होने की पुष्टि की गई है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कमालगंज के प्रभारी डॉ. सोमेश अग्निहोत्री ने बताया कि हिमांशु को पोलियो व अन्य रोगों से बचाव के लिए आईटीबी, फेफड़े़ आदि की बीमारियों से बचाव को न्यूमोकोकल (टीसीबी) तथा खसरा व अन्य बीमारियों से सुरक्षित करने को पेंटावैलेट का टीका लगाया गया था। गांव में कुल सात बच्चों को टीके लगाए गए। बाकी बच्चे सही हैं।