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पाटिलपुत्र, उत्सर्ग एक्सप्रेस समेत चार ट्रेने रोकी
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र्रुखाबाद रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के इंतजार में बैठे यात्री। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। कमालगंज के पास ट्रेन दुर्घटना के बाद दो एक्सप्रेस समेत चार ट्रेनों को तीन स्टेशनों पर रोकना पड़ा। इससे दूरदराज जाने वाले यात्री परेशान रहे। ट्रैक चालू होने के बाद गाड़ियों को रवाना किया गया।
कासगंज से अनवरगंज जा रही एक्सप्रेस ट्रेन को एक घंटे फर्रुखाबाद स्टेशन और बाद में 30 मिनट फतेहगढ़ पर रोका गया।
पाटिलपुत्र से उदयपुर जा रही पाटिलपुत्र एक्सप्रेस शाम सवा चार बजे के बजाय तीन घंटे देरी से पहुंची। इसी तरह छपरा से फर्रुखाबाद आ रही उत्सर्ग एक्सप्रेस को कन्नौज स्टेशन पर दो घंटे रोकना पड़ा।
इसके अलावा अनवरगंज से कासगंज जा रही पैसेंजर ट्रेन को कन्नौज में रोकना पड़ा। इससे फतेहगढ़, फर्रुखाबाद, कायमगंज, कासगंज तक यात्री परेशान रहे।
कमालगंज। कन्नौज के जैतपुर ठठिया निवासी शकुंतला ने बताया कि तीन-चार बार खटर-खटर की आवाज के बाद जोर के झटके के साथ ट्रेन रुक गई। इससे उनके डिब्बे में चीख-पुकार मच गई।
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कुछ लोगों ने नीचे उतारकर देखा तो पता चला कि आगे वाले डिब्बे के पहिये पटरी से उतर गए हैं।
हरसिंहपुर, फर्रुखाबाद से बहन के यहां से वापस मसवानपुर, कानपुर जा रहीं अवंतिका ने कहा कि उनके डिब्बे में भी सभी लोग किसी अनहोनी की आशंका में घबरा कर नीचे उतरने लगे। कई परिवार भाईदूज मनाकर वापस जा रहे थे।
घटना के बाद बहुत से यात्री ट्रेन से उतरकर दूसरे साधनों से जाते रहे। वाहन में जगह न मिलने पर कुछ लोग लटक कर भी गए।
कन्नौज के सराय दौलत में कार्यरत महिला स्वास्थ्यकर्मी ने बताया कि उन्हें एक घंटे से दूसरी सवारी नहीं मिली। मीना देवी ने अपने परिवार के लोगों को धूप से बचाने के लिए रेल लाइन के किनारे रेलिंग के सहारे चादर तान लिया।
कुछ लोग ट्रेन में ही बैठकर लाइन सही होने का इंतजार करते रहे। कई आगे जाने के बजाय वापस चले गए।
इंजन गुजरते ही मरम्मत वाले स्थान पर चार फिट पटरी अलग हो गई। पटरी के दोनों ओर जोड़ के लिए जो प्लेट कसी गई थी, वह भी अलग हो गई।
स्लीपर से पटरी के कसाव के लिए लाइनर व पैंडोल भी नहीं लगे थे। सबसे पहले टीआई इजरायल टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
उन्होंने एडीआरएम व अन्य अधिकारियों को घटना से जुड़े तथ्यों व रेल मार्ग चालू करने की प्रगति की जानकारी दी।
सहायक मंडलीय इलेक्ट्रिक इंजीनियर जितेंद्र के पहुंचने पर काम तेज हुआ। ट्रैक ठीक होने के बाद रवाना की गई ट्रेन की गति 40 किलोमीटर से अधिक न रखने के निर्देश चालक को दिए गए।
उस समय केवल पांच प्रतिशत यात्री ही रह गए।
घटनास्थल पर रेलवे के तीन कर्मचारी मरम्मत कार्य में लगे थे। इनमें सीनियर सेक्शन इंजीनियर शैलेंद्र, कासगंज के वेल्डर रामकल्याण मीना व फतेहगढ़ के वेल्डर जितेंद्र थे। इनके अलावा मरम्मत करने वाली टीम में छह निजी कर्मचारी भी थे।
10.40 बजे पटरी से उतरे पहिये
11.10 बजे रेलवे टीआई टीम के साथ पहुंचे
