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लेखाकार के बिना हस्ताक्षर भुगतान करने में होगी जांच
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फर्रुखाबाद। नलकूप विभाग में भुगतान करने में हुई गड़बड़ी की जांच होगी। डीएम के आदेश पर सीडीओ ने डीडीओ को जांच सौंपी है। इससे अब फर्जीवाड़े की पोल खुलना तय माना जा रहा है।
जनपद में 315 राजकीय नलकूप हैं। प्रति नलकूप के रखरखाव के लिए प्रति वर्ष 38 हजार रुपये का बजट मिलता है। बीते वित्तीय वर्ष में 23 नये नलकूप लगे और कुछ रिबोर किए गए। यह दोनों काम टेंडर व वर्क आर्डर के माध्यम से कराए जाते हैं।
लेकिन विभागीय अफसरों ने बिना प्रचार-प्रसार के गुपचुप तरीके से टेंडर की औपचारिकता पूरी करके चहेते ठेकेदारों को काम दे दिया। हालात यह रहे कि सेटिंग न बैठ पाने से स्थानीय ठेकेदारों को काम नहीं मिला और एटा के एक ठेकेदार को 13 नलकूपों का काम सौंप दिया गया। इसके अलावा कानपुर आदि के ठेकेदारों ने भी काम किया।
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मार्च में वित्तीय वर्ष समाप्त होता देख तेजी से भुगतान किया गया। अधिकांश बिल वाउचर पर लेखाकार के हस्ताक्षर कराए बिना ही अधिशासी अभियंता के हस्ताक्षर से डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान कर दिया गया। 30 मार्च के अंक में अमर उजाला ने इसका खुलासा करते हुए प्रमुखता से खबर प्रकाशित की तो जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने इसका संज्ञान लिया और भुगतान की पत्रावली तलब कर लीं।
उन्होंने करीब 25 बिल वाउचर देखे तो अधिकांश पर अधिशासी अभियंता के ही हस्ताक्षर से भुगतान होना पाया गया। इस पर जिलाधिकारी ने सीडीओ को जांच के निर्देश दिए। मुख्य विकास अधिकारी एम. अरून्मोली ने डीडीओ को जांच सौंपी है। डीडीओ योगेंद्र कुमार पाठक ने बताया कि उन्हें जांच करने का आदेश मिला है। मामला भुगतान संबंधी है, इसलिए जांच कमेटी में एकाउंट संबंधी अधिकारी या लेखाकार आदि को भी शामिल किया जाएगा।
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जनपद में 315 राजकीय नलकूप हैं। प्रति नलकूप के रखरखाव के लिए प्रति वर्ष 38 हजार रुपये का बजट मिलता है। बीते वित्तीय वर्ष में 23 नये नलकूप लगे और कुछ रिबोर किए गए। यह दोनों काम टेंडर व वर्क आर्डर के माध्यम से कराए जाते हैं।
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लेकिन विभागीय अफसरों ने बिना प्रचार-प्रसार के गुपचुप तरीके से टेंडर की औपचारिकता पूरी करके चहेते ठेकेदारों को काम दे दिया। हालात यह रहे कि सेटिंग न बैठ पाने से स्थानीय ठेकेदारों को काम नहीं मिला और एटा के एक ठेकेदार को 13 नलकूपों का काम सौंप दिया गया। इसके अलावा कानपुर आदि के ठेकेदारों ने भी काम किया।
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मार्च में वित्तीय वर्ष समाप्त होता देख तेजी से भुगतान किया गया। अधिकांश बिल वाउचर पर लेखाकार के हस्ताक्षर कराए बिना ही अधिशासी अभियंता के हस्ताक्षर से डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान कर दिया गया। 30 मार्च के अंक में अमर उजाला ने इसका खुलासा करते हुए प्रमुखता से खबर प्रकाशित की तो जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने इसका संज्ञान लिया और भुगतान की पत्रावली तलब कर लीं।
उन्होंने करीब 25 बिल वाउचर देखे तो अधिकांश पर अधिशासी अभियंता के ही हस्ताक्षर से भुगतान होना पाया गया। इस पर जिलाधिकारी ने सीडीओ को जांच के निर्देश दिए। मुख्य विकास अधिकारी एम. अरून्मोली ने डीडीओ को जांच सौंपी है। डीडीओ योगेंद्र कुमार पाठक ने बताया कि उन्हें जांच करने का आदेश मिला है। मामला भुगतान संबंधी है, इसलिए जांच कमेटी में एकाउंट संबंधी अधिकारी या लेखाकार आदि को भी शामिल किया जाएगा।