फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Farrukhabad News ›   For the last five years, the little ones have been learning kakhara in the open.

Farrukhabad News: पांच वर्षों से खुले में ककहरा सीख रहे नौनिहाल

Fri, 07 Jul 2023 12:24 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 07 Jul 2023 12:24 AM IST
विज्ञापन
For the last five years, the little ones have been learning kakhara in the open.
अमृतपुर। गंगा में आई बाढ़ से ब्लॉक क्षेत्र के तीन विद्यालयों के भवन बह गए थे। अब हालात यह है कि बच्चों को पेड़ के नीचे खुले आसमान और टीन की छांव में पढ़ना पड़ रहा है। बरसात और आंधी के दौरान बच्चों की छुट्टी कर दी जाती है। गंगा के किनारे कटरी क्षेत्र में होने के कारण अधिकारियों को भी इन भवनों से ज्यादा लेना-देना नहीं है। शासन ने भवन निर्माण के लिए धनराशि मंजूर की तो लेखपाल और प्रधान के बीच खींचतान के कारण जमीन आंवटित नहीं हो सकी। इन सबका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। पांच वर्षों से दुर्दशा का शिकार हो रहे बच्चों को देखने वाला कोई नहीं है।
विज्ञापन

वर्ष 2018 में गंगा में आई बाढ़ से तीसराम की मडैया गांव के प्राथमिक विद्यालय का भवन उसमें समा गया था। बाढ़ का पानी घटा तो बच्चों को कभी पेड़ के नीचे तो कभी किसी ग्रामीण के चबूतरे पर बैठकर पढ़ना पड़ता था। उस समय विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या 50 से अधिक थी। स्कूल भवन ने होने के कारण अब यह संख्या घटकर 36 रह गई है। अधिकारियों की लिखा-पढ़ी के बाद शासन की ओर से भवन बनाने के लिए बजट मिल गया। कार्यदायी संस्था को भवन निर्माण कराने के लिए टेंडर भी दे दिया गया। लेकिन अभी तक मात्र नींव ही भर पाई है। यह तय है कि इस बरसात में भी बच्चों को घर बैठना पड़ेगा। जिस दिन मौसम खुलेगा और बाढ़ का पानी उतरेगा तभी बच्चे स्कूल के नाम पर बने परिसर में पढ़ सकेगें। पूर्व माध्यमिक विद्यालय सुंदरपुर का भवन भी वर्ष 2013 में आई बाढ़ में बह गया था। इस विद्यालय के शिक्षक व बच्चे प्राथमिक विद्यालय के भवन में बैठ कर पढ़ाई कर रहे हैं। विद्यालय में दो शिक्षक 50 बच्चों को शिक्षा दे रहें हैं। इस भवन के लिए शासन ने धनराशि आवंटित कर दी थी। प्राथमिक विद्यालय दुर्गूपुर का भवन वर्ष 2010 में बाढ़ की भेंट चढ़ गया था। भवनविहीन इस विद्यालय में 2 सहायक अध्यापक और 2 शिक्षामित्र 48 बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं।
विज्ञापन

प्राथमिक विद्यालय हरसिंहपुर कायस्थ का भवन बर्ष 2021 में गंगा में आई बाढ़ में बह गया था। तब से यह विद्यालय भवनविहीन है। इस विद्यालय में 95 बच्चे पंजीकृत हैं। विद्यालय के इंचार्ज प्रधानाध्यापक राघवेंद्र मिश्रा ने कंपोजिट ग्रांट से बल्लियों पर कुछ टीन के तख्ते डाल लिए है। उसी में बैठ कर शिक्षण कार्य हो रहा है। गर्मी होने पर पेड़ के नीचे कक्षाएं लग जातीं हैं। तेज हवा चलने तथा बरसात होने पर बच्चों की छुट्टी कर दी जाती है। इस गांव में विद्यालय भवन निर्माण के लिए शासन ने धनराशि शिक्षा विभाग को भेजी थी। कार्यदायी संस्था आरईएस को भवन निर्माण कराने की जिम्मेदारी भी मिल गई। लेकिन लेखापाल व ग्राम प्रधान के बीच जगह को लेकर खींचतान चलने से विद्यालय का निर्माण नहीं हो पाया। ग्राम प्रधान सुधीर राजपूत ने बताया कि विद्यालय भवन निर्माण के लिए लेखापाल द्वारा जो भूमि दी गई है। वह भूमि बहुत ही नीचे है। बरसात होने तथा बाढ़ आने पर यहां पानी भर जाता है। जिस जगह पर उन्होंने प्रस्ताव दिया है। उस जगह को लेखपाल नहीं नाप रहे हैं। ग्राम समाज की जगह पर दबंग कब्जा किए हुए हैं। लेखपाल उस जमीन को विवादित बताकर नाप करने से इंकार कर रहे हैं। जिसके चलते निर्माण नही हो पा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बीएसए गौतम प्रसाद ने बताया कि उन्होंने अभी कुछ दिन पूर्व ही कार्यभार ग्रहण किया है। उन्हें अभी भौगोलिक स्थिति की जानकारी नहीं है। विद्यालयों का निर्माण क्यों नहीं हो पाया है, इसकी वह जांच करवाएंगे। जल्द ही भवन निर्माण करवाकर बच्चों को कक्षाओं में बैठाया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed