{"_id":"dbde95bb37ff111c777ea8a6aad0a07b","slug":"indian-national-army-soldier-was-number-7863-claims-plane-crash-shigufa-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आजाद हिंद फौज के सिपाही नंबर 7863 का दावा-विमान क्रैश था शिगूफा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आजाद हिंद फौज के सिपाही नंबर 7863 का दावा-विमान क्रैश था शिगूफा
ब्यूरो/ अमर उजाला, फर्रुखाबाद
Updated Sat, 19 Sep 2015 11:08 PM IST
विज्ञापन
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 64 फाइलों को सार्वजनिक करने
विज्ञापन
के बाद नेताजी सुभाषचंद्र की मौत पर एक बार फिर सियासत गर्माने लगी है। इन
सबकेे बीच आजाद हिंद फौज के सिपाही नंबर 7863 का दावा चौंकाने वाला है। 95
साल के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देव सिंह का दावा है कि नेताजी की विमान
क्रैश में मौत महज एक शिफूगा थी। यह शिगूफा अंग्रेजों
को गुमराह करने के लिए छोड़ा गया था। नेताजी खास मिशन पर अर्जेंटीना निकल गए थे। वह गुमनामी बाबा को नेताजी मानने से इन्कार करते हैं। आजाद हिंद फौज में सिपाही रहे देव सिंह मोहम्मदाबाद इलाके के ईसेपुर में रहते हैं। फौज में इनका पहचान नंबर 7863 था। 1942 से 1945 तक इन्होंने सिंगापुर में लड़ाई लड़ी। नेताजी की मौत पर सियासी गर्माहट के बीच
इन्होंनेे अमर उजाला को बताया कि नेताजी की मौत विमान हादसे में नहीं हुई थी। अंग्रेजों को गुमराह के करने के लिए फौज ने ही ये अफवाह फैलाई थी। फौज के कमांडरों से सिपाहियों को ऐसे ही फरमान मिले थे। नेताजी हबीबुर्रहमान के साथ खास मिशन पर अर्जेंटीना निकल गए थे। देव सिंह इस मिशन के बारे में नहीं बता पाते हैं । वह बताते हैं कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस
की अंग्रेज तलाश कर रहे थे। ऐसे में उनके मिशन को पूरा करने के लिए अंग्रेजों का मतिभ्रम जरूरी था। अंग्रेजों के पूछने पर फौज के सिपाही विमान क्रैश में ही उनकी मौत की जानकारी देते थे। इसका फायदा भी हुआ। धीरे-धीरे अंग्रेज इसे सच मानने
लगे थे। देव सिंह कहते हैं कि लड़ाई के दौरान वह चार साल में सिंगापुर में दो बार गिरफ्तार किए गए थे। गिरफ्तारी के बाद अंग्रेजों का उत्पीड़न भी उन्हें नहीं डिगा पाया। इसकी वजह नेताजी के जोशीले भाषण थे। वे कहते हैं कि सिंगापुर से लौटने के बाद नेताजी से मुलाकात नहीं हुई। सिंगापुर में उनके करीब रहा। यह कहते हैं कि गुमनामी बाबा नेताजी नहीं हो सकते ।
को गुमराह करने के लिए छोड़ा गया था। नेताजी खास मिशन पर अर्जेंटीना निकल गए थे। वह गुमनामी बाबा को नेताजी मानने से इन्कार करते हैं। आजाद हिंद फौज में सिपाही रहे देव सिंह मोहम्मदाबाद इलाके के ईसेपुर में रहते हैं। फौज में इनका पहचान नंबर 7863 था। 1942 से 1945 तक इन्होंने सिंगापुर में लड़ाई लड़ी। नेताजी की मौत पर सियासी गर्माहट के बीच
इन्होंनेे अमर उजाला को बताया कि नेताजी की मौत विमान हादसे में नहीं हुई थी। अंग्रेजों को गुमराह के करने के लिए फौज ने ही ये अफवाह फैलाई थी। फौज के कमांडरों से सिपाहियों को ऐसे ही फरमान मिले थे। नेताजी हबीबुर्रहमान के साथ खास मिशन पर अर्जेंटीना निकल गए थे। देव सिंह इस मिशन के बारे में नहीं बता पाते हैं । वह बताते हैं कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस
की अंग्रेज तलाश कर रहे थे। ऐसे में उनके मिशन को पूरा करने के लिए अंग्रेजों का मतिभ्रम जरूरी था। अंग्रेजों के पूछने पर फौज के सिपाही विमान क्रैश में ही उनकी मौत की जानकारी देते थे। इसका फायदा भी हुआ। धीरे-धीरे अंग्रेज इसे सच मानने
लगे थे। देव सिंह कहते हैं कि लड़ाई के दौरान वह चार साल में सिंगापुर में दो बार गिरफ्तार किए गए थे। गिरफ्तारी के बाद अंग्रेजों का उत्पीड़न भी उन्हें नहीं डिगा पाया। इसकी वजह नेताजी के जोशीले भाषण थे। वे कहते हैं कि सिंगापुर से लौटने के बाद नेताजी से मुलाकात नहीं हुई। सिंगापुर में उनके करीब रहा। यह कहते हैं कि गुमनामी बाबा नेताजी नहीं हो सकते ।