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Farrukhabad News: एक्सपायरी व उत्पादन तिथि के बिना बिक रहा आटा, बिगाड़ रहा सेहत
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दुकान पर बिक रहा बिना पंजीकरण संख्या लिखा आटा।
- फोटो : दुकान पर बिक रहा बिना पंजीकरण संख्या लिखा आटा।
फर्रुखाबाद। जिले में आटा का अवैध कारोबार तेजी से चल रहा है। आटा के पैकेट पर एक्सपायरी डेट न डाले जाने से इसकी वैधता का अनुमान लगाना मुश्किल। इससे लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने के साथ बैच नंबर न डालकर खुलेआम बेच सेहत से खिलवाड़ हो रहा है।
भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग गेहूं खरीदकर आटा पिसवाने से किनारा कर पैकेट में बिक रहा आटा आसानी से खरीद लेते हैंं। इससे जिले में अब आटा का अवैध कारोबार भी तेजी से चल निकला है। अधिकांश परचून की दुकानों पर खुलेआम स्थानीय ब्रांड के आटा के पैकेट बिक रहे हैं। विभिन्न ब्रांड के आटा के पैकेटों पर
उत्पादन तिथि व कालातीत तिथि (एक्सपायरी डेट) नहीं डाली जा रही है। बीच में 15 दिन या एक माह के लिए वैध लिख दिया जाता है। अब यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि यह वैधता कब से कब तक मानी जाए। दो-तीन माह के रखे हुए आटा के पैकेट भी लोग खरीदकर खाने को मजबूर हैं। इसके अलावा बैच नंबर न डालने से वह टैक्स चोरी भी आसानी से कर रहे हैं। पैकेट पर एमआरपी भी न होने से मनमाने दामों में आटा बेचा जा रहा है। आलम यह है कि किसी दुकान पर 35 रुपये किलो आटा बिक रहा है तो वही आटा दूसरी दुकान पर 37 रुपये प्रति किलो के भाव बेचा जा रहा है।
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खास बात तो यह है कि इस आटे में चावल की मिलावट भी की जा रही है। इस ओर प्रशासन के अधिकारियों की नजर नहीं पहुंच रही है। इसके चलते आटा कारोबारी लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने के साथ टैक्स चोरी कर रहे हैं। बाजार में पांच किलो व 10 किलो आटा की पैकिंग वाले पैकेट सर्वाधिक बिक रहे हैं।
पैकिंग वाली सभी वस्तुएं टैक्स के दायरे में आती हैं। आटा के पैकेट पर बिना उत्पादन तिथि, एक्सपायरी डेट, बैच नंबर, एमआरपी डालकर बेचने का मामला संज्ञान में आया है। शीघ्र ही अभियान चलाकर आटा के अवैध कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अजीत कुमार, सहायक आयुक्त खाद्य फर्रुखाबाद।
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भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग गेहूं खरीदकर आटा पिसवाने से किनारा कर पैकेट में बिक रहा आटा आसानी से खरीद लेते हैंं। इससे जिले में अब आटा का अवैध कारोबार भी तेजी से चल निकला है। अधिकांश परचून की दुकानों पर खुलेआम स्थानीय ब्रांड के आटा के पैकेट बिक रहे हैं। विभिन्न ब्रांड के आटा के पैकेटों पर
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उत्पादन तिथि व कालातीत तिथि (एक्सपायरी डेट) नहीं डाली जा रही है। बीच में 15 दिन या एक माह के लिए वैध लिख दिया जाता है। अब यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि यह वैधता कब से कब तक मानी जाए। दो-तीन माह के रखे हुए आटा के पैकेट भी लोग खरीदकर खाने को मजबूर हैं। इसके अलावा बैच नंबर न डालने से वह टैक्स चोरी भी आसानी से कर रहे हैं। पैकेट पर एमआरपी भी न होने से मनमाने दामों में आटा बेचा जा रहा है। आलम यह है कि किसी दुकान पर 35 रुपये किलो आटा बिक रहा है तो वही आटा दूसरी दुकान पर 37 रुपये प्रति किलो के भाव बेचा जा रहा है।
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खास बात तो यह है कि इस आटे में चावल की मिलावट भी की जा रही है। इस ओर प्रशासन के अधिकारियों की नजर नहीं पहुंच रही है। इसके चलते आटा कारोबारी लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने के साथ टैक्स चोरी कर रहे हैं। बाजार में पांच किलो व 10 किलो आटा की पैकिंग वाले पैकेट सर्वाधिक बिक रहे हैं।
पैकिंग वाली सभी वस्तुएं टैक्स के दायरे में आती हैं। आटा के पैकेट पर बिना उत्पादन तिथि, एक्सपायरी डेट, बैच नंबर, एमआरपी डालकर बेचने का मामला संज्ञान में आया है। शीघ्र ही अभियान चलाकर आटा के अवैध कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अजीत कुमार, सहायक आयुक्त खाद्य फर्रुखाबाद।