11.30 बजे सहायक मंडलीय इलेक्ट्रिक इंजीनियर पहुंचे
12.10 बजे पहुंचे एडीएम, एएसपी, एसडीएम
12.58 बजे पटरी पर रखे गए बोरी के पहिये
1.15 बजे टूटी पटरी जोड़ने का कार्य शुरू हुआ
2.00 बजे ट्रेन कानपुर के लिए रवाना हुई
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कासगंज से अनवरगंज जा रही एक्सप्रेस ट्रेन को एक घंटे फर्रुखाबाद स्टेशन और बाद में 30 मिनट फतेहगढ़ पर रोका गया।
पाटिलपुत्र से उदयपुर जा रही पाटिलपुत्र एक्सप्रेस शाम सवा चार बजे के बजाय तीन घंटे देरी से पहुंची। इसी तरह छपरा से फर्रुखाबाद आ रही उत्सर्ग एक्सप्रेस को कन्नौज स्टेशन पर दो घंटे रोकना पड़ा।
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इसके अलावा अनवरगंज से कासगंज जा रही पैसेंजर ट्रेन को कन्नौज में रोकना पड़ा। इससे फतेहगढ़, फर्रुखाबाद, कायमगंज, कासगंज तक यात्री परेशान रहे।
कमालगंज। कन्नौज के जैतपुर ठठिया निवासी शकुंतला ने बताया कि तीन-चार बार खटर-खटर की आवाज के बाद जोर के झटके के साथ ट्रेन रुक गई। इससे उनके डिब्बे में चीख-पुकार मच गई।
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कुछ लोगों ने नीचे उतारकर देखा तो पता चला कि आगे वाले डिब्बे के पहिये पटरी से उतर गए हैं।
हरसिंहपुर, फर्रुखाबाद से बहन के यहां से वापस मसवानपुर, कानपुर जा रहीं अवंतिका ने कहा कि उनके डिब्बे में भी सभी लोग किसी अनहोनी की आशंका में घबरा कर नीचे उतरने लगे। कई परिवार भाईदूज मनाकर वापस जा रहे थे।
घटना के बाद बहुत से यात्री ट्रेन से उतरकर दूसरे साधनों से जाते रहे। वाहन में जगह न मिलने पर कुछ लोग लटक कर भी गए।
कन्नौज के सराय दौलत में कार्यरत महिला स्वास्थ्यकर्मी ने बताया कि उन्हें एक घंटे से दूसरी सवारी नहीं मिली। मीना देवी ने अपने परिवार के लोगों को धूप से बचाने के लिए रेल लाइन के किनारे रेलिंग के सहारे चादर तान लिया।
कुछ लोग ट्रेन में ही बैठकर लाइन सही होने का इंतजार करते रहे। कई आगे जाने के बजाय वापस चले गए।
इंजन गुजरते ही मरम्मत वाले स्थान पर चार फिट पटरी अलग हो गई। पटरी के दोनों ओर जोड़ के लिए जो प्लेट कसी गई थी, वह भी अलग हो गई।
स्लीपर से पटरी के कसाव के लिए लाइनर व पैंडोल भी नहीं लगे थे। सबसे पहले टीआई इजरायल टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
उन्होंने एडीआरएम व अन्य अधिकारियों को घटना से जुड़े तथ्यों व रेल मार्ग चालू करने की प्रगति की जानकारी दी।
सहायक मंडलीय इलेक्ट्रिक इंजीनियर जितेंद्र के पहुंचने पर काम तेज हुआ। ट्रैक ठीक होने के बाद रवाना की गई ट्रेन की गति 40 किलोमीटर से अधिक न रखने के निर्देश चालक को दिए गए।
उस समय केवल पांच प्रतिशत यात्री ही रह गए।
घटनास्थल पर रेलवे के तीन कर्मचारी मरम्मत कार्य में लगे थे। इनमें सीनियर सेक्शन इंजीनियर शैलेंद्र, कासगंज के वेल्डर रामकल्याण मीना व फतेहगढ़ के वेल्डर जितेंद्र थे। इनके अलावा मरम्मत करने वाली टीम में छह निजी कर्मचारी भी थे।
10.40 बजे पटरी से उतरे पहिये
11.10 बजे रेलवे टीआई टीम के साथ पहुंचे
11.30 बजे सहायक मंडलीय इलेक्ट्रिक इंजीनियर पहुंचे
12.10 बजे पहुंचे एडीएम, एएसपी, एसडीएम
12.58 बजे पटरी पर रखे गए बोरी के पहिये
1.15 बजे टूटी पटरी जोड़ने का कार्य शुरू हुआ
2.00 बजे ट्रेन कानपुर के लिए रवाना हुई